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जस्टिस पटेल के इस्तीफे का असर, कर्नाटक बार काउंसिल ने चार अक्तूबर को काम ना करने का प्रस्ताव पास किया [प्रस्ताव पढ़े]

LiveLaw News Network
28 Sep 2017 7:41 AM GMT
जस्टिस पटेल के इस्तीफे का असर, कर्नाटक बार काउंसिल ने चार अक्तूबर को काम ना करने का प्रस्ताव पास किया [प्रस्ताव पढ़े]
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कर्नाटक हाईकोर्ट के दूसरे सबसे वरिष्ठ जज जस्टिस जयंत पटेल के इस्तीफे से हैरान कर्नाटक बार काउंसिल ने बुधवार को प्रस्ताव पास किया है कि इसके विरोध में चार अक्तूबर को काम नहीं किया जाएगा। बार काउंसिल ने कॉलिजियम सिस्टम में जजों की नियुक्ति के लिए पारदर्शिता की कमी बताते हुए इसी निंदा की है।

बार काउंसिल ने सभी सदस्यों की मांगों पर विचार करने और एक स्वर में  कर्नाटक हाईकोर्ट के वरिष्ठतम जज जस्टिस पटेल के सुप्रीम कोर्ट में जज बनाने या हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस ना बनाने से इस्तीफा देने पर कानून जगत की हस्तियों द्वारा नाखुशी जाहिर करने पर आपातकालीन बैठक बुलाई थी। जस्टिस पटेल के इस्तीफे पर बार काउंसिल की ओर से कहा गया कि केंद्र सरकार द्वारा कर्नाटक हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति ना करने से वो निराश और परेशान है क्योंकि हाईकोर्ट में जजों की तय संख्या 62 है और अब वहां 25 जज ही बचे हैं। जस्टिस पटेल ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में तबादले से इंकार करते हुए इस्तीफा दे दिया। परंपरा के मुताबिक 9 अक्तूबर को कर्नाटक हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस शुभ्रो कमल मुखर्जी के रिटायर होने के बाद जस्टिस पटेल को चीफ जस्टिस बनाया जाना चाहिए था क्योंकि वो सबसे वरिष्ठ हैं और गुजरात हाईकोर्ट से हैं।

बार काउंसिल ने अध्यक्ष वाई एस सदाशिव रेड्डी  की अगवाई में कॉलिजियम सिस्टम में फिर से भरोसा लाने की बात करते हुए प्रस्ताव पास किया है और  सभी सदस्यों से आग्रह किया है कि इसके विरोध में वो राज्यभर में अदालतों में चार अक्तूबर को काम ना करें व न्यायपालिका की स्वतंत्रता को प्रदर्शित करें। काउंसिल ने कर्नाटक हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति ना होने और बडी संख्या में जजों कि रिक्तियां होने से न्यायिक कार्यों पर असर पर चिंता जताई है।

मीडिया रिपोर्ट के हवाले से कि जस्टिस पटेल के कार्यपालिका के खिलाफ और अपने राज्य गुजरात के शक्तिशाली राजनीतिज्ञों का विरोध करने पर बिना स्पष्टीकरण के नजरअंदाज करने पर बार ने कहा है कि इससे पूरा कानून जगत बहुत दुखी, परेशान और चिंतित है। ऐसे में कॉलिजियम सिस्टम पर फिर से भरोसा करने के लिए कदम उठाने की जरूरत है।

NJAC फैसले की भावना बनी रहे

बार ने कहा है कि जिस तरह कर्नाटक हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के रिटायर होने से पहले जस्टिस पटेल का तबादला किया गया, उससे साफ है कि न्यायपालिका में जजों की नियुक्तियों में पारदर्शिता को लेकर NJAC के फैसले को कार्यपालिका व न्यायपालिका में फैसले लेने वालों ने नजरअंदाज किया है।

दरअसल 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने दशको पुराने सुप्रीम कोर्ट कॉलिजियम सिस्टम को हटाकर नेशनल ज्यूडिशियल अपाइंटमेंट कमिशन ( NJAC) को रद्द कर दिया था जिसमें जजों की नियुक्ति में कार्यपालिका को ज्यादा अधिकार दिए गए थे।

बार ने कहा है कि अब न्यायिक डिलीवरी सिस्टम के हित में कॉलिजियम सिस्टम में दोबारा से वही भरोसा पैदा करने की जरूरत है।  खासतौर पर न्यायपालिका की स्वतंत्रता को सुनिश्चित करते हुए जोकि हाल ही में हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति, तबादलों और तैनाती की घटनाओं में नहीं दिखाई देती।


 
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