आउटसोर्स कर्मचारी भी गोपनीय जानकारी लीक नहीं कर सकते, आधिकारिक गोपनीयता कानून लागू न होने पर भी जिम्मेदारी बरकरार: उत्तराखंड हाईकोर्ट
Amir Ahmad
17 Jun 2026 1:40 PM IST

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि भले ही किसी आउटसोर्स कर्मचारी पर आधिकारिक गोपनीयता कानून के प्रावधान सीधे लागू न होते हों, फिर भी उससे यह अपेक्षा की जाती है कि वह विभाग की संवेदनशील और गोपनीय जानकारी बाहरी लोगों के साथ साझा न करे। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह जिम्मेदारी सरकारी विभाग में कार्यरत नियमित और आउटसोर्स, दोनों प्रकार के कर्मचारियों पर समान रूप से लागू होती है।
जस्टिस मनोज कुमार तिवारी एक याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसे उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम लिमिटेड के माध्यम से वन विभाग में नियुक्त कर्मचारी ने दायर किया था। याचिकाकर्ता ने 17 फरवरी 2024 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत उसकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं।
विभाग के अनुसार अवैध रूप से पेड़ों की कटाई से जुड़े एक मामले की जांच के दौरान कर्मचारी आरोपी के घर गया और उसने ऐसी जानकारी साझा की, जिसे सार्वजनिक नहीं किया जाना चाहिए था।
कारण बताओ नोटिस में भी उल्लेख किया गया कि कर्मचारी ने आरोपी के घर जाने की बात स्वीकार की। वन क्षेत्राधिकारी ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यदि कर्मचारी आरोपी से मिलने जा रहा था तो उसे पहले विभागीय अधिकारियों को इसकी जानकारी देनी चाहिए थी या अनुमति लेनी चाहिए थी।
विभाग ने यह भी कहा कि कर्मचारी को पहले भी उसके आचरण को लेकर चेतावनी दी गई लेकिन उसके व्यवहार में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद एक महीने का नोटिस देकर उसकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं।
याचिकाकर्ता ने अदालत में तर्क दिया कि उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य नहीं है और उसे बलि का बकरा बनाया गया। उसने यह भी कहा कि वह आधिकारिक गोपनीयता कानून से बंधा हुआ नहीं है।
हाईकोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता एक आउटसोर्स कर्मचारी था और उसे पद पर बने रहने का कोई स्थायी अधिकार प्राप्त नहीं था। साथ ही सेवा समाप्ति का आदेश कारण बताओ नोटिस जारी करने और उसका जवाब प्राप्त करने के बाद पारित किया गया।
अदालत ने यह भी गौर किया कि याचिकाकर्ता ने आरोपी के घर जाने के आरोप का खंडन नहीं किया। इसलिए नोटिस में लगाए गए आरोप को स्वीकार किया हुआ माना जाएगा।
आधिकारिक गोपनीयता कानून से संबंधित दलील पर हाईकोर्ट ने कहा,
“भले ही याचिकाकर्ता उक्त कानून के प्रावधानों से बाध्य न हो लेकिन वन विभाग के प्रत्येक कर्मचारी, चाहे वह नियमित हो या आउटसोर्स, से यह अपेक्षा की जाती है कि वह संवेदनशील सरकारी जानकारी किसी बाहरी व्यक्ति को न बताए।”
अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता पर आरोप था कि उसने अवैध पेड़ कटान मामले के आरोपी को विभाग की संवेदनशील जानकारी उपलब्ध कराई, जो गंभीर विषय है।
इन परिस्थितियों में हाईकोर्ट ने माना कि सेवा समाप्ति के आदेश में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता।
परिणामस्वरूप अदालत ने याचिका खारिज की।

