समझौते के बाद अतिरिक्त मांग नहीं कर सकते पक्षकार: उत्तराखंड हाईकोर्ट
Amir Ahmad
24 April 2026 6:08 PM IST

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा है कि जब पक्षकार आपसी सहमति से समझौता कर लेते हैं और उस पर अमल भी हो जाता है तो बाद में तय शर्तों से बाहर जाकर कोई अतिरिक्त दावा नहीं किया जा सकता।
जस्टिस आलोक मेहरा आपराधिक मामले को निरस्त करने की याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। इस मामले में दोनों पक्षकारों के बीच पहले ही समझौता हो चुका था, जिसे अदालत ने 20 जुलाई, 2024 को दर्ज किया था। समझौते के तहत याचिकाकर्ताओं को प्रतिवादी को 38,61,795 रुपये का भुगतान करना था जो बाद में पूरा कर दिया गया।
अदालत के समक्ष संयुक्त आवेदन भी प्रस्तुत किया गया जिसमें प्रतिवादी ने पूरी राशि मिलने की पुष्टि करते हुए कहा कि अब कोई विवाद शेष नहीं है।
हालांकि, बाद में प्रतिवादी ने यह नया दावा किया कि मूल राशि तो मिल गई लेकिन उस पर ब्याज नहीं दिया गया। इस पर अदालत ने समझौते की शर्तों और दाखिल हलफनामों का परीक्षण किया।
हाईकोर्ट ने पाया कि समझौते में केवल तय राशि के भुगतान का उल्लेख था और ब्याज को लेकर कोई प्रावधान नहीं था।
अदालत ने कहा,
“जब पक्षकार स्वेच्छा से समझौते में प्रवेश करते हैं और उस पर अमल भी कर लिया जाता है तो बाद में उससे पीछे हटकर अतिरिक्त दावे नहीं किए जा सकते।”
अदालत ने यह भी कहा कि यदि ऐसे दावों की अनुमति दी जाए तो समझौतों की अंतिमता और उनकी बाध्यता कमजोर पड़ जाएगी।
हाईकोर्ट ने प्रतिवादी के इस आचरण पर नाराजगी भी जताई। हालांकि इस संबंध में कोई दंडात्मक आदेश नहीं दिया।
इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने याचिका स्वीकार करते हुए आपराधिक कार्यवाही को समाप्त की।

