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इंडियन नर्सिंग काउंसिल राज्यों के नर्सिंग प्रशिक्षण संस्थान को मान्यता नहीं दे सकता : बॉम्बे हाई कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

LiveLaw News Network
27 Oct 2017 3:00 PM GMT
इंडियन नर्सिंग काउंसिल राज्यों के नर्सिंग प्रशिक्षण संस्थान को  मान्यता नहीं दे सकता : बॉम्बे हाई कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
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एक महत्वपूर्ण फैसले में बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने कहा है कि इंडियन नर्सिंग काउंसिल राज्यों में चलने वाले नर्सिंग ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट को मान्यता देने के लिए अधिकृत नहीं है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे संस्थान द्वारा दी गई मान्यता को राज्य नर्सिंग काउंसिल का अनुमोदन होना चाहिए और यह राज्य के लिए ही मान्य होगा।

यानी जिन उम्मीदवारों ने ऐसे संस्थानों से मान्यता ली है और उसे राज्य काउंसिल का अनुमोदन मिला है वह राज्य में प्रैक्टिस करने के लिए अधिकृत हैं। न्यायमूर्ति आरएम बोर्डे और न्यायमूर्ति विभा कंकांवडी ने इस मामले में एक याचिका पर सुनवाई की जिसमें याचिकाकर्ता प्राइवेट नर्सिंग स्कूल और कॉलेज मैनेजमेंट असोसिएशन थी। इसके तहत करीब 400 स्कूल और कॉलेज हैं जो नर्सिंग ट्रेनिंग देते हैं। याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि इंडियन नर्सिंग काउंसिल को यह अधिकार नहीं है कि वह नर्सिंग कोर्स को मान्यता दे। इसके तहत औक्सिलरी नर्स एंड मि़डवाइफ (एएनएम), जनरल नर्सिंग और मिडवाइफरी (जीएनएम), बैचलर ऑफ नर्सिंग (बीएससी), पोस्ट बेसिक बैचलर ऑफ नर्सिंग (पीबीबीएससी) और मास्टर ऑफ नर्सिंग (एमएससी) कोर्स होता है। याचिकाकर्ता ने कहा कि नेशनल नर्सिंग काउंसिल को इस बात के लिए रोका जाना चाहिए कि वह वेबसाइट पर इस बात का संकेत न दे कि नर्सिंग इंस्टिट्यूशन को उनके मान्यता की अनिवार्यता है।

याचिकाकर्ता ने कहा कि नेशनल नर्सिंग काउंसिल का काम सिर्फ यह देखना है कि शिक्षा का स्तर क्या है। उसे सिलेबस और अन्य नियम देखना है। साथ ही कोर्स के लिए आधारभूत सुविधाएँ आदि कैसी हैं यह उसको देखना है। इंडियन नर्सिग काउंसिल एक्ट, 1947 का इंडियन नर्सिंग काउंसिल उल्लंघन कर रही है क्योंकि यह अधिकार राज्य की नर्सिंग काउंसिल के पास है और राज्य कानून के तहत स्टेट नर्सिंग काउंसिल के पास है। वहीं इंडियन नर्सिंग काउंसिल का कहना था कि राज्य को इस मामले में अधिकार नहीं है।

यह भी दलील दी गई कि पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट ने शिव शक्ति एजुकेशन सोसायटी बनाम स्टेट ऑफ पंजाब के केस में कहा था कि अधिकार केंदीय विधायी प्राधिकरण जैसे इंडियन नर्सिंग काउंसिल के पास है। तब याचिकाकर्ता ने दलील दी कि महाराष्ट्र नर्सिंग एक्ट 1966 के तहत मान्यता देने के लिए विशेष प्रावधान है और केंद्रीय नियम में ऐसा नहीं है। तमाम फैसलों को देखने के बाद कोर्ट ने कहा कि केरल हाई कोर्ट ने के. वेलायुधन मेमोरियन ट्रस्ट बनाम स्टेट ऑफ केरल और कर्नाटक हाई कोर्ट ने भारत सरकार बनाम केएमजे कॉलेज ऑफ नर्सिंग ट्रस्ट बेंगलूर व अन्य के केस में इस मुद्दे को देखा था और इंडियन नर्सिंग काउंसिल एक्ट और संबंधित राज्य नियम की सही व्याख्या की थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसले को बहाल रखा था जिसमें कहा गया था कि इंडियन नर्सिंग काउंसिल कोई अथॉरिटी नहीं है जो नर्सिंग एजुकेशन के मामले में संस्थान को मान्यता प्रदान करे। कोर्ट ने याचिकाकर्ता की अर्जी को स्वीकार करते हुए कहा कि इंडियन नर्सिंग काउंसिल को नर्सिंग संस्थान को मान्यता देने का अधिकार नहीं है।

कोर्ट ने इंडियन नर्सिंग काउंसिल को आदेश दिया है कि वह ऐसा कोई मैटेरियल न डाले जिसमें कहा गया हो कि उससे मान्यता जरूरी है। साथ ही कोर्ट ने कहा कि महाराष्ट्र राज्य के लिए राज्य काउंसिल और स्वास्थ्य विश्वविद्यालय अपने वेबसाइट पर डालें कि जो भी डिग्री और डिप्लोमा राज्य में नर्सिंग ट्रेनिंग के लिए दिया जाएगा वह राज्य में ही मान्य होगा।


 
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