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राजीव गांधी के हत्यारे ने सजा के निलंबन की अर्जी दी, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और सीबीआई से मांगा जवाब

LiveLaw News Network
14 Nov 2017 8:41 AM GMT
राजीव गांधी के हत्यारे ने सजा के निलंबन की अर्जी दी, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और सीबीआई से मांगा जवाब
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पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के दोषी एजी पेरारीवलन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर अपनी आजीवन कारावास की सजा के निलंबन की मांग की है।

पेरारीलवन की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को जस्टिस रंजन गोगोई की बेंच ने  केंद्र सरकार और सीबीआई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कोर्ट ने कहा है कि इस अर्जी पर दो हफ्ते में जवाब दिया जाए। कोर्ट अब 6 दिसंबर को मामले की सुनवाई करेगा।

दरअसल पेरारीवलन ने अपनी याचिका में कहा है कि जब तक मल्टी डिस्पलेनेरी मॉनिटरिंग अथॉरिटी ( MDMA)  की जांच पूरी नहीं होती उनकी सजा निलंबित की जानी चाहिए।  ये एजेंसी 1998 में जस्टिस जैन कमिशन की सिफारिश के आधार पर बनी थी।

मंगलवार को पेरारीवलन के वकील गोपाल शंकरनारायण ने कहा कि वो 26 साल से जेल में  बंद हैं  और उन्हें 9 वोल्ट की दो बैटरी सप्लाई के लिए दोषी करार दिया गया था जिससे बम बनाकर राजीव गांधी की हत्या की गई। उन्होंने सीबीआई के एसपी त्यागराजन के हलफनामे का हवाला दिया है जिसमें उन्होंने कहा  था कि पेरारीवलन से बैटरी सप्लाई के बारे में सवाल नहीं किए। गोपाल ने कहा कि  MDMA भी अब तक उस शख्स से पूछताछ नहीं कर पाई है जिसने बम बनाया था और वो श्रीलंका में है।

गौरतलब है कि  राजीव गांधी हत्याकांड में जैन कमिशन की रिपोर्ट के आधार पर मानव बम बनाने की साजिश को लेकर आगे जांच कराने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है।

 17 अगस्त 2017 को राजीव गांधी हत्याकांड में सजायाफ्ता एजी पेरारीवलन की जैन कमीशन के आधार पर आगे की जांच की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस रंजन गोगोई की बेंच ने सीबीआई से सवाल किए थे। सुप्रीम कोर्ट ने पूछा था कि राजीव गांधी की हत्या के लिए मानव बम बनाने की साजिश का केस क्या फिर से खोला गया? मानव बम बनाने की साजिश के केस का क्या नतीजा निकला? सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई से इन सवालों के जवाब देने को कहा था। सीबीआई ने इस संबंध में सील कवर में जांच की स्टेटस रिपोर्ट भी कोर्ट में दाखिल की थी।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई से कहा था कि जैन कमीशन के निर्देश के मुताबिक राजीव गांधी की हत्या की आगे जांच होनी ही चाहिए।  सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई से मामले की आगे की जांच के लिए चार हफ्ते में सील कवर में स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी।

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा था कि सीबीआई बताए कि इस मामले की आगे की जांच कब तक पूरी हो सकती है?  साथ ही यह भी बताए कि इस केस में फरार आरोपियों के प्रत्यर्पण समेत क्या-क्या कानूनी अड़चनें आ रही हैं? इसके अलावा कोर्ट ने पूछा था कि सीबीआई ने इन अड़चनों के लिए क्या कदम उठाए हैं?

सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से बताया गया था कि इस मामले की जांच चल रही है। लेकिन यह नहीं बताया जा सकता कि केस की जांच में कितना वक्त लगेगा। इस मामले में फरार आरोपियों के प्रत्यर्पण में भी वक्त लग रहा है। जब तक इन आरोपियों को वापस नहीं लाया जाएगा जांच पूरी नहीं हो सकती।

दरअसल राजीव गांधी हत्याकांड में दो मामले दर्ज किए गए थे। एक केस में मुरगन, नलिनी, पेरारीवलन समेत सात लोगों को सजा हो चुकी है. वे उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। दूसरे केस में लिट्टे चीफ प्रभाकरण, अकीला और पुट्टूअम्मन समेत 11 लोगों को साजिश का आरोपी बनाया गया था। हालांकि इनमें सभी  की मौत हो चुकी है। याचिका में कहा गया है कि जैन कमीशन की सिफारिश के आधार पर मामले की आगे जांच के लिए सीबीआई की देखरेख में मल्टी डिस्पलेनेरी मॉनिटरिंग अथॉरिटी बनाई गई थी, लेकिन 18 साल बीत जाने पर भी जांच आगे नहीं बढ़ी।

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