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सीएलएटी उम्र सीमा मामला-सुप्रीम कोर्ट ने कहा,बार काउंसिल आॅफ इंडिया करें फिर से विचार

LiveLaw News Network
5 April 2017 6:24 AM GMT
सीएलएटी उम्र सीमा मामला-सुप्रीम कोर्ट ने कहा,बार काउंसिल आॅफ इंडिया करें फिर से विचार
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सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल आॅफ इंडिया (बीसीआई) से कहा है कि काॅमन लाॅ एडमीशन टेस्ट(सी.एल.ए.टी) में बैठने वाले उम्मीदवारों के लिए तय की गई उम्र सीमा पर फिर से विचार करें। बीसीआई ने लीगल एजुकेशन रूल 2008 के क्लाज 28 को फिर से लागू कर दिया है,जिसके तहत पांच वर्षीय इंटिग्रेटिड लाॅ डिग्री में दाखिला लेने के लिए अधिक्तम उम्र सीमा 20 साल है।

न्यायमूति एस.ए बोबड़े व न्यायमूर्ति नागेश्वर राॅव की पीठ ने बार काउंसिल आॅफ इंडिया से कहा है कि इस मामले में याचिका दायर करने वालों के प्रतिनिधियों से विचार-विमर्श करें और मामले को सुलझाएं।

खंडपीठ ने कहा कि यह कोई विरोधात्मक मुद्दा नहीं है। वह उपभोक्ता है और आप कानून की शिक्षा देने वाले। ऐसे में क्यों नहीं इस मामले पर फिर से विचार करके इसे सुलझा लिया जाए और एक उचित उम्रसीमा तय कर दी जाए। खंडपीठ इस मामले में सी.एल.ए.टी की परीक्षा में बैठने के इच्छुक कुछ उम्मीदवारों की तरफ से दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इनमें एक मुम्बई से एक अनाथ भी शामिल है,जिसने उम्र सीमा को चुनौती दी है।

चिकाकर्ताओं की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल,संजय हेगड़े व वकील जोहेब हुसैन पेश हुए। इस नई खंडपीठ का गठन मुख्य न्यायाधीश केहर ने किया था क्योंकि पूर्व में न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा ने इस मामले की सुनवाई से इंकार कर दिया था। इस मामले में अगली सुनवाई अब 28 फरवरी को होगी।

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