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यादव सिंह को PMLA केस में सुप्रीम कोर्ट से जमानत, लेकिन नहीं आ पाएंगे जेल से बाहर

LiveLaw News Network
26 Oct 2017 4:28 AM GMT
यादव सिंह को PMLA केस में सुप्रीम कोर्ट से जमानत, लेकिन नहीं आ पाएंगे जेल से बाहर
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नोएडा अथॉरिटी के हजारों करोड़ रुपये के घोटाले मामले में प्रिवेंशन ऑफ मनी लांडरिंग एक्ट यानी PMLA के आरोपी पूर्व चीफ इंजीनिय यादव सिंह को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है। हालांकि सीबीआई का एक और केस होने की वजह से यादव सिंह जेल में ही रहेंगे।

बुधवार को जस्टिस एस ए बोबडे की बेंच ने जमानत देते हुए कहा कि यादव सिंह अपना पासपोर्ट जमा करेंगे और गवाहों व सबूतों से छेडछाड नहीं करेंगे। इस दौरान ED ने जमानत दिए जाने का विरोध किया लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 60 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल ना करने पर यादव सिंह को जमानत दे दी।

 अगस्त में यादव सिंह की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय को नोटिस जारी कर दो हफ़्ते में जवाब मांगा था।

सुनवाई के दौरान जस्टिस एस ए बोबडे और जस्टिस एल नागेश्वर राव की बेंच के सामने यादव सिंह की ओर से वरिष्ठ वकील राजू रामचंद्रन ने कहा था कि इस मामले में 60 दिनों में प्रवर्तन निदेशालय ने आरोप पत्र दाखिल नही किया जिससे कि वो वैधानिक तौर पर जमानत पाने के हकदार हैं। उन्होंने बताया कि  29 अप्रैल 2017  को 60 दिन पूरे होने पर 30 अप्रैल को रविवार था। 1 मई को यादव सिंह ने लखनऊ की विशेष अदालत में जमानत याचिका दाखिल कर दी। लेकिन प्रवर्तन निदेशालय ने 2 मई को कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया। यादव सिंह की ओर से कहा गया कि कानूनन 60 दिनों के भीतर आरोप पत्र दाखिल न होने पर जमानत मिल जाती है लेकिन इस केस में निचली अदालत के बाद हाई कोर्ट ने भी उन्हें जमानत नही दी। यादव सिंह ने इस केस में संजय दत्त, राकेश कौल के अलावा सुप्रीम कोर्ट के अन्य केसों का उदाहरण दिया है।

इससे पहले चार जुलाई 2017 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने जमानत याचिका खारिज कर दी थी। लखनऊ जेल में बंद यादव सिंह ने प्रवर्तन निदेशालय के मामले में जमानत याचिका दायर की थी, जो खारिज कर दी गई।

गौरतलब है कि यादव सिंह सहित उनके नोएडा अथॉरिटी के नौ साथी बहुचर्चित टेंडर घोटाले में डासना जेल में बंद हैं। यादव सिंह पर आरोप है कि उसने नोएडा प्राधिकरण में चीफ इंजीनियर रहते हुए कई सौ करोड़ रुपये घूस लेकर ठेकेदारों को टेंडर बांटे।  यही नहीं नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस अथॉरिटी में इंजीनियर रहते हुए यादव सिंह की सभी तरह के टेंडर और पैसों के आवंटन में बड़ी भूमिका होती थी। इस मामले में सीबीआई द्वारा दर्ज FIR के आधार पर ED ने भी PMLA के तहत जांच शुरु की थी।

सीबीआई ने भी यादव सिंह के खिलाफ आईपीसी की धारा 409, 420, 466, 467, 469, 481 के अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया है। यादव सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार, आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा और कानून के उल्लंघन के संबंध में केस दर्ज किया गया है।

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