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यूनिटेक के प्रमोटर संजय चंद्रा ने सुप्रीम कोर्ट से मांगी तीन महीने की अंतरिम जमानत

LiveLaw News Network
16 Aug 2017 2:31 PM GMT
यूनिटेक के प्रमोटर संजय चंद्रा ने सुप्रीम कोर्ट से मांगी तीन महीने की अंतरिम जमानत
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यूनिटेक के प्रमोटर संजय चंद्रा ने सुप्रीम कोर्ट से वादा किया है कि वो तीन महीने के भीतर निवेशकों के सारे रुपये चुका देंगे और इसके लिए वो अपना घर व दूसरी संपत्ति भी बेचने को तैयार हैं। चंद्रा ने सुप्रीम कोर्ट से तीन महीने के लिए अंतरिम जमानत पर रिहा करने की गुहार लगाई है।

बुधवार को जस्टिस दीपक मिश्रा की बेंच के सामने सुनवाई के दौरान संजय चंद्रा की ओर से पेश वकील अभिमन्यू भंडारी ने कहा कि उन्हें पैसा इकट्ठा करने लिए जमानत चाहिए। अगर वो जेल में ही रहे तो पूरी कंपनी ढह जाएगी। उनका निवेशकों का पैसा वापस देने के लिए जेल से बाहर आना जरूरी है।

भंडारी ने कहा कि वो नियमित जमानत नहीं मांग रहे हैं बल्कि अंतरिम जमानत मांग रहे हैं और कोर्ट तीन महीने में उसका व्यवहार देखे और अगर वो वादा पूरा ना करे तो दोबारा जेल में डाल दें।

हालांकि बेंच में शामिल जस्टिस अमिताव राय ने कहा कि बिल्डर कोर्ट में कुछ कहते हैं लेकिन जब निवेशक उनके दफ्तर जाते हैं तो उनके तेवर कुछ और होते हैं। ये हम अपने अनुभव से बता रहे हैं।

दरअसल संजय और उनके भाई अजय चंद्रा को पिछले हफ्ते गुडगांव के एक प्रोजेक्ट में निवेशकों से साथ ठगी के आरोप में जेल भेजा गया है। अप्रैल में ट्रायल कोर्ट ने दोनों को तीन महीने की अंतरिम जमानत दी थी जो 11 अगस्त को पूरी हो गई। इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने भी राहत देने से इंकार कर दिया।

संजय चंद्रा ने हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की है। याचिका में कहा दया है कि 152 निवेशकों ने दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा को शिकायत दी थी जिनमें से 62 लोगों के साथ समझौता हो चुका है। अब करीब 35 करोड रुपये का मूलधन देना बाकी है। अगर वो तीन महीने में ये नहीं चुकाते तो कोर्ट उन्हें सजा दे सकता है।

हालांकि कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है कि कितनी शिकायतें दर्ज की गई और कंपनी को कितना मूलधन देना है। स्टेटस रिपोर्ट में ये भी बताना है कि कितने लोगों को पैसा वापस किया गया और कितने लोगों ने फ्लैट लिया है। साथ ही कितने निवेशकों को कंपनी ने पैसे वापस नहीं किए। सुप्रीम कोर्ट मामले की सुनवाई 25 अगस्त को करेगा।

गौरतलब है कि दिल्ली निवासी अरूण बेदी और उनकी मां उर्मिला बेदी की शिकायत पर दिल्ली की कोर्ट ने 27 जुलाई 2015 को दिल्ली पुलिस को केस दर्ज करने के आदेश दिए थे। इसके बाद 31 जुलाई को पुलिस ने केस दर्ज किया था। शिकायत में कहा गया है कि उन्होंने अगस्त 2011 में गुडगांव के वाइल्ड फ्लावर कंट्री प्रोजेक्ट में 57.34 लाख में फ्लैट बुक कराया लेकिन कंपनी ने फ्लैट नहीं दिया। इसके बाद अन्य कई शिकायतें पुलिस के पास पहुंची। पुलिस का कहना है कि कंपनी ने करीब 363 करोड रुपये इकट्ठा किए और इनमें से 91 शिकायतकर्ताओं के करीब 35 करोड रुपये हैं।

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