सोशल मीडिया पोस्ट फॉरवर्ड करना BNS के तहत अपराध नहीं, मंशा जरूरी: तेलंगाना हाईकोर्ट
Amir Ahmad
30 March 2026 5:00 PM IST

तेलंगाना हाईकोर्ट ने अहम फैसले में कहा कि केवल सोशल मीडिया पर किसी सामग्री को आगे बढ़ा देना (फॉरवर्ड करना) अपने आप में अपराध नहीं है, जब तक उसमें गलत मंशा या दुष्प्रेरणा (इरादा) साबित न हो। अदालत ने इसी आधार पर फेक न्यूज फैलाने के आरोप में दर्ज FIR रद्द की।
जस्टिस के. सुजना की सिंगल बेंच ने कहा,
“मान भी लिया जाए कि याचिकाकर्ताओं ने सामग्री प्रसारित या फॉरवर्ड की तब भी भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के आवश्यक तत्व पूरे नहीं होते। ऐसे में कार्यवाही जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।”
मामला वर्ष 2025 में नकरकल थाने में दर्ज FIR से जुड़ा था, जिसमें याचिकाकर्ताओं पर BNS की धारा 353 के तहत आरोप लगाए गए। शिकायत में राजनीतिक नेता ने आरोप लगाया था कि कुछ यूट्यूब चैनलों और टीवी माध्यमों ने उन्हें एक परीक्षा पेपर लीक मामले से जोड़ते हुए झूठी खबर चलाई, जिसे याचिकाकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर साझा किया।
याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि उन्हें राजनीतिक द्वेष के चलते फंसाया गया और उन्होंने केवल सामग्री को आगे भेजा था, न कि कोई झूठी खबर खुद बनाई। उन्होंने यह भी कहा कि उनके खिलाफ कोई आपराधिक मंशा साबित नहीं होती।
अदालत ने दोनों पक्षकारों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि आरोपों को प्रथम दृष्टया सही मान लेने पर भी यह साबित नहीं होता कि याचिकाकर्ताओं का उद्देश्य समाज में वैमनस्य फैलाना या शांति भंग करना था, जो इन धाराओं के तहत अपराध साबित करने के लिए जरूरी है।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि एक ही घटना को लेकर कई FIR दर्ज करना कानून का दुरुपयोग है।
इन सभी तथ्यों को देखते हुए अदालत ने FIR और उससे जुड़ी कार्यवाही रद्द की और याचिकाकर्ताओं को राहत प्रदान की।

