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पेड न्यूज मामले में मध्य प्रदेश के मंत्री नरोत्तम मिश्रा की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

LiveLaw News Network
26 Oct 2017 2:20 PM GMT
पेड न्यूज मामले में मध्य प्रदेश के मंत्री नरोत्तम मिश्रा की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा
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पेड न्यूज मामले में अयोग्य घोषित मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री नरोत्तम मिश्रा की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। गुरुवार को हाईकोर्ट में सारे पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा है। अब हाईकोर्ट तय करेगा कि नरोत्तम मिश्रा की अयोग्यता बरकरार रहेगी या नहीं।

नरोत्तम मिश्रा ने दिल्ली हाईकोर्ट में दलील दी है कि अखबारों की खबरें पेड न्यूज नही थी। वहीं याचिकाकर्ता की दलील है कि ये पेड न्यूज ही थीं। मामले की सुनवाई के दौरान नरोत्तम मिश्रा को तरफ से कहा गया है कि चुनाव आयोग द्वारा गठित कमिटी के सामने समाचार पत्रों की तरफ से कहा गया था कि ये पेड न्यूज नही है।नरोत्तम मिश्रा की तरफ से दलील दी गई कि चुनाव आयोग द्वारा गठित पेड न्यूज कमेटी जिसके रिपोर्ट के आधार पर मुझे दोषी ठहराते हुए तीन साल के लिए अयोग्य करार दिया गया है, उस कमेटी ने बिना उनका पक्ष सुने फैसला सुना दिया था जबकि नियम ये कहता है कि कमेटी कोई भी फैसला सुनाने से पहले उनके पक्ष को भी सुने।

नरोत्तम मिश्रा ने ये भी कहा कि उनके ख़िलाफ़ पेड न्यूज के मामले में जो भी रिकॉर्ड है उसमें कोई सबूत नही है। ऐसे में चुनाव आयोग के फ़ैसले को रद्द किया जाए। नरोत्तम मिश्रा के तरफ से आज बहस पूरी हो गई अब 21 सितंबर को चुनाव आयोग अपना पक्ष रहेगा।

गौरतलब है कि सात सितंबर को  नरोत्तम मिश्रा ने दिल्ली हाईकोर्ट में कहा था कि चुनाव आयोग द्वारा गठित पेड न्यूज कमेटी ने  दोषी ठहराते हुए उनका पक्ष नहीं सुना जो प्राकृतिक न्याय के खिलाफ है। उन्होंने कहा था कि कमेटी ने उन्हें तीन साल के लिए अयोग्य करार दिया है जबकि नियम ये कहता है कि कमेटी कोई भी फैसला सुनाने से पहले दूसरे पक्ष को भी सुने।

जस्टिस रविंद्र भट्ट और जस्टिस सुनील गौड की बेंच के सामने सुनवाई के दौरान नरोत्तम मिश्रा की ओर से पेश सीए सुंदरम ने कहा था कि उनके ख़िलाफ़ पेड न्यूज के मामले में जो भी रिकार्ड है उसमें कोई सबूत नही है। ऐसे में चुनाव आयोग के फ़ैसले को रद्द किया जाना चाहिए।

दरअसल चुनाव आयोग ने पेड न्यूज का दोषी पाते हुए नरोत्तम मिश्रा को 23 जून 2017 को तीन साल के लिए अयोग्य करार दिया था। आयोग ने पाया था कि वर्ष 2008 में मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव में मीडिया में लेख तथा विज्ञापन वाली खबरे छपवाई गई, जोकि नियमों के खिलाफ है।

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