गुरमीत राम रहीम जैसे लोगों को राजनीति में आने से रोका जाए, याचिकाकर्ता की सुप्रीम कोर्ट में दलील

LiveLaw News Network

31 Aug 2017 5:54 PM IST

  • गुरमीत राम रहीम जैसे लोगों को राजनीति में आने से रोका जाए, याचिकाकर्ता की सुप्रीम कोर्ट में दलील

    गुरमीत राम रहीम को भले ही सीबीआई कोर्ट से सजा मिली हो लेकिन सुप्रीम कोर्ट में चल रहे एक मामले की सुनवाई में दलील दी गई है कि राम रहीम सजा काटकर बाहर आने के बाद चुनाव लडकर मंत्री भी बन सकते हैं। एेसे में कानूनन उनके जैसे लोगों पर पाबंदी लगनी चाहिए।

    गुरुवार तो आपराधिक मामलों में सजायाफ्ता होने पर आजीवन चुनाव लडऩे की पाबंदी लगाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता की तरफ से दलील दी गई कि अगर दागी लोगों पर आजीवन चुनाव लड़ने से रोक नही लगाते तो अपनी सज़ा पूरी करने के बाद राम रहीम भी जेल से बाहर आ कर चुनाव लड़ सकता है। अगर राम रहीम चुनाव लड़ता है तो उसके ख़िलाफ़ कौन चुनाव लड़ सकता है और अगर वो चुनाव लड़ता है तो चुनाव जीत कर मंत्री भी बन जायेगा।

    याचिकाकर्ता की तरफ से दिनेश द्विवेदी ने कोर्ट में कहा कि उस जज के साहस को सलाम और उन दोनों बहनों को जिन्होंने उसके खिलाफ गवाही दी थी। ऐसे में अदालत को कुछ कदम उठाने चाहिए ताकि ऐसे लोग राजनीति से बाहर हो जाये।

    याचिकाकर्ता की तरफ से दलील दी गई कि 34 फीसदी नेता दागी हैं। अगर सरकारी अधिकारी बर्खास्त होता है तो वो वापस नही आ सकता मगर नेता 6 साल की रोक के बाद आ कर चुनाव लड़ सकते है और बॉस बन सकते है। ऐसे में इसे अनदेखा नही किया जा सकता।

    वहीं सुनवाई कर रहे जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट क्या एेसा आदेश दे सकता है कि नेताओं के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट 6 महीने में फैसला सुनाए। अगर कोर्ट एेसा आदेश जारी करता है तो लोग इस आदेश पर सवाल उठाएंगे और समानता के आधार पर फैसले की मांग करेंगे। साथ ही वो लोग भी कोर्ट पहुंचेंगे जो सालों से जेल में बंद हैं। बहरहाल सुप्रीम कोर्ट मामले की सुनवाई 12 सितंबर को करेगा।

    दरअसल भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है। अश्विनी उपाध्याय ने अपनी याचिका में मांग की है कि नेताओं और नौकरशाहों के खिलाफ चल रहे मुकदमों की सुनवाई एक साल में पूरा करने के लिये स्पेशल फास्ट कोर्ट बनाया जाये।

    याचिका में ये भी कहा गया है कि सजायाफ्ता व्यक्ति के चुनाव लड़ने, राजनीतिक पार्टी बनाने और पार्टी पदाधिकारी बनने पर आजीवन प्रतिबंध लगाया जाये।

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