धमकी का सामना कर रहे विवाहित जोड़े की सुरक्षा सुनिश्चित करे राज्य: उत्तराखंड हाईकोर्ट का निर्देश
Amir Ahmad
6 April 2026 6:15 PM IST

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी विवाहित जोड़े को खतरे की आशंका हो तो राज्य की जिम्मेदारी है कि वह उनकी सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित करे। अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया कि वह खतरे का आकलन कर आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध कराए।
जस्टिस राकेश थपलियाल ने यह अंतरिम आदेश दंपत्ति की याचिका पर दिया जिसमें उन्होंने शांतिपूर्वक वैवाहिक जीवन जीने के लिए सुरक्षा की मांग की थी।
याचिकाकर्ताओं ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट का रुख करते हुए अपनी जान और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा के लिए पुलिस सुरक्षा देने का अनुरोध किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने 12 फरवरी, 2026 को उधम सिंह नगर स्थित शिव मंदिर में हिंदू रीति-रिवाजों से विवाह किया, जिसके प्रमाण स्वरूप फोटो भी अदालत में प्रस्तुत किए गए।
याचिकाकर्ताओं ने यह भी बताया कि वे दोनों बालिग हैं और अपनी इच्छा से बिना किसी दबाव के विवाह किया है। हालांकि, उनका विवाह अभी पंजीकृत नहीं हुआ।
याचिका में यह भी कहा गया कि विवाह के कारण उन्हें निजी पक्षों, विशेष रूप से लड़की के चचेरे भाई और पिता से खतरा है।
अदालत ने आधार कार्ड के आधार पर दोनों को बालिग मानते हुए कहा,
“यदि निजी पक्षों से किसी प्रकार का खतरा है तो राज्य प्राधिकरणों पर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने का कानूनी दायित्व है।”
हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे खतरे का आकलन करें और याचिकाकर्ताओं को किसी भी प्रकार की धमकी या जबरदस्ती से बचाने के लिए आवश्यक कदम उठाएं।
इसके साथ ही अदालत ने निजी पक्षकारों को थाने बुलाकर समझाने का निर्देश दिया कि वे कानून को अपने हाथ में न लें।
अदालत ने दंपत्ति को भी निर्देश दिया कि वे शीघ्र ही अपने विवाह का पंजीकरण कराकर प्रमाण पत्र प्रस्तुत करें।
मामले में नोटिस जारी करते हुए राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया गया।

