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दिल्ली सरकार VS LG : अहम हुई सुप्रीम कोर्ट में लडाई, चिदंबरम ने कहा, LG नहीं हैं वायसराय

LiveLaw News Network
9 Nov 2017 5:48 AM GMT
दिल्ली सरकार VS LG : अहम हुई सुप्रीम कोर्ट में लडाई, चिदंबरम ने कहा, LG नहीं हैं वायसराय
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सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ में अधिकारों को लेकर दिल्ली सरकार बनाम उपराज्यराल केस की सुनवाई अहम हो गई है।

बुधवार को दिल्ली सरकार की ओर से पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने बहस शुरू की है। चिदंबरम ने सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर कहा कि LG ब्रिटिश राज के वक्त के दिल्ली के वायसराय नहीं हैं जैसा कि हाईकोर्ट के आदेश ने बना दिया है।

उन्होंने कहा कि वो सिर्फ राष्ट्रपति के एजेंट हैं और उनके पास उतने अधिकार नहीं हैं जितने राष्ट्रपति को हासिल हैं। चिदंबरम ने ये भी कहा कि संविधान एक कानूनी-राजनीतिक दस्तावेज है. देश की सबसे बड़ी अदालत द्वारा इसकी व्याख्या करते वक्त जनभावना और लोकतांत्रिक प्रशासन का भी ख्याल रखना चाहिए।

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगवाई वाली बेंच के सामने चिदंबरम ने कहा कि 239 AA को GNCT एक्ट के साथ देखा जाना चाहिए। GMCT एक्ट के सेक्शन 44 के तहत उपराज्यपाल मंत्रिमंडल की सिफारिश और सलाह पर ही काम करेंगे।  अगर कोई मतभेद होगा तो उन्हें दिल्ली सरकार से स्पष्टीकरण मांगना होगा। इसके बाद भी वो संतुष्ट नहीं होते हैं तो वो राष्ट्रपति के पास भेजेंगे। उपराज्यपाल ना तो फाइल पर बैठे रह सकते हैं और ना ही  ऑटोमैटिक तरीके से राष्ट्रपति के पास फाइल भेज सकते हैं।

इससे पहले सुनवाई के दौरान CJI  दीपक मिश्रा ने कहा कि उपराज्यपाल दिल्ली सरकार के रोजाना के कामकाज में बाधा नहीं डाल सकते।   सरकार और उपराज्यपाल के बीच मतभेद पॉलिसी मैटर में ही हो सकते है, मगर ये मतभेद सिर्फ मतभेद के लिए नहीं हो सकते। उपराज्यापाल के पास निहित दखल देने की जिम्मेदारी भी अपने आप में संपूर्ण नहीं है। वो हर फैसले में ना नहीं कर सकते. वो सिर्फ इसे राष्ट्रपति के पास उनकी राय के लिए भेज सकते हैं। उन्होने कहा कि उपराज्यपाल के प्रशासनिक कार्य संविधान के दायरे में होने चाहिए। हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि पॉलिसी मैटर में मंत्रिमंडल की सलाह व सिफारिश उपराज्यपाल के लिए बाध्यकारी नहीं है। नीतिगत फैसले का अधिकार उपराज्यपाल के पास मौजूद हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने ये उस वक्त कहा जब दिल्ली सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील गोपाल सुब्रमण्यम ने कहा था कि नीतिगत फैसलों में भी मंत्रिमंडल की सलाह व सिफारिश उपराज्यपाल के लिए बाध्य्कारी हैं। हालांकि, इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अन्य राज्यों के लिए ये कहा जा सकता है लेकिन दिल्ली के लिए ऐसा नहीं है।

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