DPC में देरी होने मात्र से पूर्व प्रभाव से पदोन्नति का अधिकार नहीं मिलता: उत्तराखंड हाईकोर्ट
Amir Ahmad
17 Jun 2026 4:34 PM IST

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि केवल इस आधार पर कि विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) का गठन देर से हुआ कोई कर्मचारी पूर्व प्रभाव से पदोन्नति का दावा नहीं कर सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक किसी नियम या दिशा-निर्देश में काल्पनिक अथवा पूर्व निर्धारित तिथि से पदोन्नति देने का प्रावधान न हो, तब तक ऐसा दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता।
जस्टिस मनोज कुमार तिवारी एम्स ऋषिकेश के नर्सिंग अधिकारियों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति वर्ष 2017-18 में हुई और उन्हें 17 अगस्त 2022 के आदेश से वरिष्ठ नर्सिंग अधिकारी के पद पर पदोन्नत किया गया।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उन्होंने वर्ष 2021 में पदोन्नति के लिए आवश्यक तीन वर्ष की सेवा पूरी की थी। इसलिए उन्हें उसी वर्ष से पदोन्नति और उससे जुड़े सभी लाभ दिए जाने चाहिए। इस संबंध में उनकी ओर से दिया गया अभ्यावेदन 7 जुलाई 2023 को एम्स ऋषिकेश के प्रशासनिक अधिकारी ने खारिज किया, जिसके बाद उन्होंने हाइकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
याचिकाकर्ताओं ने 8 सितंबर 1998 के कार्यालय ज्ञापन का हवाला दिया, जिसमें रिक्तियों को भरने के लिए नियमित अंतराल पर डीपीसी आयोजित करने का निर्देश दिया गया।
हाईकोर्ट ने कहा कि उक्त कार्यालय ज्ञापन में डीपीसी समय-समय पर आयोजित करने की बात तो कही गई, लेकिन कहीं भी यह नहीं कहा गया कि किसी कर्मचारी को एक निश्चित या काल्पनिक तिथि से पदोन्नति का अधिकार स्वतः मिल जाएगा।
अदालत ने कहा,
“कार्यालय ज्ञापन में यह व्यवस्था है कि रिक्तियों को भरने के लिए नियमित अंतराल पर डीपीसी आयोजित की जाए। लेकिन इसमें कहीं भी यह प्रावधान नहीं है कि किसी कर्मचारी को किसी अनुमानित तिथि से या समयबद्ध तरीके से पदोन्नति का अधिकार प्राप्त होगा।”
पीठ ने यह भी कहा कि पदोन्नति रिक्तियों की उपलब्धता और डीपीसी की सिफारिशों पर निर्भर करती है। जब तक डीपीसी संबंधित कर्मचारी की पात्रता और योग्यता का मूल्यांकन नहीं करती, तब तक पदोन्नति नहीं दी जा सकती।
अदालत ने गौर किया कि स्वयं याचिकाकर्ताओं ने स्वीकार किया है कि उनके मामलों पर विचार करने वाली डीपीसी का गठन वर्ष 2022 में हुआ था और उसी की सिफारिश पर उन्हें पदोन्नति दी गई। ऐसे में केवल तीन वर्ष की सेवा पूरी हो जाने के आधार पर वर्ष 2021 से पदोन्नति का दावा नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट ने माना कि 7 जुलाई 2023 का आदेश किसी भी कानूनी त्रुटि से ग्रस्त नहीं है। इसलिए याचिका खारिज की गई।
हालांकि, अदालत ने यह अपेक्षा भी जताई कि 8 सितंबर 1998 के कार्यालय ज्ञापन में दिए गए निर्देशों का सक्षम प्राधिकारी पालन करेंगे और भविष्य में रिक्तियां उत्पन्न होने पर समयबद्ध तरीके से डीपीसी का गठन सुनिश्चित करेंगे, ताकि कर्मचारियों को अनावश्यक देरी का सामना न करना पड़े।

