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दिल्ली हाई कोर्ट ने इंडिया को़ड पोर्टल के लिए निर्देश जारी किए [आर्डर पढ़े]

LiveLaw News Network
26 Sep 2017 6:46 AM GMT
दिल्ली हाई कोर्ट ने इंडिया को़ड पोर्टल के लिए निर्देश जारी किए [आर्डर पढ़े]
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दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में कानून और न्याय मंत्रालय को निर्देश जारी कर कहा है कि इंडिया कोड बेवसाइट में और सामग्री जोड़ें, वेबसाइट का विकास किया जा रहा है।

मिनिस्ट्री ऑफ लॉ और नैशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर के अधिकारी ने जस्टिस मनमोहन के सामने न्यू इंडिया कोड वेबसाइट के बारे में प्रजेंटेशन दिया था। हाई कोर्ट उस याचिका पर सुनवाई कर रही है जिसमें इंडियन लॉ के ऑनलाइन पहुंच के बारे में बहस चल रही है।

हाई कोर्ट ने प्रजेंटेशन देखने और दोनों पक्षकारों को सुनने के बाद कहा कि नए पोर्टल में निम्नलिखित तत्व जोड़ने की जरूरत है। जस्टिस मनमोहन ने निम्नलिखित निर्देश जारी किए हैं।




  1. ऑल सेंट्रल एक्ट और सब ऑर्डिनेट कानून जो केंद्र सरकार द्वारा पास किया गया वह पोर्टल पर उपलब्ध होना चाहिए। इसमें रूल्स, रेग्युलेशन और नोटिफिकेशन व सर्कुलरभी शामिल होना चाहिए।

  2. जो भी डाटा इस पर डाटा जाए और अगर वह पीडीएफ फोर्मेट में हो तो वह पढ़ने योग्य होना चाहिए।

  3. पोर्टल के लिए जो नेविगेशन हो वह विजिटर्स के लिए ऐसा हो कि वह कानून का पूरा ब्यौरा देख सके। पैरेंट्स एक्ट से लेकर सब ऑर्डिनेट एक्ट तक देखा जा सके और पूरा चेन मालूम हो सके।

  4. सभी केंद्रीय मंत्रालय, विभाग, विधाई संस्था, स्वायत्त संस्था और रअन्य संबंधित अथॉरिटी एक नोडल ऑफिसर बनाएं जो पोर्टल पर कानून व विधान को अपलोड करने में मदद करें।

  5.  सभी नोडल ऑफिसर डाटा मानक पैमाने फॉर्मेट में अपलोड करें। ये फॉर्मेट पीडीएफ फॉर्मेट में पढ़ने में सहायक हो औऱ हाइपर लिंक फ्रेंडली हो।

  6. एनआईसी ऐसे तमाम नोडल ऑफिसरों को इस बात के लिए अनुमति दे कि वह डाटा अपलोड कर सकें।

  7. सभी नोडल ऑफिसर डाटा अपलोड करेंगे और जब भी जरूरत होगी तो मेटा डाटा भी अपलोड करेंगे।

  8.  ये पोर्टल एक्ट, रूल्स, रेग्युलेशन और विधानों को हाइपरलिंकिंग के काबिल होगा।

  9. ये पोर्टल राज्य सरकारों के संबंधित अथॉरिटी को इस बात की इजाजत देगा कि वह तमाम विधान, रूल्स, रेग्युलेशन और कानून को अपलोड करेंगे।

  10.  ये  पोर्टल मोबाइल फ्रेंडली होना चाहिए।


इससे पहले एमिकस क्यूरी जयंत भूषण ने कोर्ट को बताया था कि उक्त निर्देश जारी कर पोर्टल में उक्त प्रावधान किया जाए। मई 2017 में जस्टिस मनमोहन ने लेजिस्लेटिव डिपार्टमेंट को कहा था कि वह मीटिंग करें और तमाम सुझावों पर विचार करें ताकि ऑनलाइन पोर्टल को बेहतर बनाया जा सके।


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