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संसद में मंत्री का बयान : सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट में खाली पदों को भरने के लिए कोई प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ

LiveLaw News Network
31 Dec 2017 8:04 AM GMT
संसद में मंत्री का बयान : सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट में खाली पदों को भरने के लिए कोई प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ
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केंद्रीय क़ानून, न्याय और कॉर्पोरेट मामलों के राज्यमंत्री पीपी चौधरी ने बुधवार को लोकसभा में बताया कि सरकार को सुप्रीम कोर्ट में छह जजों और नौ हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए कोई प्रस्ताव नहीं मिला है। देश के नौ उच्च न्यायालयों में मुख्य न्यायाधीश नहीं हैं। इन सभी उच्च न्यायालयों का काम कार्यवाहक न्यायाधीश देख रहे हैं।

मंत्री ने तेलुगु देशम पार्टी के सांसद कोनकल्ला नारायण राव और जेसी दिवाकर रेड्डी एवं शिव सेना सांसद रवीन्द्र विश्वनाथ गायकवाड ने जजों के खाली पदों, उच्च न्यायालयों में मुख्य न्यायाधीशों और राज्यों के अधीनस्थ न्यायपालिका में न्यायिक अधिकारियों के खाली पदों के बारे में प्रश्न पूछा था। यह प्रश्न भी पूछा गया कि सरकार एक निश्चित समय सीमा के भीतर इन पदों को भरने के लिए क्या कदम उठा रही है।
देश के विभिन्न 24 उच्च न्यायालयों में जो पद रिक्त हैं उसकी रिपोर्ट संसद में पेश की गई है। इस रिपोर्ट के अनुसार 20 दिसंबर तक कुल 395 पद रिक्त हैं। इनमें इलाहाबाद हाई कोर्ट में 51, कलकत्ता हाई कोर्ट में 39, कर्नाटक हाई कोर्ट में 37, पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में 35, बॉम्बे में 24 और दिल्ली हाई कोर्ट में 23 पद रिक्त हैं। इसके अलावा न्यायिक अधिकारियों के 5984 पद खाली हैं जिसमें सर्वाधिक 1344 पद उत्तर प्रदेश में हैं। इसके बाद बिहार में 825 और मध्य प्रदेश में 748 पदों पर नियुक्तियां होनी हैं।

मंत्री ने कहा कि उच्च न्यायालयों में भर्तियों के लिए कोई समय सीमा इसलिए नहीं दी जा सकती क्योंकि यह न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच एक निरंतर और साझेदारी से होने वाला काम है जिसमें कई तरह की संवैधानिक अथॉरिटीज की भी भूमिकाएं हैं। फिर, अधीनस्थ न्यायपालिका में खाली पदों पर नियुक्ति पूरी तरह संबंधित उच्च न्यायालयों और राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है।

जहाँ तक सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों के खाली पदों की बात है, यह कहा गया कि मेमोरेंडम ऑफ़ प्रोसीजर के अनुसार, भारत के मुख्य न्यायाधीश ने इस बारे में सुप्रीम कोर्ट के चार सबसे वरिष्ठ न्यायाधीशों की सदस्यता वाले कॉलेजियम के साथ सलाह मशविरा करके कदम उठाया है। ऐसा पदों के रिक्त होने की संभावना से कम से कम एक महीना पहले उठाया गया। पर भारत सरकार को सुप्रीम कोर्ट में छह रिक्त पदों और नौ उच्च न्यायालयों में मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति के बारे में कोई प्रस्ताव अभी तक नहीं मिला है।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा 16 दिसंबर 2015 को वर्तमान एमओपी में हुए संशोधन के बाद जारी दिशानिर्देशों के अनुसार वर्ष 2016 में सुप्रीम कोर्ट में 4 और उच्च न्यायालयों के 14 मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति हुई। इसके अलावा, उच्च न्यायालयों में 126 ताजा जजों की नियुक्ति हुई जो कि एक कैलेंडर वर्ष में होने वाली सबसे अधिक नियुक्ति है। वर्ष 2017 में 19 दिसंबर तक, सुप्रीम कोर्ट में पांच जज, उच्च न्यायालयों के 8 मुख्य न्यायाधीशों और उनमें ताजा 115 जजों की नियुक्तियां हुई हैं।

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