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नीतीश कुमार के खिलाफ याचिका में तथ्य गुमराह करने वाले, जुर्माने के साथ खारिज हो : चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में कहा

LiveLaw News Network
1 Dec 2017 4:43 AM GMT
नीतीश कुमार के खिलाफ याचिका में तथ्य गुमराह करने वाले, जुर्माने के साथ खारिज हो : चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में कहा
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नीतीश कुमार को बिहार सीएम के पद से अयोग्य घोषित करने की मांग वाली याचिका पर चुनाव आयोग  सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा है कि ये याचिका सुनवाई योग्य नहीं नहीं है और भारी जुर्माना लगाकर इसे  खारिज किया जाना चाहिए।

वकील मनोहर लाल शर्मा कि याचिका पर जवाब दाखिल करते हुए चुनाव आयोग ने कहा है कि  याचिका में दी गई जानकारी गुमराह करने वाली है और ये अदालती प्रक्रिया का दुरुपयोग है। ये तुच्छ अर्जी है और गलत तथ्यों पर आधारित है।

हलफनामे मे कहा गया है कि नीतीश कुमार ने 2012 और 2015 में बिहार विधानसभा का चुनाव नहीं लडा था तो चुनावी हलफनामा दाखिल करने का सवाल ही नहीं है। इसी तरह उन्होंने 2013 में भी बिहार विधान परिषद MLC का चुनाव नहीं लडा फिर याचिकाकर्ता एम एल शर्मा ने कहां से नीतीश कुमार के चुनावी हलफनामे हासिल किए? ये भी कहा गया है कि याचिकाकर्ता ने चुनाव आयोग को ईमेल के जरिए ज्ञापन भेजा था लेकिन तकनीकी कारणों से ये ईमेल खुल नहीं रही है।

चुनाव आयोग के मुताबिक इस मामले से याचिकाकर्ता के कोई मौलिक अधिकारों का हनन नहीं हुआ है और जनहित याचिका दाखिल नहीं की जा सकती। याचिकाकर्ता को जनप्रतिनिधि अधिनियम के प्रावधान 125 के तहत ये याचिका चुनाव आयोग को या इसकी शिकायत पुलिस को देनी चाहिए थी।

सुप्रीम कोर्ट 8 दिसंबर को मामले की सुनवाई करेगा | 23 अक्तूबर को नीतीश कुमार को बिहार सीएम के पद से अयोग्य घोषित करने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई को तैयार हो गया था।

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की बेंच ने इस बाबत चुनाव आयोग से 4 हफ्ते में जवाब देने को कहा था।

26 सितंबर को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने नीतीश कुमार को बिहार सीएम के पद से अयोग्य घोषित करने की मांग वाली याचिका पर चुनाव आयोग से उसका पक्ष पूछा था। सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की बेंच ने याचिकाकर्ता वकील को दो हफ्ते में याचिका की कॉपी चुनाव आयोग को देने को कहा था।

दरअसल वकील एमएल शर्मा ने याचिका दाखिल कर कहा है कि 2006 से 2015 के दौरान नीतीश कुमार ने हलफ़नामे में ये खुलासा नहीं किया कि 1991 में उन पर हत्या के मामले में एफआईआर दर्ज हुई थी। याचिका में दावा किया गया है कि नीतीश कुमार ने अपने हलफनामे में इस बात का जिक्र नहीं किया कि उनके नाम पर हत्या का मामला दर्ज है। इसलिए नीतीश कुमार को सीएम पद के लिए अयोग्य घोषित किया जाए। याचिका में नीतीश कुमार के खिलाफ हत्या के मामले में उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग भी की गई है।

इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि नीतीश ने 2006 और 2015 के बीच अपने हलफनामों में उनक पर हत्या मामले में प्राथमिकी दर्ज करने का खुलासा नहीं किया है। याचिका के अनुसार नीतीश कुमार अपने आपराधिक रिकॉर्ड को छुपाने के बाद संवैधानिक पद पर नहीं रह सकते और उन्हें अयोग्य करार दिया जाए।

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