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सब ऑर्डिनेट ज्यूडिशियरी के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बनाया न्यू नेशनल ज्यूडिशियल पे कमीशन

LiveLaw News Network
31 May 2017 2:47 PM GMT
सब ऑर्डिनेट  ज्यूडिशियरी के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बनाया न्यू नेशनल ज्यूडिशियल पे कमीशन
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सुप्रीम कोर्ट ने सब ऑर्डिनेट जूडिशियरी के लिए नया नैशनल जूडिशियल पे कमिशन बनाया है। न्यायमूर्ति पीवी रेड्डी इस कमीशन के चेयरमैन होगे और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता आर बसंत इस कमीशन के सदस्य बनेगे।

एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक न्यू नैशनल ज्यूडिशियल पे कमीशन का गठन किया है ताकि यह कमीशन पूरे देश की सब ऑर्डिनेट ज्यूडिशियरी से संबंधित ज्यूडिशियल आॅफिसर के वेतन व अन्य शर्तो की जांच कर सके।

न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर व न्यायमूर्ति अब्दुल नजीर की खंडपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस पीवी रेड्डी को कमीशन का चेयरमैन नियुक्त किया है। वहीं केरला हाईकोर्ट के पूर्व जज व सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता आर बसंत को इस कमीशन का सदस्य बनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने कमीशन को निर्देश दिया है कि वह सारा डाटा एकत्रित करे और उसके बाद उचित अनुशंसा दे। साथ ही इसकी काॅपी 18 महीने के अंदर कोर्ट के समक्ष पेश कर दी जाए।
आदेश में कहा गया है कि कमीशन की सहायता एक मैंबर सेक्रेटरी करेगा,जिसका चयन खुद कमीशन करेगा। यह सेक्रेटरी कोई ज्यूडिशियल अधिकारी होगा,जो या तो अभी सेवा में हो या फिर रिटायर हो चुका हो।अगर कमीशन किसी राज्य के किसी ऐसे ज्यूडिशियल अधिकारी का चयन करता है जो अभी अपनी सेवाएं दे रहा है तो संबंधित हाईकोर्ट व राज्य इस अधिकारी की सेवाएं कमीशन उपलब्ध कराएगा और इस अधिकारी को कमीशन में डेपुटेशन के तौर पर माना जाएगा।

शीर्ष कोर्ट ने यह आदेश इस मामले में आॅल इंडिया जजिज एसोसिएशन की तरफ से दायर एक याचिका पर सुनवाई के बाद दिया है।
अपने आठ मार्च 2017 के आदेश में खंडपीठ ने कहा है कि इस याचिका में उठाए गए काफी सारे सवाल उठाए गए है,जिनके लिए कुछ डाटा एकत्रित करने की जरूरत है। इस डाटा को एकत्रित करने के लिए एक उचित बाॅडी के गठन की जरूरत है। कोर्ट ने यह भी कहा कि सेठी कमीशन की अनुशंसाओं के आधार पर कोर्ट ने काफी सारे निर्देश जारी किए गए थे। जिसके बाद याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से आग्रह किया कि एक नए कमीशन का गठन किया जाए।

आठ मार्च 2017 के आदेश में कोर्ट ने यह भी कहा कि भारत सरकार ने इस मामले में कमीशन के निर्देशन के लिए ड्राफट ट्रम आॅफ रेफरेंस पेश किए है। वहीं याचिकाकर्ता का वकील भी इस बात पर सहमत हो गया है कि इस ड्राफट में पेश ट्रम एंड रेफरेंस कमीशन द्वारा प्रयोग की जाए।
जिन ट्रम आॅफ रेफरेंस पर सहमति बनी है,वो इस प्रकार है-
1-पूरे देश की सबाॅर्डिनेट ज्यूडिशियरी के ज्यूडिशियल अधिकारियों के वेतन ढ़ांचे व अन्य सुविधाओं को नियमित करने के लिए एक प्रिंसीपल बनाया जाए।
2- सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के ज्यूडिशियल अधिकारियों के वर्तमान के परिलब्धियां ढ़ांचे व सेवाओं की शर्तो की जांच की जाए। इसके लिए उनको उपलब्ध सारे बेनिफिट को ध्यान में रखा जाए। इन सबको देखने के बाद उचित अनुशंसाए की जाए,जिसमें उनके रिटायमेंट होने के बाद पेंशन आदि के मामले भी शामिल हो। अन्य फैक्टर के लिए सबाॅर्डिनेट ज्यूडिशियल सर्विस व अन्य सिविल सर्वेंट के वेतन ढ़ांचों को भी देखा जाए।
3-ज्यूडिशियल अधिकारियों के काम काज के तरीकों व काम के वातावरण की भी जांच की जाए। वेतन के अलावा उनके लिए उपलब्ध अन्य भत्ते व बेनिफिट की भी जांच हो। जिसके बाद इनको आसान करने की बुद्धिसंगत व्याख्या की जाए। वहीं पूर्व में की गई अनुशंसाओं को लागू करने में पैदा हुई विसंगतियों को दूर किया जाए।
4-सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के सभी कैटेगरी के ज्यूडिशियल आॅफिसर के लिए उचित अंतरिम राहत देने पर विचार किया जाए और उनकी अनुशंसा की जाए। अगर कोई अंतरिम राहत की अनुशंसा की जाती है तो उसे उस पैकेज में शामिल किया जाए जो कमीशन द्वारा की गई अंतिम अनुशंसाओं के तहत दिया जाएगा।
5-समय-समय पर सबाॅर्डिनेट ज्यूडिशियरी के वेतन व अन्य सुविधाओं का रिव्यू करने के लिए एक स्थाई प्रक्रिया बनाने की अनुशंसा की जाए। यह एक स्वतंत्र कमीशन होना चाहिए,जिसका गठन सिर्फ इसी काम के लिए किया गया हो। इस कमीशन में ज्यूडिशियरी की तरफ पर्याप्त प्रतिनिधि होने चाहिए।
कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि कमीशन अपनी इच्छा से अपनी प्रक्रिया तय कर सकता है। वही इस काम के लिए वह अपनी जरूरत के हिसाब से एडवाईजर,संस्थागत सलाहकार व एक्सपर्ट को भी नियुक्त कर सकता है। जरूरी सूचनाएं व सबूत भी कमीशन मंगवा सकता है। सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों व केंद्र सरकार के मंत्रालयों या विभागों को कमीशन की जरूरत के हिसाब से इस तरह की सूचना,कागजात व अन्य सहायता इस आयोग को देनी होगी। कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कमीशन अपने हिसाब से अपने काम की प्रक्रिया व तौर-तरीके तय कर सकता हैै।सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि केंद्र सरकार,राज्य व सभी हाईकोर्ट कमीशन की हर तरह से सहायता करेंगी।वहीं केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि एक एएसजी की सेवाएं इस कमीशन के लिए उपलब्ध कराए ताकि वह कमीशन की सहायता कर सके।
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