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CPI नेता ने आधार को PAN से लिंक करने के खिलाफ दाखिल याचिका सुप्रीम कोर्ट से वापस ली

LiveLaw News Network
17 Nov 2017 10:38 AM GMT
CPI नेता ने आधार को PAN से लिंक करने के खिलाफ दाखिल याचिका सुप्रीम कोर्ट से वापस ली
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CPI नेता बिनॉय विस्वम ने इंकम टैक्स से आधार नंबर से लिंक करने के कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अर्जी को वापस ले लिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को कहा कि वो अपना आदेश जारी कर चुके हैं और अब वो चाहे तो नवंबर के आखिरी हफ्ते में सुनवाई करने वाली पांच जजों की संविधान पीठ में ये अर्जी दाखिल कर सकते हैं।

दरअसल CPI नेता बिनॉय विस्वम ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर दो जजों की बेंच के उस आदेश पर फिर से विचार करने की मांग की थी जिसमें इंकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 139 AA की संवैधानिकता को बरकरार रखा गया था। इस एक्ट के मुताबिक आयकर रिटर्न के लिए PAN से आधार कार्ड लिंक करना अनिवार्य है।

9 जून के इस फैसले में जस्टिस ए के सिकरी और जस्टिस अशोक भूषण ने कहा था कि इस प्रावधान की संवैधानिकता को संविधान पीठ के सामने लंबित संविधान के अनुच्छेद 21 के मामले  में फैसले तक बरकरार रखा जाता है। तब तक सेक्शन 139 AA की उपधारा 2 पर आंशिक रूप से रोक लगाई जाती है।

जस्टिस आर एफ नरीमन के फैसले को बताते हुए विस्वम ने कहा है कि तीन तलाक मामले में संविधान पीठ ने इस फैसले को पलट दिया है। जस्टिस नरीमन ने अपने फैसले में कहा है कि

बिहार राज्य बनाम बिहार डिस्टिलेरी लिमिटेड, (1997) 2 SCC 453] , SCC पैरा 22, एमपी राज्य बनाम राकेश कोहली (2012) 6 SCC 312 : (2012) 3 SCC (Civ) 481] , SCC पैरा 17 से 19, राजबाला बनाम हरियाणा राज्य  (2016) 2 SCC 445] , SCC पैरा 53 से 65 , बिनॉय विस्वम बनाम भारत सरकार, 2017) 7 SCC 59] , SCC पैरा 80 से 82, मैक्डॉवल 1996) 3 SCC 709] में अनुच्छेद 14 के तहत किसी भी मनमाने कानून को रद्द करने के औजार के तौर पर देखा गया। मैक्डॉवल मामले में कोर्ट ने गौर किया है कि कई दूसरे फैसलों पर विचार नहीं किया गया जो बराबर या ज्यादा मजबूत थे। यहां तक कि इसमें दिए गए कारणों में भी खामियां हैं। इसलिए ये फैसला अब अच्छा कानून नहीं है।

इसके बाद जस्टिस के एस पुट्टास्वामी बनाम भारत सरकार मामले में नौ जजों की संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से मानी कि निजता का अधिकार मौलिक अधिकार है और संविधान के अनुच्छेद 21 का हिस्सा है।

याचिका में कहा गया है कि PAN से आधार कार्ड को लिंक करने का प्रावधान उद्देश्य के खिलाफ है। विस्मव के फैसले में कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद  19(1)(g) के तहत ही विचार किया था इसलिए निजता के अधिकार पर आए फैसले के बाद इस पर संविधान पीठ के फैसले के नजरिए से विचार किया जाना चाहिए।

सिर्फ PAN कार्ड के कालाधन, आतंकी फंडिंग जैसे मामलों में दुरुपयोद के आरोपों के आधार पर किसी सामान्य नागरिकों को अपने बायोमीट्रिक देने के लिए कार्रवाई के लिए तर्कसंगत नहीं माना जा सकता। इसलिए शायरा बानों और फिर निजता के अधिकार पर संविधान पीठ के फैसले के मद्देनजर  इंकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 139 AA को रद्द किया जाना चाहिए क्योंकि ये संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन करता है।

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