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CVC के पद पर बैठा व्यक्ति बेदाग छवि का हो : सुप्रीम कोर्ट

LiveLaw News Network
6 Sep 2017 5:01 AM GMT
CVC के पद पर बैठा व्यक्ति बेदाग छवि का हो : सुप्रीम कोर्ट
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वो इस बात की जांच करेगा कि सीवीसी और सतर्कता आयुक्तों के पदों पर नियुक्त व्यक्ति बेदाग छवि होने के मानदंड को पूरा करता है या नहीं।

मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस अरूण मिश्रा की बेंच ने कहा कि कोर्ट राजनीतिक पक्षपात के पहलू पर गौर नहीं करेगा लेकिन केवल इस बात की जांच करेगा कि केंद्रीय सतर्कता आयुक्त यानि सीवीसी और सतर्कता आयुक्तों के पदों पर नियुक्त व्यक्ति बेदाग छवि होने का मानदंड पूरा करता है या नहीं।दरअसल सुप्रीम कोर्ट 2015 में दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रहा है जिसमें वर्तमान सीवीसी के वी चौधरी और सतर्कता आयुक्त वीसी टी एम भसीन की नियुक्ति पर यह आरोप लगाते हुए चुनौती दी गई थी कि उनका साफ़ रिकॉर्ड नहीं है और उनकी नियुक्ति के दौरान अपारदर्शी प्रक्रिया का पालन किया गया।

गौरतलब है कि चौधरी को सीवीसी पद पर छह जून 2015 को जबकि भसीन को  11 जून 2015  को वीसी नियुक्त किया गया था।सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल से पूछा कि क्या प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और नेता प्रतिपक्ष वाली चयन समिति द्वारा किया गया फैसला सर्वसम्मति से किया गया।

AG वेणुगोपाल ने कहा कि ये फैसला सर्वसम्मति से लिया गया था और ये एक प्रशासनिक फैसला था।सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता एनजीओ कामन काज की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया कि चौधरी के खिलाफ कई ज्ञापनों के बावजूद सरकार ने उन्हें सीवीसी के रुप में नियुक्त किया क्योंकि वह उनके पसंदीदा उम्मीदवार थे।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसके सामने सवाल यह है कि इन पदों पर नियुक्त व्यक्ति बेदाग छवि के हैं या नहीं। बेंच ने कहा सवाल बेदाग छवि का है, राजनीतिक पक्षपात का नहीं। व्यक्ति बेदाग छवि का होना चाहिए। कोर्ट इसी पहलू पर गौर करेगा।

हालांकि इस दौरान केंद्र ने दलील दी कि ऐसे मामलों में न्यायिक समीक्षा का दायरा सीमित है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामला सीवीसी और वीसी की नियुक्ति से जुडा है और कुछ सामग्री है जिसमें खास सज्जन  के बारे में कुछ खास टिप्पणियां मौजूद है। कोर्ट ने वेणुगोपाल से इस मामले में दलीलें देने से पहले फाइलों पर गौर करने को कहा है और अब सात सितंबर को मामले की सुनवाई करेगा।

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