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प्रोपर्टी डीलर की हत्या मामले में केरल हाई कोर्ट ने एडवोकेट उदयभानु की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की [आर्डर पढ़े]

LiveLaw News Network
31 Oct 2017 10:09 AM GMT
प्रोपर्टी डीलर की हत्या मामले में केरल हाई कोर्ट ने एडवोकेट उदयभानु की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की [आर्डर पढ़े]
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केरल हाई कोर्ट ने एडवोकेट सीपी उदयभानु की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। उदयभानु पर एक प्रोपर्टी डीलर राजीव कुमार की हत्या का षड्यंत्र रचने का आरोप है। न्यायमूर्ति पी उबैद के इस केस की सुनवाई से अलग हो जाने के बाद न्यायमूर्ति हरिप्रसाद ने आज यह फैसला सुनाया।

उदयभानु को सनसनीखेज चंद्रबोस हत्याकांड में विशेष लोक अभियोजक नियुक्त किया गया था जिसमें मोहम्मद निशाम को सजा हुई थी। एक छात्र जिश्नु प्रणय की आत्महत्या मामले में नेहरू कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग के चेयरमैन डॉ। पीके कृष्णदास की जमानत याचिका का विरोध करने के लिए भी वह हाई कोर्ट में विशेष लोक अभियोजक के रूप में पेश हुए थे। हालांकि, उदयभानु चलाकुडी के प्रोपर्टी डीलर राजीव की हत्या का षड्यंत्र रचने के आरोपों में फंस गए। हत्या होने से पहले राजीव ने हाई कोर्ट में अर्जी दायर कर यह कहते हुए पुलिस सुरक्षा की मांग की थी कि एडवोकेट सीपी उदयभानु के गुंडों से उनकी जान को ख़तरा है क्योंकि एक संपती का सौदा नहीं हो पाया। हाई कोर्ट ने उस समय यह याचिका खारिज कर दी थी और शिकायत होने पर पुलिस को राजीव की सुरक्षा का निर्देश दिया था। 30 सितम्बर को राजीव की लाश एक पुरानी बिल्डिंग से मिली।

पुलिस ने उदयभानु को इस मामले में सातवें अभियुक्त के रूप में नामजद किया। इसके बाद यह खबर आई कि उन्हें जिश्नु प्रणय के मामले में विशेष लोक अभियोजक के पद से हटाया जा सकता है। उनकी जमानत अर्जी पर पहले न्यायमूर्ति पी उबैद ने सुनवाई की और उन्होंने पुलिस को उनके खिलाफ कारर्वाई करने से रोकने का आदेश दिया। इसके बाद जांच एजेंसी ने शिकायत की कि हाई कोर्ट के अंतरिम स्थगनादेश के कारण वे इस मामले की जांच नहीं कर पा रहे हैं और इस आदेश में संशोधन की मांग की। मृतक के परिजनों ने भी जमानत याचिका का विरोध किया। अगली सुनवाई के में आश्चर्यजनक ढंग से न्यायमूर्ति पी उबैद ने खुद को इस केस से अलग कर लिया और फिर यह मामला न्यायमूर्ति हरिप्रसाद की अदालत में आया। मामले की विस्तृत सुनवाई के बाद कोर्ट ने गत वृहस्पतिवार को आदेश सुरक्षित रखा और आज सुबह फैसला सुनाया जिसमें अग्रिम जमानत की उनकी अर्जी खारिज कर दी गई।


 
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