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हदिया केस में गरमागरम बहस के बाद सुनवाई टली, चीफ जस्टिस ने फिर कहा, पिता के पास नहीं रह सकती हदिया

LiveLaw News Network
9 Oct 2017 2:45 PM GMT
हदिया केस में गरमागरम बहस के बाद सुनवाई टली, चीफ जस्टिस ने फिर कहा, पिता के पास नहीं रह सकती हदिया
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सुप्रीम कोर्ट में हदिया केस की सुनवाई के वक्त माहौल उस वक्त गरमा गया जब हदिया के पति के वकील ने सुनवाई के दौरान बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह का नाम लिया। हदिया के पति शफ़ीन के वक़ील दुष्यंत दवे ने आरोप लगाया कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने हाल में हो केरल में रैली की है वो इस मुद्दे को उठा रहे है।

वक़ील दुष्यंत दवे ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी केरल जिहाद का मामला उठाया था।

लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने राजनीति बीच में आते ही मामले की सुनवाई से इंकार कर दिया और सुनवाई की अगली तारीख 30 अक्टूबर तय की है। हालांकि कोर्ट ने फिर कहा कि पिता को हदिया की कस्टडी नहीं दी जा सकती।

दुष्यंत दवे की टिप्पणियों पर सुप्रीम  कोर्ट में चीफ जस्टिस जस्टिस दीपक मिश्रा ने हदिया के पति शफ़ीन के वक़ील दुष्यंत दवे को कहा कि वो अपना केस खुद खराब कर रहे है। कोर्ट ने कहा कि इस बात की इजाजत नही दे सकते क्योंकि उनका इस मामले से कोई संबंध नही है।

कोर्ट ने साफ किया कि ये मामला पूरी तरह कानूनी है और कानून ये है कि दो बालिग मर्जी से शादी करते हैं तो कोर्ट दखल नहीं दे सकता।

जस्टिस मिश्रा ने इशारा किया कि वो हदिया को जल्द ही कोर्ट में बुला सकते हैं। कोर्ट को बस ये तय करना है कि क्या हाई कोर्ट का शादी रद्द करने का फैसला सही था या नही।

वहीं दुष्यंत दवे का कहना था कि केरल के मुद्दे पर राजनीति की जा रही है और वहां पहले से ही ट्रेंड रहा है।

इससे पहले ऐसे मामले में तीन अर्जियां सुप्रीम कोर्ट में दाखिल कर इस पूरे मामले की NIA से  जांच कराने की मांग की है। अर्जी में मांग की गई है कि उनको भी इस मामले में पक्ष बनाया जाए। एक अर्जी बिंदू संपत की तरफ से दाखिल की गई है, बिंदू संपत की बेटी निमिषा ने इस्लाम धर्म स्वीकार कर मुस्लिम युवक से शादी की थी और 2016 से वो गायब है। याचिका में कहा गया है कि वो आतंकवादी संगठन ISIS में शामिल होने गई है।

दूसरी अर्जी महाराष्ट्र की रहने वाली सुमिता आर्या ने दाखिल की है जिन्होंने आरोप गया है कि उनके पिता और पति द्वारा ज़बरन धर्मांतरण करा कर इस्लाम धर्म स्वीकार करने पर मजबूर किया।

तीसरी याचिका तीन वकीलों ने दायर की है  परिवर्तन का मामला अकेला नही है ऐसे कई मामले हैं जहाँ धर्म परिवर्तन किया गया है। ऐसे में मामले की NIA से जांच कराई जाए।

इधर केरल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा है कि पुलिस की SIT मामले की जांच करने में सक्षम है और उसने गंभीरता से मामले की छानबीन की थी। केरल सरकार ने ये भी कहा है कि अखिला उर्फ हदिया केस में पुलिस की जांच में ऐसा कोई तथ्य सामने नहीं आया जिसके चलते NIA एक्ट के तहत केंद्र सरकार को इसकी सूचना दी जाए।

हलफनामे में ये भी कहा है कि पुलिस टीम ने इस केस में हदिया को तालीम देने वाले ट्रस्ट के अलावा इस केस से जुडे सभी लोगों की छानबीन की है। उस वेबसाइट पर भी जांच की है जिसके माध्यम से निकाह हुआ। यहां तक कि उसके पति शफीन जहां के पिछले रिकार्ड और पृष्ठभूमि की जांच भी की गई है। ये तमाम ब्यौरा हलफनामे में सुप्रीम कोर्ट को दिया गया है और कहा गया है कि जांच में अगर ऐसा कुछ पाया जाता कि इसके पीछे कोई बडी साजिश है तो इसकी सूचना केंद्र सरकार को दी जाती।

हालांकि इससे पहले केरल सरकार ने NIA जांच का विरोध नहीं किया था।

इससे पहले सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा था कि 24 साल की लडकी जो बालिग है, को उसकी इच्छा के बिना पिता द्वारा बंधक बनाकर रखा नहीं जा सकता। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की बेंच ने ये भी कहा था कि वो ये देखेंगे कि क्या अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट शादी को रद्द कर सकता है?

बेंच ने ये भी कहा था कि वो लडकी की कस्टडी के लिए पिता की जगह किसी दूसरे को नियुक्त कर सकती है।

हदिया के पति शफीन जहां की ओर से पेश वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने सुनवाई के दौरान कहा था कि कोर्ट ने अपने अधिकारक्षेत्र से बाहर जाकर इस मामले में NIA जांच के आदेश दिए हैं। इस मामले में राज्य या लडकी के पिता ने नहीं बल्कि उन्होंने अपील दाखिल की थी। दवे ने कहा  था कि कोर्ट के इन आदेशों से दुनियाभर में गलत संदेश गया है और ये बहुउद्देशीय धार्मिक समाज की नींव पर अटक गया है। दवे ने यहां तक कह दिया कि बीजपी के दो मुस्लिम नेताओं ने हिंद से शादी की है तो क्या इसे भी लव जिहाद का नाम दिया जाएगा और जांच कराई जाएगी ?

लेकिन बेंच ने कहा कि वो सिर्फ कानून पर बहस करें तो वहीं ASG तुषार मेहता ने कहा कि NIA जांच ये जानने के लिए जरूरी है कि क्या ये अलग मामला है या ये एक पैटर्न है। मेहता ने कहा कि शफीन की ओर से पहले पेश कपिल सिब्बल ने भी NIA जांच का विरोध नहीं किया था और ये आदेश सहमति से दिया गया था।

खासतौर पर एक सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा हदिया का वीडियो जिसमें हदिया ने साफ किया है कि उसे जबरन बंधक बनाया गया है और उसने शैफीन से अपनी मर्जी से शादी की है, बेंच वकील पीवी दिनेश द्वारा केरल महिला आयोग की याचिका पर सुनवाई को तैयार हो गई है जिसमें लडकी से मिलने और उससे बातचीत की रिपोर्ट सीलबंद कवर में कोर्ट में दाखिल करने की  मांग की गई है। कोर्ट शफीन की NIA जांच के आदेश को वापस लेने की याचिका पर भी सुनवाई करेगा।

गौरतलब है कि 16 सितंबर को  हदिया के पति शफ़ीन जहां ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर कोर्ट के उस आदेश को वापस लेने की मांग की है जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जांच नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी यानी NIA से कराने का आदेश दिया था।  याचिका में पति ने आरोप लगाया है कि लड़की के परिवार वाले लड़की को प्रताडित  कर रहे हैं।

याचिका में कहा गया है कि लड़की अखिला अशोकन वीडियो में कह रही है कि वो मुस्लिम की तरह रहना चाहती है। याचिका में मांग की गई है कि सुप्रीम कोर्ट लड़की के पिता को आदेश दे कि वो लड़की को कोर्ट में पेश करे।

इसी साल 16 अगस्त को केरल के हदिया केस की जांच सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल इंवेस्टीगेशन एजेंसी (NIA ) को सौंप दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने रिटायर्ड जस्टिस आर वी रविंद्रन जांच की निगरानी सौंपी थी लेकिन बाद में उन्होंने इंकार कर दिया। NIA को ये जांच करनी है कि इस घटना के पीछे चरमपंथियों का हाथ है या नहीं।

सुनवाई के दौरान NIA ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि ये केस अकेला केस नहीं लगता और इसका प्रतिबंधित संगठन सिमी से संबंध हो सकते हैं।  NIA की ओर से पेश ASG मनिंदर सिंह ने CJI खेहर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड की बेंच के सामने कहा था कि ये अकेला ऐसा मामला नहीं है और ये एक पैटर्न है। वहीं केरल पुलिस ने कहा कि जांच अभी पूरी नहीं हुई है। हालांकि केरल पुलिस ने NIA जांच का विरोध नहीं किया था

वहीं याचिकाकर्ता शफीन जहान  की ओर से इसका विरोध किया गया था और कहा गया कि कोर्ट को इस मामले की सुनवाई करनी चाहिए।

लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पहले NIA की जांच में कुछ जानकारी मिले तो फिर आगे सुनवाई करेंगे।

दस अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने केरल पुलिस को हदिया केस से जुडे दस्तावेज और जानकारी नेशनल इंवेस्टीगेशन एजेंसी (NIA ) से साझा करने के निर्देश दिए थे ताकि एजेंसी ये छानबीन कर सके कि हदिया केस एक अलग केस है या ये इसके पीछे कोई बडी साजिश है।

अपनी अर्जी में एजेंसी की ओर से कहा गया कि केरल हाईकोर्ट ने इस मामले की जांच केरल पुलिस को सौंपी थी। हाईकोर्ट ने NIA को जांच के लिए नहीं कहा था। याचिका के मुताबिक केरल पुलिस ने इस संबंध में अपराध संख्या 21/2016 में 57 केरल पुलिस एक्ट के अलावा IPC की धारा 153 A, 295A और 107 के तहत मामला दर्ज किया है और जांच संबंधी कई स्टेटस रिपोर्ट हाईकोर्ट में दाखिल की हैं। NIA इस मामले की जांच कानून के मुताबिक कर सकता है लेकिन इसके लिए कोर्ट के आदेश जारी करने होंगे। वैसे भी NIA हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के आदेश से केसों की जांच करता है।

ये मामला हदिया के हिंदू से मुस्लिम धर्म में परिवर्तन कर मुस्लिम युवक से निकाह का मामला है। इसी साल 25 मई को केरल हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इस निकाह को शून्य करार दे दिया था और युवती को उसके हिंदू अभिभावकों की अभिरक्षा में देने का आदेश दिया था। इस दौरा जस्टिस सुरेंद्र मोहन और जस्टिस अब्राहम मैथ्यू ने विवादित टिप्पणी करते हुए कहा था कि 24 साल की युवती कमजोर और जल्द चपेट में आने वाली होती है और उसका कई तरीके से शोषण किया जा सकता है। चूंकि शादी उसके जीवन का सबसे अहम फैसला होता है इसलिए वो सिर्फ अभिभावकों की सक्रिय संलिप्ता से ही लिया जा सकता है।

वहीं हदिया के पति ने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी और कहा कि हाईकोर्ट ने बिना किसी कानूनी आधार के निकाह को शून्य करार दिया है। याचिका में कहा गया है कि ये फैसला आजाद देश की महिलाओं का असम्मान करता है क्योंकि इसने महिलाओं को अपने बारे में सोचविचार करने के अधिकार का छीन लिया है और उन्हें कमजोर व खुद के बारे में सोचविचार करने में असमर्थ घोषित कर दिया है। ये आदेश महिलाओं के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है और इसे रद्द किया जाना चाहिए।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने केरल सरकार और NIA को इस मामले से जुडे दस्तावेज दाखिल करने को कहा था और हदिया के पिता अशोकन से ये सबूत देने को कहा था कि कट्टरता फैलाने के बाद उसका धर्म परिवर्तन किया गया था।

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