पुराने नियमों की समय-सीमा से अपील का अधिकार खत्म नहीं किया जा सकता: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने बर्खास्त सिपाही को दी राहत
Amir Ahmad
28 April 2026 4:59 PM IST

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि वर्ष 1991 के पुलिस नियमों में अपील दाखिल करने के लिए निर्धारित समय-सीमा का उपयोग उस स्थिति में नहीं किया जा सकता, जब वह उत्तराखंड पुलिस अधिनियम, 2007 के प्रावधानों से असंगत हो।
अदालत ने स्पष्ट किया कि निरस्त कानून के तहत बनाए गए नियम, बाद में बने अधिनियम से टकराव होने पर प्रभावी नहीं रह सकते।
जस्टिस मनोज कुमार तिवारी बर्खास्त किए गए सिपाही की याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसने सेवा से हटाए जाने और बाद में विलंब के आधार पर अपील खारिज किए जाने को चुनौती दी थी।
याचिकाकर्ता को 5 सितंबर, 2012 को अनधिकृत अनुपस्थिति के आरोप में सेवा से बर्खास्त किया गया। इसके विरुद्ध दायर उसकी अपील 5 मई, 2014 को यह कहते हुए खारिज की गई कि वह उत्तर प्रदेश पुलिस अधीनस्थ श्रेणी अधिकारी (दंड एवं अपील) नियमावली, 1991 के तहत निर्धारित तीन माह की समय-सीमा के बाद दाखिल की गई।
याचिकाकर्ता ने अदालत में दलील दी कि 1991 के नियम पुलिस अधिनियम, 1861 के तहत बनाए गए, जिसे उत्तराखंड पुलिस अधिनियम, 2007 लागू होने के बाद निरस्त कर दिया गया।
उसने कहा कि 2007 के अधिनियम की धारा 26 अपील का अधिकार देती है, लेकिन उसमें कोई समय-सीमा निर्धारित नहीं है। इसलिए 1991 के नियमों की सीमा लागू नहीं की जा सकती।
राज्य सरकार ने धारा 86 का हवाला देते हुए कहा कि बचाव प्रावधान के कारण पुराने नियम अब भी लागू हैं।
हाईकोर्ट ने धारा 86(2) का परीक्षण करते हुए कहा कि पुराने नियम तभी तक प्रभावी रह सकते हैं, जब तक वे नए अधिनियम से असंगत न हों। अदालत ने पाया कि 2007 के अधिनियम में अपील के लिए कोई समय-सीमा नहीं है, जबकि 1991 के नियम समय-सीमा तय करते हैं। ऐसे में दोनों के बीच स्पष्ट असंगति है।
अदालत ने कहा,
“1991 के नियमों के नियम 20(6) में अपील की समय-सीमा संबंधी प्रावधान, उत्तराखंड पुलिस अधिनियम 2007 लागू होने के बाद प्रभावी नहीं रह सकता।”
हाईकोर्ट ने माना कि अपीलीय प्राधिकारी ने केवल देरी के आधार पर अपील खारिज कर त्रुटि की।
इसी के साथ अदालत ने अपीलीय आदेश रद्द करते हुए मामले को पुनः अपीलीय प्राधिकारी के पास भेज दिया और निर्देश दिया कि दो माह के भीतर अपील का गुण-दोष के आधार पर निर्णय किया जाए।

