20 बागी TMC सांसदों को अयोग्यता याचिकाओं पर लोकसभा स्पीकर का नोटिस, सुप्रीम कोर्ट ने भी जारी किया नोटिस
Amir Ahmad
25 Aug 2026 1:32 PM IST

तृणमूल कांग्रेस की ओर से दायर अयोग्यता याचिकाओं पर लोकसभा स्पीकर ने पार्टी के 20 बागी सांसदों को नोटिस जारी किया।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को इन सांसदों के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिकाओं पर कार्रवाई के लिए निर्देश प्राप्त हुए और नोटिस जारी किए जा चुके हैं।
यह मामला तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और लोकसभा में पार्टी के नेता अभिषेक बनर्जी की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है। बनर्जी ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए स्पीकर से अयोग्यता याचिकाओं पर जल्द फैसला लेने की मांग की।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल हैं।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि वह लोकसभा स्पीकर और उनके कार्यालय की ओर से पेश होंगे और इस मामले में स्पीकर ने संबंधित 20 सांसदों को नोटिस जारी किया।
इस पर जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा,
"सवाल नोटिस जारी करने का नहीं है। सवाल यह है कि कार्यवाही एक तय समयसीमा के भीतर पूरी हो।"
सुप्रीम कोर्ट ने इसके बाद 20 सांसदों को नोटिस जारी किया। अभिषेक बनर्जी की ओर से सीनियर एडवोकेट कल्याण बनर्जी पेश हुए।
जिन सांसदों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई, उनमें काकोली घोष दस्तीदार, सुदीप बंद्योपाध्याय, शताब्दी रॉय, प्रसून बनर्जी, रचना बनर्जी, जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया, पार्थ भौमिक, अरूप चक्रवर्ती, अधिकारी दीपक देव, सायनी घोष, बापी हलदर, मोहम्मद अबू ताहेर खान, कालीपद सरेन खेरवाल, असीत कुमार माल, जून मालिया, मिताली बाग, खलीलुर रहमान, माला रॉय, शर्मिला सरकार और पठान यूसुफ शामिल हैं।
विवाद की शुरुआत तृणमूल कांग्रेस के संसदीय दल में हुई बगावत से हुई। पार्टी का आरोप है कि उसके 20 सांसदों ने पार्टी से अलग होने और नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया के साथ जुड़ने की कोशिश की। इन सांसदों ने लोकसभा में अलग समूह के रूप में मान्यता दिए जाने की मांग भी की।
तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि ये सभी सांसद पार्टी के चुनाव चिह्न पर लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए। पार्टी के मुताबिक, किसी दूसरे राजनीतिक संगठन के साथ जुड़ने का उनका कदम संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत लागू दल-बदल विरोधी कानून के दायरे में आता है।
अभिषेक बनर्जी ने इससे पहले लोकसभा स्पीकर के समक्ष इन सांसदों के खिलाफ अलग-अलग अयोग्यता याचिकाएं दायर की थीं और उनका जल्द निपटारा किए जाने की मांग की थी। मानसून सत्र के दौरान स्पीकर ने इन 20 सांसदों के लिए लोकसभा में अलग बैठने की व्यवस्था भी की।
तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीम कोर्ट याचिका में लोकसभा स्पीकर और लोकसभा महासचिव के अलावा इन 20 सांसदों को भी पक्षकार बनाया गया। याचिका में अयोग्यता की कार्यवाही में हो रही देरी को चुनौती दी गई।
इससे पहले शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) भी लोकसभा स्पीकर के उस फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी, जिसमें एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ उसके सांसदों के विलय को मान्यता दी गई।


