लाइसेंस नवीनीकरण में देरी पर सांप रखने वाले व्यक्ति को जमानत, उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा- केवल तकनीकी चूक पर जेल उचित नहीं
Amir Ahmad
11 May 2026 5:45 PM IST

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सांपों के कथित अवैध कब्जे के मामले में गिरफ्तार व्यक्ति को जमानत देते हुए कहा कि केवल लाइसेंस की अवधि समाप्त हो जाने और समय पर उसका नवीनीकरण न हो पाने के आधार पर किसी को लगातार जेल में रखना उचित नहीं माना जा सकता।
जस्टिस आशीष नैथानी आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। आरोपी के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।
अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया रिकॉर्ड से यह प्रतीत होता है कि आरोपी पहले वैध लाइसेंस के तहत कार्य कर रहा था और छापेमारी से पहले उसने लाइसेंस नवीनीकरण के लिए आवेदन भी कर दिया था।
हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी को वैज्ञानिक उद्देश्य से सांपों का विष निकालने का लाइसेंस दिया गया, जिसका उपयोग जीवनरक्षक दवाएं बनाने में किया जाता है।
अदालत ने यह भी नोट किया कि बरामद जहरीले सांप पिंजरों में रखे गए।
अदालत ने कहा,
“सिर्फ इस आधार पर कि लाइसेंस की अवधि समाप्त हो गई और समय पर उसका नवीनीकरण या नियमितीकरण नहीं हो पाया, आरोपी को लगातार हिरासत में रखना उचित नहीं लगता।”
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा कि आरोपी पर लगे आरोप अवैध व्यापार से जुड़े हैं या केवल लाइसेंस नवीनीकरण में हुई प्रशासनिक देरी का परिणाम हैं, इसका फैसला मुकदमे के दौरान साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा।
मामले के अनुसार आरोपी के पास से 89 जहरीले सांप और उनका विष बरामद किया गया। अभियोजन पक्ष का कहना था कि उसका लाइसेंस समाप्त हो चुका था और कुछ सांपों की मौत भी हो गई।
राज्य ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी सांप का विष निकालकर राज्य के बाहर अवैध रूप से व्यापार कर रहा था।
वहीं आरोपी ने अदालत में कहा कि वह लंबे समय से इस कार्य में संलग्न है और उसके खिलाफ पहले कभी लाइसेंस की शर्तों के उल्लंघन की शिकायत नहीं हुई। उसने यह भी कहा कि लाइसेंस 31 दिसंबर 2023 को समाप्त हुआ था लेकिन उसके नवीनीकरण के लिए आवेदन लंबित था।
आरोपी ने यह भी बताया कि उसने राजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक के समक्ष सांपों को छोड़ने के लिए आवेदन किया, लेकिन उस पर निर्णय होने से पहले ही उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
हाईकोर्ट ने मामले की परिस्थितियों, आरोपी की अब तक की हिरासत अवधि और उसके खिलाफ किसी आपराधिक इतिहास के अभाव को ध्यान में रखते हुए कहा कि उसे जमानत दी जानी चाहिए।
इसी आधार पर अदालत ने जमानत याचिका मंजूर की।

