असम NRC में शामिल लोगों को पहचान पत्र जारी करने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य से मांगा जवाब

Amir Ahmad

10 Aug 2026 2:54 PM IST

  • असम NRC में शामिल लोगों को पहचान पत्र जारी करने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य से मांगा जवाब

    सुप्रीम कोर्ट ने असम में वर्ष 2019 में प्रकाशित राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) में शामिल लोगों को पहचान पत्र जारी करने की मांग से जुड़ी याचिकाओं पर केंद्र सरकार और असम सरकार से जवाब मांगा।

    जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की खंडपीठ ने 10 अगस्त (सोमवार) को मामले की सुनवाई करते हुए केंद्र और असम सरकार को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

    ये याचिकाएं जमीयत उलेमा-ए-हिंद, ऑल असम माइनॉरिटी स्टूडेंट्स यूनियन और असम संख्यालघु संग्राम परिषद की ओर से दायर की गईं।

    सुनवाई के दौरान जमीयत की ओर से सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि याचिकाओं पर नोटिस जारी हो चुका है लेकिन केंद्र और राज्य सरकार की ओर से अभी तक जवाब दाखिल नहीं किया गया। उन्होंने केंद्र और राज्य के जवाब के बाद प्रत्युत्तर दाखिल करने की अनुमति भी मांगी।

    इसी दौरान पूर्व NRC समन्वयक हितेश देव शर्मा की ओर से सीनियर एडवोकेट मनीष गोस्वामी ने अंतरिम आवेदन का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि शर्मा की याचिका में मौजूदा याचिकाओं से बिल्कुल विपरीत मांग की गई और अनुरोध किया कि इसे भी इन्हीं मामलों के साथ जोड़कर सुना जाए।

    हितेश देव शर्मा की याचिका में वर्ष 2019 में प्रकाशित NRC लिस्ट में कथित गलतियों का हवाला देते हुए उसके दोबारा प्रमाणीकरण और पुनः सत्यापन की मांग की गईं।

    केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी की संक्षिप्त दलील सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने शर्मा की याचिका को भी इन मामलों के साथ जोड़ने की अनुमति दी। अदालत ने कहा कि केंद्र और राज्य के जवाब दाखिल होने के बाद इन मामलों को एक साथ सुना जाएगा।

    याचिकाकर्ताओं का मुख्य तर्क है कि वर्ष 2019 में अंतिम NRC प्रकाशित होने के बावजूद कानून के तहत आवश्यक आगे की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई।

    याचिकाओं के अनुसार, NRC में पात्र पाए गए करीब 3.11 करोड़ लोगों को राष्ट्रीय पहचान पत्र जारी किया जाना था। यह व्यवस्था नागरिकता (नागरिकों का पंजीकरण और राष्ट्रीय पहचान पत्र जारी करना) नियम, 2003 के नियम 13 के तहत निर्धारित है।

    इसके अलावा NRC से बाहर किए गए करीब 19 लाख लोगों के संबंध में अस्वीकृति पर्चियां जारी करने और संबंधित नियमों के तहत अपील की प्रक्रिया शुरू करने की भी मांग की गई।

    याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इन आवश्यक कदमों को पूरा नहीं किए जाने के कारण वर्ष 2019 में प्रकाशित अंतिम NRC की प्रक्रिया अधूरी रह गई है। उनका दावा है कि यह स्थिति संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत प्राप्त अधिकारों का उल्लंघन करती है और पूरी प्रक्रिया को मनमाना तथा असंवैधानिक बनाती है।

    सुप्रीम कोर्ट अब केंद्र और असम सरकार के जवाब दाखिल होने के बाद इन याचिकाओं पर आगे सुनवाई करेगा।

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