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सतलुज यमुना लिंक विवाद पर हरियाणा- पंजाब के बीच सुलह की कोशिश जारी : केंद्र

LiveLaw News Network
7 Sep 2017 6:25 AM GMT
सतलुज यमुना लिंक विवाद पर हरियाणा- पंजाब के बीच सुलह की कोशिश जारी : केंद्र
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सतलज यमुना लिंक यानि SYL  मामले में सुप्रीम कोर्ट में केद्र सरकार ने कहा कि हरियाणा और पंजाब सरकार के बीच सुलह के लिए मीटिंग का दौर जारी है।केंद्र की ओर से AG के के वेणुगोपाल ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की बेंच को बताया कि इस मुद्दे पर अभी वक्त लगेगा। इसके लिए 6 हफ्ते का वक्त दिया जाए।इस दलील को मानते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोर्ट मामले की सुनवाई 8 नवंबर को करेगा। फिलहाल कोर्ट के आदेशानुसार यथास्थिति बरकरार रहेगी। ।

11 जुलाई 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि दोनों राज्यों इस मुद्दे शांति बनाए रखें। जब तक कोर्ट में सुनवाई चल रही है पंजाब और हरियाणा सरकार से सुनिश्चित करें कि SYL को लेकर कोई धरना प्रदर्शन ना हो। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि SYL पर कोर्ट का फैसला लागू होना चाहिए। कोर्ट ने पंजाब को फटकार लगाते हुए कहा था कि अगर हरियाणा ने अपने इलाके में नहर बनाने का काम पूरा कर लिया है तो पंजाब ने क्यों नहीं किया। अगर नहर के लिए पानी की समस्या है तो बाद में देखेंगे। पंजाब पहले नहर का निर्माण करे फिर पानी के बारे में तय करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को दो महीने का वक्त दिया था ताकि वो दोनों राज्यों के बीच सुलह की कोशिश कर सके। कोर्ट ने कहा था कि वक्त का मतलब ये नहीं है कि पंजाब सरकार इसे लंबा खींचे।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कहा था कि केंद्र SYL विवाद का हल निकालने के लिए गंभीर है। केंद्र ने दोनो राज्यों के साथ हाई लेवल मीटिंग बुलाई है।सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ये सुप्रीम कोर्ट का आदेश है जिसका पालन देश के सभी नागरिकों को करना चाहिए।  अगर केंद्र दोनों राज्यों से बातचीत का हल निकलता तो कोर्ट सुनवाई जारी रखेगा सतलुज यमुना लिंक मामले में हरियाणा सरकार की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही है। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने साफ किया था कि लिंक नहर का निर्माण करना ही होगा। उसमें  कितना पानी आएगा ये बाद में तय किया जाएगा। कोर्ट ने हरियाणा और पंजाब को कानून व्यवस्था बनाए रखने के आदेश दिए। कोर्ट ने कहा कि सतलुज यमुना लिंक को लेकर यथास्थिति बरकरार रखने के आदेश बरकरार रहेंगे। राज्यों में कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी दोनों राज्यो पर है पंजाब और हरियाणा दोनों सुनिश्चित करेंगे कि लिंक नहर को लेकर कानून व्यवस्था ना बिगडे कोर्ट ने नाराजगी भी जाहिर की कि देश की सबसे बडी अदालत इस मामले मे आदेश जारी कर चुकी है लेकिन इस पर अमल नहीं किया जा रहा है।

SYL मामले में सुप्रीम कोर्ट में पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल करते हुए कहा कि पिछले साल अधिसूचना के बाद किसानों को दी गयी जमीनों को वापस लेना संभब नहीं है।पंजाब सरकार ने कहा ये केंद्र  की जिम्मेदारी थी किवो दो राज्यो के बीच जल बंटवारे को लेकर मीडिएटर की भूमिका अदा करे लेकिन केंद्र ने ऐसा कभी नहीं किया।

केंद्र सरकार ने कभी भी दोनों राज्यो के बीच चल रही जल बंटवारे की समस्या को खत्म करने की कोशिश नहीं की। केंद्र सरकार की ये जिम्मेदारी थी कि वो वाटर ट्रिब्यूनल का गठन करे लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया।

दरअसल सुप्रीम कोर्ट सतलुज यमुना लिंक नहर मामले में हरियाणा सरकार की याचिका पर सुनवाई कर रहा है। हरियाणा ने  पंजाब सरकार को नहर की जमीन किसानों को वापस देने से रोके जाने की मांग की है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने जमीन वापस दिए जाने पर यथास्थिति बरकरार रखते हुए कमेटी से जमीनी हकीकत की रिपोर्ट मांगी थी।

गौरतलब है कि 10 नवंबर 2016 को सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब द्वारा पड़ोसी राज्यों के साथ सतजुल यमुना लिंक नहर समझौता निरस्त करने के लिए 2004 में बनाए गए कानून को असंवैधानिक करार दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में राष्ट्रपति द्वारा भेजे गए रेफरेंस पर दिए फैसले में कहा था कि वह राष्ट्रपति द्वारा भेजे गए सभी रेफरेंस पर अपना नकारात्मक जवाब देते हैं। पंजाब सरकार करार रद्द करने के लिए एकतरफा फैसला नहीं ले सकतीसुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पंजाब टर्मिनेशन ऑफ एग्रीमेंट एक्ट 2004 सुप्रीम कोर्ट के फैसलों, इंटर स्टेट नदी जल विवाद एक्ट और अन्य संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच ने साफ किया कि पंजाब अन्य राज्यों से किए गए एग्रीमेंट के बारे में एकतरफा फैसला नहीं ले सकता।

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