15-18 साल की पत्नी से पति के शारीरिक संबंध बनाने को रेप माना जाए तो दोनों का भविष्य क्या होगा ? : सुप्रीम कोर्ट

LiveLaw News Network

31 Aug 2017 6:01 PM IST

  • 15-18 साल की पत्नी से पति के शारीरिक संबंध बनाने को रेप माना जाए तो दोनों का भविष्य क्या होगा ? : सुप्रीम कोर्ट

    " बाल विवाह के मामले में 15 से 18 साल की लड़की के साथ अगर उसका पति शारीरिक संबंध बनाता है और उसे रेप माना जाता है ऐसे में बच्चों का भविष्य क्या होगा ?"  इसी तरह के सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि भारत में बाल विवाह बड़े पैमाने पर हुए है अगर इसको अवैध माना जाता है तो एेसे बच्चों का क्या होगा ?

    गुरुवार को मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर कोई लडक़ी 15 से 18 के बीच है और उसकी शादी नही हुई है और उसकी मर्जी से भी उसके साथ कोई सम्बंध बनाता है तो उसे रेप माना जाता है। लेकिन बाल विवाह के मामले में ऐसा नही है।  15 से 18 साल की लड़की से उसका पति अगर उसकी सहमति से संबंध बनाता है तो वो रेप के तहत नही आएगा। कोर्ट ने कहा कि इस कानून को सही ठहरा दें जिसका मतलब है कि 15 से 18 के बीच शादीशुदा लड़की के साथ उसकी मर्जी से उसका पति संबंध बनाता है तो उसे रेप न माना जाए  या फिर उसे रेप की कैटेगरी में माना जाए या फिर इसे 18 साल ही कर दें ।

    याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील गौरव अग्रवाल ने कहा कि एक तरह लड़कियों की शादी की न्यूनतम आयु 18 वर्ष हैं वहीं इससे कम उम्र की लड़कियों की शादी हो रही है। 15 से 18 वर्ष की लड़कियों की शादी अवैध नहीं होती है लेकिन इसे अवैध घोषित किया जा सकता है। इतनी कम में उम्र में लड़कियों की शादी से उसके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि 15 से 18 वर्ष के बीच लड़कियों की शादी को असंवैधानिक घोषित किया जाना चाहिए। 18 से कम उम्र की लड़कियों को यह नहीं पता होता है कि शादी के क्या परिणाम होंगे। उन्होंने कहा कि शादी का एक ही बेंचमार्क होना चाहिए। लड़कियों की शादी के लिए संसद ने न्यूनतम 18 वर्ष है, जो मानसिक आयु है। ऐसे में इसका कोई अपवाद नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसे लेकर सीआरपीसी में तो बदलाव कर दिया गया लेकिन भारतीय दंड संहिता में संशोधन नहीं किया गया।

    सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस मदन बी लोकूर और जस्टिस दीपक गुप्ता की बेंच ने दस अग अगस्त को कहा था कि केंद्र सरकार बताए कि कितने चाइल्ज मैरिज प्रोहिबिशन ऑफिसर नियुक्त हुए हैं ? उनकी संख्या क्या है ? एक्ट के तहत ये ऑफिसर बनाए जाने हैं ? साथ ही चाइल्ड मैरिज प्रोहिबशन एक्ट के तहत कितने मुकदमे चलाए गए हैं ?  तीन साल का डाटा पेश किया जाए।याचिकाकर्ता वकील गौरव अग्रवाल से सुप्रीम कोर्ट ने पूछा था कि वह बताएं कि 15 से 18 साल की लड़की का हेल्थ की क्या स्टडी है ? इस बारे में हाल की स्टडी रिपोर्ट पेश की जाए। याचिकाकर्ता इंडिपेंडेंट थॉटस संगठन ने रेप की परिभाषा से संबंधित आईपीसी की धारा-375 के अपवाद को चुनौती दी है। अपवाद 2 में कहा गया है कि 15 से 18 साल की लड़की अगर किसी की पत्नी है तो उसके साथ शारीरिक संबंध बनाया जाना तो रेप नहीं होगा। इस प्रावधान को याचिकाकर्ता ने चुनौती दी है और कहा है कि ये गैर संवैधानिक है और ये अनुच्छेद-14, 15 और 21 का उल्लंघन करता है। साथ ही जेजे एक्ट और चाइल्ड मैरिज प्रोहिबिशन एक्ट भी बच्चों के साथ सेक्सुअल प्रताड़ना को रोकता है और प्रावधान कहता है कि बच्चों के साथ एेसा नहीं किया जा सकता। संसद ने गलत तरीके से 15 से 18 साल की शादीशुदा बच्ची के साथ संबंध की इजाजत दी है। इसमें कहा गया है कि 15 से 18 वर्ष के बीच शादी करने वाली महिलाओं को किसी तरह का संरक्षण नहीं है।

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