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पूजा स्थल, अस्पताल, शैक्षिक संस्थानों के 100 मीटर और बाजार एवं रेलवे स्टेशन के 150 मीटर के अंदर खोमचे वालों को अनुमति नहीं : बॉम्बे हाई कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

LiveLaw News Network
2 Nov 2017 12:06 PM GMT
पूजा स्थल, अस्पताल, शैक्षिक संस्थानों के 100 मीटर और बाजार एवं रेलवे स्टेशन के 150 मीटर के अंदर खोमचे वालों को अनुमति नहीं : बॉम्बे हाई कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
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महाराष्ट्र एकता हॉकर्स यूनियन बनाम एमसीजी मामले में 2004 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा है कि किसी भी पूजा स्थल, पवित्र स्थल, शिक्षा संस्थानों और अस्पतालों के 100 मीटर के भीतर किसी भी खोमचे वाले को अपना सामान बेचने की इजाजत नहीं होगी। इसी तरह कोर्ट ने यह भी कहा है कि किसी भी नगर निगम के बाजार या किसी अन्य बाजार या रेलवे स्टेशन के 150 मीटर के भीतर किसी खोमचे वाले वाले को दुकान लगाने की इजाजत नहीं होगी।

एलफिंस्टन में हुई भगदड़ में 23 लोगों के मारे जाने की घटना के बाद कोर्ट ने कहा कि पैदल पार पथ या ओवरब्रिज पर खोमचे वालों को दुकान लगाने की इजाजत नहीं दी जाएगी। न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति एमएस कार्निक की पीठ ने आज अपने 118 पृष्ठ के फैसले में उक्त आदेश दिए।

आवेदनकर्ता की पैरवी वरिष्ठ एडवोकेट बीए देसाई, गायत्री सिंह और एमएम वाशी ने की जबकि राज्य की ओर से महाधिवक्ता एए कुम्भकोनी और एमसीजीएम की ओर से वरिष्ठ एडवोकेट एवाई सखारे ने दलील पेश की।

मामले की पृष्ठभूमि

इस मामले में कई आवेदनों की एक साथ सुनवाई हुई और इन सभी आवेदनों में महाराष्ट्र के सभी नागरिक निकायों और नगर निगमों से फेरी वालों और खोमचे वालों को परेशान करने वाली कारर्वाई नहीं करने का अनुरोध किया गया था।

आवेदनकर्ताओं की ओर से पेश दलील में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने कई फैसलों में फेरीवालों के अधिकारों को जीवन के अधिकार से जोड़ा है जिसका स्रोत संविधान का अनुच्छेद 21 है। वरिष्ठ वकील बीए देसाई ने कहा कि स्ट्रीट वेंडर्स (प्रोटेक्शन ऑफ़ लाइवलीहुड एंड रेगुलेशन ऑफ़ स्ट्रीट वेंडिंग) अधिनियम, 2014 के लक्ष्यों एवं उसके उद्देश्यों को ध्यानपूर्वक पढ़ने से पता चलता है कि इस अधिनियम को इसलिए पास किया गया था क्योंकि यह स्वरोजगार के स्रोत के रूप में फेरीवालों के अधिकारों को स्वीकार करता है।

देसाई ने कहा कि गलियों में घूम-घूमकर सामान बेचने से दो उद्देश्य पूरे होते हैं, पहला यह भारी संख्या में लोगों को स्वरोजगार उपलब्ध कराता है और यह बड़ी संख्या में लोगों को अपनी सुविधा वाले स्थान पर सस्ते में सामान खरीदने का विकल्प देता है। उन्होंने कहा कि उक्त अधिनियम को नेशनल पालिसी ऑफ़ अर्बन स्ट्रीट वेंडर्स, 2009 को व्यावहारिक जामा पहनाया जा सके और अनुच्छेद 14, 19 (1) (g), 38 (2), 39 (a), 39 (b) और 41 के तहत आजीविका के पर्याप्त साधनों का अधिकार हासिल कर सके।

एमसीजीएम के वकील एवाई सखारे ने कहा कि एकता हॉकर्स मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार एमसीजीएम के आयुक्त की अध्यक्षता में टीवीसी का गठन किया गया था जिसमें  30 सदस्य थे। इनमें से 12 हॉकर्स/वेंडर्स के विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि थे, निगम, एमएमआरडी, पुलिस विभाग, रेलवे आदि के 11 और शेष रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन, एनजीओ, वकीलों, शहर योजनाकारों के प्रतिनिधि, खुदरा व्यापार कल्याण संघ और बैंकों के प्रतिनिधि थे।

इसके बाद हुई बैठक में यह कहा गया कि 241 दल बनाए जाएंगे जो कि स्ट्रीट वेंडरों के बारे में सर्वेक्षण करेंगे। सर्वेक्षण में पाया गया कि पंजीकरण के लिए कुल 1,28,443 आवेदन प्राप्त हुए जिनमें से 99,435 को पंजीकरण के योग्य पाया गया।

अंतिम फैसला

हाई कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट इस मुद्दे से जुड़े मामलों की सुनवाई 1983 से करता आ रहा है और उसका मत है कि इस अधिनियम का उद्देश्य किसी भी तरह की परेशानी के बिना अपने सामान बेचने के वेंडर्स के अधिकारों को स्वीकार करना है और घूम-घूमकर सामान बेचने की गतिविधि को विनियमित करना भी ताकि आम लोगों को कोई परेशानी न हो।

हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि बॉम्बे हॉकर्स यूनियन एवं अन्य बनाम बॉम्बे नगर निगम एवं अन्य के मामले में अपने पहले फैसले के समय से ही सुप्रीम कोर्ट हॉकिंग क्षेत्र और नॉन- हॉकिंग क्षेत्र की जैसी बातों पर जोर देता रहा है। इतना ही नहीं, 2009 में एकता मामले में अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि ऐसी जगह जहाँ फेरीवाले अपना सामान बेच सकते हैं 221 ही होंगे।

कोर्ट का साफ़ कहना था कि वेंडर्स के गलियों में अपना व्यवसाय करने के अधिकारों और पैदल चलनेवालों के अधिकारों के बीच संतुलन होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को अस्वीकार कर दिया था कि उक्त अधिनियम के बन जाने के बाद नॉन-हॉकिंग क्षेत्र का अस्तित्व ही समाप्त हो गया। कोर्ट ने इसके बाद एलफिंस्टन हादसे का जिक्र करते हुए कहा, “अभी हाल में हुई एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना का जिक्र करना यहाँ असंगत नहीं होगा जो कि इस शहर में एक संकरे फुट ओवर ब्रिज पर हुआ है। यात्रियों की भारी भीड़ के कारण पुल पर भगदड़ मच गई जिसके कारण 22 लोगों की मौत हो गई। फुट ओवर ब्रिज पर भारी संख्या में हॉकर्स की मौजूदगी ने इस हादसे में बड़ी भूमिका निभाई है, ऐसा कहा जाता है।”

इसे देखते हुए निम्नलिखित फैसले लिए गए –




  1. टीवीसी 2009 के सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुरूप राज्य के सभी स्ट्रीट वेंडर्स का सर्वे करेगा

  2. अधिनियम के अनुरूप वेंडिंग और नॉन-वेंडिंग क्षेत्र को जब तक अधिसूचित किया जाता है तब तक सामान बेचने की अनुमति उन्हीं सड़कों पर होगी जो 2009 के एकता मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अधीन ऐसे क्षेत्र में आते हैं।

  3. किसी भी पूजा स्थल, पवित्र स्थल, शिक्षा संस्थानों और अस्पतालों के 100 मीटर के भीतर किसी भी खोमचे वाले को अपना सामान बेचने की इजाजत नहीं होगी। इसी तरह कोर्ट ने यह भी कहा है कि किसी भी नगर निगम के बाजार या किसी अन्य बाजार या रेलवे स्टेशन के 150 मीटर के भीतर किसी खोमचे वाले वाले को दुकान लगाने की इजाजत नहीं होगी।


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