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तमिलनाडु में बिना इजाजत के दीवारों पर बैनर, फोटो, चित्र आदि लगाने पर मद्रास हाई कोर्ट की रोक [आर्डर पढ़े]

LiveLaw News Network
25 Oct 2017 11:38 AM GMT
तमिलनाडु में बिना इजाजत के दीवारों पर बैनर, फोटो,  चित्र आदि लगाने पर मद्रास हाई कोर्ट की रोक [आर्डर पढ़े]
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मद्रास हाई कोर्ट ने कहा है कि तामिलनाडु में वातावरण को साफ़ रखने के लिए वहाँ की दीवारों पर होर्डिंग्स, बैनर्स, साइन  बोर्ड, झंडे और  चित्र आदि बिना इजाजत के नहीं लगना चाहिए। किसी भी जिवित व्यक्ति या फिर प्रायोजक का फोटोग्राफ नहीं लगना चाहिए।

न्यायमूर्ति एस वैद्यनाथन ने राज्य के मुख्य सचिव को आदेश दिया है कि वह इसके लिए तमाम शहरों और पंचायतों में सर्कुलर जारी करें और इस प्रतिबंध को लागू कराएं।

कोर्ट ने कहा कि पूरे तामिलनाडु में वातावरण को स्वच्छ बनाने के लिए बिना मतलब के दीवारों पर चित्र आदि लगाने से मना किया जाए। मुख्य सचिव को कोर्ट ने कहा है कि वह यह सुनिश्चित करें कि राज्य में वातावरण साफ रहे। अदालत ने कहा कि अगर संबंधित अथॉरिटी से बैनर, पोस्टर, साइन बोर्ड आदि के लिए इजाजत मिली हुई है तो संबंधित अथॉरिटी यह सुनिश्चित करे कि किसी जीवित व्यक्ति की तस्वीर को बैनर, बोर्ड या फिर फ्लैक्स आदि के माध्यम से नहीं दर्शाया जाए।

इस मामले में याचिकाकर्ता बी तिरुलोचन कुमार ने अर्जी दाखिल कर चेन्नई के निगम आयुक्त को निर्देश देने की मांग की थी कि बैनर व बोर्ड हटाए जाएं। अर्जी में कहा था कि नवलर स्ट्रीट, अरुमबक्कम में माथी नामक शख्स का बैनर लगा हुआ है। इसे हटाने के लिए भी कोर्ट से गुहार लगाई गई। कोर्ट ने कहा कि अगर किसी का भी बैनर याचिकाकर्ता की प्रॉपर्टी के सामने लगा हुआ है तो उसे तुरंत हटाया जाए। अगर कोई इस पर ऐतराज करता है तो उसका नाम और पता पुलिस को दिया जाए ताकि पुलिस केस दर्ज कर सके। जब याचिकाकर्ता के आवेदन पर जब निगम ने ध्यान नहीं दिया तब वह कोर्ट की शरण में जाने को मजबूर हुआ। अप्रैल 2017 में यह साइन बोर्ड लगाया गया था। 13 अप्रैल 2017 को याचिकाकर्ता ने निगम आयुक्त को रिप्रजेंटेशन दिया था। पुलिस ने भी इस पर कोई कार्रवाई नहीं की। जब उन्होंने इसके खिलाफ आवाज उठाई तो उन्हें धमाकाया गया और कहा गया कि उन्हें एससी और एसटी अधिनियम के तहत फंसा दिया जाएगा। माथी ने इस मामले में लगाए गए तमाम आरोपों को गलत बताया और कहा कि इस बारे में कोई धमकी नहीं दी गई थी।

निगम ने कोर्ट से कहा कि बैनर हटा दिया गया है लेकिन याचिकाकर्ता ने कहा कि इसे दोबारा लगा दिया गया। तब अदालत ने आदेश पारित कर कहा है कि राज्य में स्वच्छ वातावरण बहाल करने के लिए बिना मतलब के दीवारों और रिहायशी इलाकों में बैनर, पोस्टर, झंडे आदि न लगाए जाएं। मुख्य सचिव को यह सुनिश्चित करने को कहा है कि वह इस तरह के बैनर, पोस्टर और होर्डिंग को रोकें। नगर निगम से भी कोर्ट ने कहा कि वह भी सुनिश्चित करे कि तमिलनाडु ओपन प्लेसेज (प्रिवेंशन ऑफ डिसफिगरिंग) एक्ट, 1959 का पालन होना चाहिए।

कोर्ट ने कहा कि अगर बैनर और पोस्टर लगाने की इजाजत उचित अथॉरिटी से मिली हुई है तो संबंधित अथॉरिटी यह सुनिश्चित कर कि किसी जीवित व्यक्ति की तस्वीर उसमें न हो। मुख्य सचित को निर्देश दिया गया है कि वह तमाम शहरों और पंचायतों, नगर निगमों आदि को सर्कुलर जारी करें ताकि आदेश का पालन सुनिश्चित हो।


 
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