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JP के डायरेक्टर 22 नवंबर को पेश हों : सुप्रीम कोर्ट

LiveLaw News Network
13 Nov 2017 1:08 PM GMT
JP के डायरेक्टर 22 नवंबर को पेश हों : सुप्रीम कोर्ट
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सुप्रीम कोर्ट ने एक बडा कदम उठाते हुए जयप्रकाश  एसोसिएटस लिमिटेड ( JAL)  के सभी डायरेक्टर को कोर्ट में पेश होने के आदेश दिए हैं।

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की बेंच ने कहा है कि संस्थानिक निदेशक को छोडकर सभी डायरेक्टर 22 नवंबर को कोर्ट में पेश हों और अपनी संपत्ति की जानकारी कोर्ट को दें।

दरअसल जेपी की ओर से सोमवार को कोर्ट में कहा गया कि कंपनी 700 करोड रुपये अभी रजिस्ट्री में जमा कर सकती है। लेकिन कोर्ट ने इसे नहीं माना और डायरेक्टरों को तलब कर लिया।

पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने जयप्रकाश एसोसिएटस लिमिटेड ( JAL) की उस अर्जी को नकार दिया था जिसमें उसने 2000 करोड रुपये की बजाए 400 करोड रुपये सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा कराने की गुहार लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि 13 नवंबर को सुनवाई के दौरान वो 1000 करोड या विचारणीय रकम लेकर कोर्ट आए।

जेपी की ओर से पेश वकील अनुपम लाल ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की बेंच के सामने कहा कि वो सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक 2 हजार करोड रुपये जमा नहीं कर् सकते। हालांकि शुक्रवार तक 400 करोड रुपये जमा किए जा सकते हैं।

सुनवाई कर रही बेंच ने कहा था कि कंपनी को पांच नवंबर तक दो हजार करोड रुपये जमा कराने को कहा गया था। जेपी को अपनी संपत्ति बेचने की कोशिश करनी चाहिए। कंपनी की ओर से कोई विचारणीय रकम लेकर कोर्ट आना चाहिए।

गौरतलब है कि 26 अक्तूबर को सुप्रीम कोर्ट ने जयप्रकाश एसोसिएटस लिमिटेड ( JAL)  की यमुना एक्सप्रेस वे को 2500 करोड में दूसरी कंपनी को सौंपने की मांग को खारिज कर अपने आदेश में संशोधन करने से इंकार कर दिया था।  हालांकि कोर्ट ने 27 अक्तूबर की बजाए जेपी ग्रुप को 5 नवंबर तक 2000 करोड़ रुपये जमा कराने का आदेश दिया था।

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस ए एम खानवेलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड की बेंच को ग्रुप की ओर से कपिल सिब्बल और मुकुल रोहतगी ने बताया था कि वो 165 किलोमीटर लंबे 6 लेन के यमुना एक्सप्रेस वे को किसी दूसरी कंपनी को 2500 करोड रुपये में सौंपना चाहता है ताकि वो निवेशकों के वापस करने के लिए दो हजार करोड रुपये दे सके। उन्होंने सील कवर में ये कागजात भी कोर्ट में दाखिल किए थे। AG केके वेणुगोपाल ने इसका विरोध करते हुए कहा था कि इस तरह एक्सप्रेस वे किसी तीसरे पक्ष को नहीं दिया जा सकता क्योंकि इसमें यमुना एक्सप्रेव वे अथारिटी और यूपी सरकार भी स्टेक होल्डर हैं। इसके अलावा इसके प्रोजेक्ट से 15 वित्तीय संस्थान भी जुडे हैं। जेपी ने ये हाइवे बोली लगाकर लिया था और इसे किसी तीसरे पक्ष को नहीं दिया जा सकता। वहीं IRB की ओर से कहा गया कि जेपी 22 हजार फ्लैट देने में नाकाम रहा है और मार्च 2021 तक 5000 करोड रुपये और चाहिए। देर शाम जारी आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने जेपी की मांग ठुकरा दी थी।

गौरतलब 23 अक्तूबर को सुप्रीम कोर्ट ने जेपी को संपत्ति बेचने की इजाजत दी जाए या नहीं, इस पर अटार्नी जरनल और आईआरबी से राय मांगी थी।

9 अक्तूबर को भी सुप्रीम कोर्ट ने जेपी को राहत देने से इंकार कर दिया था।  सुप्रीम कोर्ट  ने जेपी को कहा था कि कंपनी को 27 अक्तूबर तक दो हजार करोड रुपये जमा कराने ही होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने 11 सितंबर को आदेश जारी कर जेपी को सुप्रीम कोर्ट में दो हजार करोड रुपये जमा कराने के आदेश दिए थे। इससे पहले 11 सितंबर को जेपी इन्फ्राटेक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दिवाला प्रक्रिया पर लगी रोक में संशोधन करते हुए दिवाला प्रक्रिया को फिर से बहाल कर दिया था। साथ ही जेपी को झटका देते हुए कहा था कि JP इंफ्रा और एसोसिएटस के प्रंबंध निदेशक व निदेशक सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बिना देश छोडकर नहीं जाएंगे।  27 अक्टूबर तक जेपी एसोसिएटस सुप्रीम कोर्ट में 2000 करोड रुपये जमा करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इनसॉलवेंसी रिसॉलवेंसी प्रोफेशनल जेपी से सारा रिकार्ड हासिल करेंगे और फ्लैट बार्यस के भले के लिए एक योजना तैयार कर 45 दिनों में सुप्रीम कोर्ट में देंगे।

बेंच ने कहा था कि  ICCI, IDBI और SBI को छोडकर दिवाला प्रक्रिया में शामिल कोई भी व्यक्ति देश छोडकर नहीं जाएगा। कोर्ट ने कहा कि ये बडे स्तर की मानव संबंधित दिक्कतें हैं और कोर्ट खरीदारों के लिए बेहद चिंतित है। खरीददार मध्यम वर्ग से हैं कोर्ट उनके लिए चिंतित हैं। कोर्ट को बिल्डर कंपनियों के बारे में चिंता नहीं है।

जेपी इंफ्राटेक मामले में नया मोड आ गया था जब IDBI बैंक सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था और जेपी इन्फ्रा दिवालिया घोषित करने की प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के आदेश पर संशोधन की मांग की थी।

IDBI बैंक ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि जो सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया उससे फ्लैट खरीदारों को नही बल्कि जेपी को फ़ायदा हुआ है।

पहले सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद स्थित नेशनल  कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के 9 अगस्त के आदेश पर रोक लगा दी थी। वहीं सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस ए एम खानवेलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड ने खरीदारों की याचिका पर जेपी, आरबीआई व अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। कोर्ट ने AG के के वेणुगोपाल को इस केस में कोर्ट की मदद करने के लिए कहा था। याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया है कि NCLT में IDBI के 526.11 करोड रुपये के कर्ज पर कारवाई चल रही थी लेकिन इस आदेश से खरीदारों के 25 हजार करोड रुपये दांव पर लग गए हैं। दरअसल जेपी इन्फ्राटेक के खिलाफ दिवालिया और ऋण शोधन अक्षमता कानून 2016 के तहत कार्रवाई चल रही थी। याचिका में इस कानून को भी चुनौती दी गई है। इस मामले में याचिकाकर्ता खरीदारों ने आरोप लगाया है कि बिना गारंटी वाले देनदार की वजह से न तो घर मिलेगा और न ही धन वापस मिलेगा। मामले में 24  फ्लैट मालिकों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में उनके वकील अजीत कुमार सिन्हा ने कोर्ट के सामने मुद्दा उठाते हुए कहा था कि जेपी इन्फ्राटेक की 27 रेजिडेंशल स्कीम में करीब 32 हजार लोगों ने फ्लैट बुक किए हैं। लेकिन कंपनी के खिलाफ दिवालिया कानून के तहत कार्रवाई शुरू की गई है। इस तरह उनका पैसा डूबने के कगार पर पहुंच गया है। मौजूदा दिवालिया कानून के तहत जब प्रक्रिया शुरू होगी तो पहले उन देनदारों का आर्थिक हित प्रोटेक्ट किया जाएगा, जो गारंटी वाले देनदार हैं। फ्लैट खरीदार तो बिना गारंटी वाले देनदार हैं, उन्हें कानून के तहत कुछ भी नहीं मिलने वाला है। अगर दिवालिया कानून के तहत मामला पेंडिंग हो तो उपभोक्ता अदालत के फैसले के बावजूद उसे लागू नहीं किया जा सकेगा।ऐसे में सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई गई है कि खरीदारों के हितों को सुरक्षित किया जाए। फ्लैट खरीदारों ने इलाहाबाद स्थित नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल के आदेश पर रोक की मांग की थी। 9 अगस्त 2017 को  ट्रिब्यूनल ने जेपी बिल्डर को दिवालिया घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की थी।

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