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भारतीय मीडिया ने की कर्णन लहर कि सवारी, जबकि विदेशी मीडिया ने भारतीय न्यायपालिका पर आघात कियाः सुप्रीम कोर्ट

LiveLaw News Network
6 July 2017 11:06 AM GMT
भारतीय मीडिया ने की कर्णन लहर कि सवारी, जबकि विदेशी मीडिया ने भारतीय न्यायपालिका पर आघात कियाः सुप्रीम कोर्ट
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सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता हाई कोर्ट के तत्कालीन जस्टिस सीएस कर्णन को अदालत की अवमानना मामले में दोषी करार देते हुए टिप्पणी की कि कर्नन ने दलित कार्ड खेला ताकि खुद को वह बचा सकें। कर्णन  ने जजों के खिलाफ जो आरोप लगाए थे उसके लिए उनके पास कोई साक्ष्य नहीं थे। उन्होंने आपत्तिजनक और अपमानित करने वाले आरोप लगाए थे।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कर्णन ने कई जजों पर आरोप लगा दिए। इसके बाद उन्होंने लेटर को व्यापक तरीके से सर्कुलेट कर दिया। भारतीय मीडिया ने कर्णन लहर को तैयार किया और उसके लिए रास्ता दिखाया वहीं विदेशी मीडिया ने भारतीय न्यायपालिका के लिए गड्ढा खोदा। लेटर में कर्णन ने हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों के खिलाफ भ्रामक और आपत्तिजनक व सनसनी फैलाने वाला जो कंटेंट लिखा वह भ्रामक और आपत्तिजनक था और सनसनी पैदा करने के लिए किया गया। कार्यपालिका, विधायिका और न्यापालिका में सबसे उंचे संवैधानिक अथॉरिटी को ये लिखा गया। उन्होंने जिस तरह से लेटर में कंटेंट लिखा है वह जूडिशियल सिस्टम को हस्यास्पद बनाने का काम किया। स्थानीय मीडिया ने बिना दिमाग के रेपुटेशन को डैमेज किया और कहीं न कहीं जूडिशियल इंस्टिट्यूशन के सम्मान को ठेस पहुंचाने का काम किया और कर्णन के लिए वेब बनाने का काम किया। यहां तक कि विदेशी मीडिया ने भी जूडिशियरी के लिए गड्ढा खोदने का काम किया। बेंच ने कहा कि ऐसे में मीडिया को रोकना सही था।

सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए कंटेप्ट ऑफ कोर्ट के मामले में कर्णन को दोषी करार दिया था और छह महीने कैद की सजा सुनाई थी। कोर्ट ने 9 मई को दिए आदेश में कहा था कि कर्णन का कोई बयान मीडिया आगे से न छापे। कोर्ट ने कहा कि ये आदेश किसी भी पब्लिक डिबेट को रोकने के लिए नहीं था। चाहे बैद्धिक हो या फिर और किसी भी एेसे वाद विवाद को रोकने का मकसद नहीं था। मीडिया को किसी भी तरह से रोका नहीं किया लेकिन उक्त मामले में रोका गया।

इस मामले में दो जजमेंट लिखा गया। एक जजमेंट सात जजों की बेंच ने चीफ जस्टिस जेएस खेहर की अगुवाई में लिखा गया वहीं दूसरा जजमेंट जस्टिस जे. चेलामेश्वर और जस्टिस रंजन गोगोई ने लिखा था। सात जजों की बेंच ने अपने जजमेंट में कर्नन को कंटेप्ट ऑफ कोर्ट के लिए दोषी करार दिए जाने का ग्राउंड बताया और कहा कि कोर्ट की छवि को खराब करने की कोशिश की और एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ जस्टिस में दखल की कोशिश की। साथ ही बताया कि उन्होंने जूडिशियरी के मान प्रतिष्ठा को आघात किया और एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ जस्टिस में खलल डाला।


जजमेंट के अन्य मुख्य बिंदु

1. जस्टिस कर्णन ने पहले मामले में माफी की पेशकश की और 31 मार्च को इसलिए लिए लिखा था और कोर्ट में पेश हुए थे। जो नोट लिखा था वह 25 मार्च का था लेकिन जब कोर्ट के सामने पेश हुए तो कंडक्ट में एकात्मकता नहीं थी और विऱोधाभासी कंडक्ट था। तब संदेह हुआ कि क्या वह अपने को डिफेंड करने में सक्षम हैं। इसके बाद उनके मेडिकल एग्जामिेनेशन का आदेश पारित किया गया।

2. जस्टिस कर्णन ने कोलकाता हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार को 14 मार्च को लिखे लेटर में भी अरुणाचल प्रदेश के सीएम कालिखो पुल के आत्महत्या समेत अन्य बातों के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।
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