Top
Begin typing your search above and press return to search.
मुख्य सुर्खियां

बार काउंसिल ने सांसदों, विधायकों और विधान पार्षदों से पूछा, क्यों न उनको एडवोकेट के रूप में प्रैक्टिस करने से रोक दिया जाए

LiveLaw News Network
11 Jan 2018 8:10 AM GMT
बार काउंसिल ने सांसदों, विधायकों और विधान पार्षदों से पूछा, क्यों न उनको एडवोकेट के रूप में प्रैक्टिस करने से रोक दिया जाए
x

बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया (बीसीआई) ने सांसदों, विधायकों और विधान परिषद् के सदस्यों से उस अपील पर उनकी राय जाननी चाही है जिसमें मांग की गई है कि इन लोगों को एडवोकेट के रूप में प्रैक्टिस नहीं करने देना चाहिए। इन लोगों से एक सप्ताह के भीतर अपने विचार भेज देने को कहा गया है जिसके बाद 22 जनवरी को बीसीआई की बैठक में इस बारे में अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

बीसीआई की प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है, “काउंसिल की उप समिति यह उचित समझती है कि इस मुद्दे पर किसी भी तरह का अंतिम निर्णय लेने से पहले सांसदों, विधायकों और विधान पार्षदों की राय ली जाए जो कि कानूनी पेशे में हैं।”

बार काउंसिल ने यह पत्र काउंसिल को एक भाजपा नेता मनन कुमार मिश्र और एडवोकेट अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा लिखे गए पत्र के मिलने के बाद लिखा है। इन लोगों ने बीसीआई से कहा था कि सांसदों, विधायकों और विधान पार्षदों को एडवोकेट के रूप में प्रैक्टिस करने से रोक दिया जाए।

उपाध्याय ने डॉ. हनिराज एल चुलानी बनाम बार काउंसिल ऑफ़ महाराष्ट्र एंड गोवा, 1996 एआईआर 1708, मामले में दिए गए फैसले को अपना आधार बनाया जिसमें कहा गया था कि एक एडवोकेट के रूप में किसी व्यक्ति को प्रैक्टिस नहीं करने दिया जाएगा अगर वह पूर्णकालिक या अंशकालिक रूप से सरकारी सेवा या रोजगार में हैं, कोई व्यापार, व्यवसाय या किसी तरह के अन्य पेशे में हैं।

उन्होंने बीसीआई नियमों के पार्ट VI के खंड VII, अध्याय-II का हवाला भी दिया जिसमें ऐसे रोजगारों की सूची है जिसमें शामिल लोगों को एडवोकेट के रूप में प्रैक्टिस करने की छूट नहीं है। इसके बाद उन्होंने यह कहा कि कार्यपालिका और न्यायपालिका के सदस्यों को प्रैक्टिस करने की छूट नहीं है जबकि सांसदों, विधायकों का कहना है कि उनको ऐसा करने से रोकना संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 की भावना के खिलाफ है।

उन्होंने आगे कहा कि कई सांसद और विधायक संसद और विधानसभा सत्र के दौरान मामलों में पैरवी करने के लिए कोर्ट जाते हैं। उन्होंने कहा, “विधायकों को कार्यपालिका और विधायका की तुलना में अच्छा वेतन मिलता है, भत्ते मिलते हैं और अवकाश के बाद की सुविधाएं भी। यह एक सम्मानजनक और पूर्णकालिक पेशा है बशर्ते यह लोगों की सेवा को समर्पित हो। ...कानूनी पेशे के सम्मान को बचाने और संरक्षित रखने की जरूरत है। इसलिए एडवोकेट्स अधिनियम और बीसीआई के नियमों को अवश्य ही पूरी टकराह लागू किया जाना चाहिए ताकि न्याय का भला हो सके।”

उन्होंने कहा कि ये एडवोकेट के रूप में ये विधायक और सांसद कोर्ट में “क़ानून तोड़ने वालों” की पैरवी करते हैं और यह न केवल अनैतिक और बेईमानी है बल्कि बीसीआई के नियम 49 का उल्लंघन भी।




Next Story