RTI एक्टिविज्म नया कारोबार बन गया है': सड़क निर्माण में बाधा डालने के आरोपी को सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत नहीं
Amir Ahmad
15 Jun 2026 7:19 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने सड़क निर्माण कार्य में बाधा डालने और सरकारी कर्मचारी के काम में हस्तक्षेप करने के आरोपी एक RTI एक्टिविस्ट को अग्रिम जमानत देने से इनकार किया।
सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि आजकल RTI एक्टिविज्म एक नया कारोबार बन गया है।
जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ RTI एक्टिविस्ट राकेश कुमार बहल की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। बहल ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज की गई थी।
सुनवाई के दौरान जस्टिस संदीप मेहता ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा,
"RTI कार्यकर्ता होना अब एक नया कारोबार बन गया है। केंद्र सरकार ने सड़क निर्माण के लिए धन दिया, वह खुद इसकी देखरेख करेगी। आप कौन होते हैं? तथाकथित RTI कार्यकर्ता! यह पीत पत्रकारिता जैसी प्रवृत्ति है। याचिका खारिज की जाती है।"
वहीं जस्टिस विजय बिश्नोई ने भी सवाल उठाया कि याचिकाकर्ता सड़क निर्माण कार्य की निगरानी क्यों कर रहे थे।
उन्होंने कहा,
"आप कौन होते हैं सड़क निर्माण की प्रगति पर नजर रखने वाले? क्या आप कोई उच्च प्राधिकारी हैं?"
मामले के अनुसार याचिकाकर्ता और एक अन्य व्यक्ति पर आरोप है कि उन्होंने सड़क निर्माण कार्य में बाधा उत्पन्न की।
शिकायतकर्ता जिसकी निगरानी में निर्माण कार्य चल रहा था और वहां मौजूद मजदूरों को भी कथित रूप से डराने-धमकाने का प्रयास किया गया। आरोप यह भी है कि याचिकाकर्ता ने शिकायतकर्ता के साथ मारपीट की जबकि दूसरे आरोपी ने उसे लात मारी।
FIR में यह भी आरोप लगाया गया कि दोनों आरोपियों ने मजदूरों के खिलाफ जातिसूचक अपमानजनक टिप्पणियां कीं। इसके बाद भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की विभिन्न धाराओं तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC/ST Act) के तहत मामला दर्ज किया गया।
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि FIR में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया सरकारी कार्य में बाधा डालने और घटना में याचिकाकर्ता की प्रत्यक्ष भूमिका को दर्शाते हैं। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत देने से इनकार किया था।
सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के दृष्टिकोण से सहमति जताते हुए याचिकाकर्ता को कोई राहत देने से इनकार किया और उसकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज की।

