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सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार से पूछा, आसाराम के खिलाफ ट्रायल में देरी क्यों ?

LiveLaw News Network
28 Aug 2017 6:59 AM GMT
सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार से पूछा, आसाराम के खिलाफ ट्रायल में देरी क्यों ?
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गुजरात में नाबालिग से रेप मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार को फटकार लगाई है। गुजरात के गांधी नगर में चल रही आसाराम के खिलाफ धीमी सुनवाई पर सवाल उठाए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार से पूछा मामले की सुनवाई में देरी क्यों हो रही है ?

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस एनवी रमना और जस्टिस अमिताव राय की बेंच ने राज्य सरकार से पूछा है कि अभी तक पीड़ित के बयान क्यों नही दर्ज किए ? सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार को कहा है कि हलफनामा दायर कर केस की प्रगति के बारे में बताए।
आसाराम की ओर से पेश संजय हेगडे ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि पुलिस मामले के ट्रायल में देरी कर रही है। यहां तक कि पीडिता के बयान तक दर्ज नहीं किए गए हैं।

वहीं गुजरात सरकार की ओर से ASG तुषार मेहता ने कहा कि आसाराम जानबूझकर ट्रायल को लटका रहे हैं और गवाहों को क्रास एग्जामिन नहीं कर रहे हैं। मामले की सुनवाई दीवाली के बाद होगी।

दरअसल नाबालिग से रेप का मामले में 12 अप्रैल 2017 को सु्प्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार से कहा था कि आसाराम के खिलाफ ट्रायल को लटकाए ना रखे। इस मामले में प्रैक्टिकली संभव हो सके, गवाहों के बयान दर्ज कराएं जाएं क्योंकि आसाराम लंबे वक्त से जेल में है.  गुजरात सरकार की ओर से कहा गया था कि इस मामले में गवाहों को लेकर तेजी से कारवाई चल रही है। 29 गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं और 46 के बयान दर्ज होना बाकी है। इस बीच दो गवाहों की हत्या कर दी गई और कई जख्मी हुए हैं।

वहीं आसाराम की ओर से सुप्रीम कोर्ट में कहा गया था कि  सुप्रीम कोर्ट सरकार को आदेश दे कि गवाहों के बयान दर्ज कराने की प्रक्रिया में तेजी लाए जाए।

दरअसल आसाराम ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत की अर्जी लगाई थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अर्जी को ठुकराते हुए कहा था कि जब तक केस के गवाहों के बयान ट्रायल कोर्ट में दर्ज नहीं हो जाते, वो मामले की सुनवाई नहीं करेगा। आसाराम 2013 से जेल में बंद हैं।

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