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सुप्रीम कोर्ट में मेंशनिंग के नियमों नें बदलाव, अब जूनियर वकील भी कर सकेंगे जरूरी मामलों की मेंशनिंग

LiveLaw News Network
4 Jan 2018 6:18 AM GMT
सुप्रीम कोर्ट में मेंशनिंग के नियमों नें बदलाव, अब जूनियर वकील भी कर सकेंगे जरूरी मामलों की मेंशनिंग
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नए साल के अपने पहले ही दिन एक अहम फैसला लिया गया है। अब सुप्रीम कोर्ट में जल्द सुनवाई के लिए चीफ जस्टिस के सामने AOR यानी एडवोकेट ऑन रिकार्ड के अलावा जूनियर वकील भी मेंशनिंग कर सकेंगे।

गुरुवार को CJI दीपक मिश्रा ने मेंशनिंग के पुराने नियम में संशोधन किया है। चीफ जस्टिस ने कहा कि दो शर्तों के साथ जूनियर वकीलों को भी मेंशनिंग की इजाजत दी जा रही है कि वो पूरी तैयारी के साथ मेंशनिंग के लिए आएंगे और बकायदा ब्रीफ तैयार रखेंगे। उन्होंने कहा कि ये बदलाव किया जा रहा है ताकि जूनियर वकील भी मेंशनिंग की प्रक्रिया को सीख सकें।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में जरूरी मामलों की जल्द सुनवाई के लिए मेंशनिंग पर 20 सितंबर को चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने साफ कर दिया था कि वरिष्ठ वकीलों को सुबह के वक्त जरूरी मामलों/ नई अर्जी/ हस्तेक्षेप याचिका की मेंशनिंग की इजाजत नहीं होगी और सिर्फ AOR यानी एडवोकेट ऑन रिकार्ड ही ये मेंशनिंग कर पाएंगे।

दरअसल  चीफ जस्टिस की कोर्ट में वरिष्ठ वकीलों के लाइन को तोडने और गैर वरिष्ठ वकीलों के बीच कहासुनी हो गई थी। ये मेंशनिंग रोजाना शुरु के 20 मिनट ही चलती है। चूंकि चीफ जस्टिस सुप्रीम कोर्ट के प्रशासनिक हेड हैं इसलिए लिस्टिंग के लिए या टैगिंग आदि से लिए देश की पहली कोर्ट में ही मेंशनिंग की जाती है।

गौरतलब है कि मेंशनिंग की प्रथा कोई लिखित नियम नहीं है और बार के पुराने रिवाज के मुताबिक वरिष्ठ वकीलों को इससे बचना चाहिए। जस्टिस वैकेंटचलैया और जस्टिस अहमदी के चीफ जस्टिस बनने के वक्त वरिष्ठ वकीलों द्वारा मेंशनिंग परंपरा पर रोक लगी थी। इसके पीछे सोच ये थी कि जूनियर वकीलों को भी मौका मिले और वरिष्ठ वकील असली मुकदमों में हिस्सा लें। लेकिन बाद में कई वरिष्ठ वकीलों ने ये शुरु किया क्योंकि मेंशनिंग के लिए वो फीस भी लेने लगे। बिना किसी प्रयास चीफ जस्टिस के सामने केस की मेंशनिंग कर लाखों रुपये फीस लेने लगे। कई वरिष्ठ एक दिन में तीन से चार मामले लेने लगे।  चूंकि इस दौरान वरिष्ठ वकीलों को ही प्राथमिकता दी जाती रही तो मेंशनिंग का 20 मिनट का वक्त वरिष्ठ वकीलों द्वारा ही ले लिया जाता और जूनियर वकील काफी वक्त से लाइन में खडे होने के बावजूद वापस लौट जाते और अगले दिन दोबारा फिर से कोशिश करते।

19 सितंबर को  मेंशनिंग के वक्त लाइन में फंसे वकील दिनेश और चीफ जस्टिस के बीच कडे शब्दों का आदान प्रदान हुआ। दरअसल वकील ने वरिष्ठ वकीलों द्वारा मेंशनिंग का सारा वक्त लेने और गैर सीनियर वकीलों को मौका ना मिलने पर आपत्ति जाहिर की थी। वकील दिनेश ने कहा कि मेंशनिंग का सारा वक्त वरिष्ठ वकील और उनके मुव्वकिल ले लेते हैं ऐसे  में वो लोग पीछे रह जाते हैं जो वरिष्ठ वकीलों को फीस नहीं दे पाते और तय वक्त में मेंशनिंग नहीं कर पाते। वकील दिनेश ने चीफ जस्टिस को कहा कि वो 30 मिनट से लाइन में लगे हैं लेकिन उनकी याचिका की जल्द सुनवाई की मेंशनिंग का मौका नहीं आया।

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