क्या मतदाता सूची से नाम हटने पर पासपोर्ट का नवीनीकरण रोका जा सकता है? सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से स्थिति हुई स्पष्ट

Amir Ahmad

29 Jun 2026 12:27 PM IST

  • क्या मतदाता सूची से नाम हटने पर पासपोर्ट का नवीनीकरण रोका जा सकता है? सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से स्थिति हुई स्पष्ट

    पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के बाद पासपोर्ट नवीनीकरण रोके जाने का मामला सामने आने से नई कानूनी बहस छिड़ गई।

    सीनियर पत्रकार और पूर्व संपादक आर. राजगोपाल ने दावा किया कि मतदाता सूची से उनका नाम हटने के आधार पर पुलिस ने प्रतिकूल रिपोर्ट भेजी, जिसके कारण उनके पासपोर्ट के नवीनीकरण की प्रक्रिया रोक दी गई।

    राजगोपाल के अनुसार, उनका नाम "तार्किक विसंगतियों" का हवाला देकर मतदाता सूची से हटाया गया।

    चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में इसी श्रेणी के तहत 27 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए थे।

    बताया गया कि उनके या उनके पिता का नाम वर्ष 2002 की मतदाता सूची से नहीं जोड़ा जा सका।

    रिपोर्टों के अनुसार वर्तनी की मामूली गलतियों और अन्य छोटे तकनीकी कारणों का हवाला देकर कई वास्तविक मतदाताओं के नाम भी सूची से हटाए गए।

    इस प्रक्रिया पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने भी सवाल उठाया कि केवल अंग्रेजी में नामों की अलग-अलग वर्तनी होने के कारण लोगों को संदेह के घेरे में क्यों रखा जाए?

    हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को बरकरार रखा था लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया था कि मतदाता सूची से नाम हट जाना किसी व्यक्ति के नागरिक होने या न होने का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता।

    अदालत ने कहा था कि चुनाव आयोग केवल मतदाता सूची में नाम शामिल करने या हटाने के उद्देश्य से नागरिकता का सीमित स्तर पर आकलन कर सकता है। यह किसी व्यक्ति की नागरिकता पर अंतिम फैसला नहीं है और न ही इससे उसकी नागरिकता समाप्त मानी जा सकती है।

    सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था,

    "ऐसे निर्धारण का प्रभाव केवल मतदाता सूची में शामिल होने और चुनाव में मतदान के अधिकार तक सीमित है। इससे किसी व्यक्ति के नागरिकता संबंधी अधिकार समाप्त नहीं होते और न ही सक्षम प्राधिकारी द्वारा नागरिकता के प्रश्न पर निर्णय देने का रास्ता बंद होता है।"

    अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि चुनाव आयोग को किसी व्यक्ति की नागरिकता पर संदेह हो तो वह मामला केंद्रीय गृह मंत्रालय के सक्षम प्राधिकारी को भेजे। अंतिम निर्णय वही प्राधिकारी कानून के अनुसार करेगा।

    यही कारण है कि केवल मतदाता सूची से नाम हटने के आधार पर किसी व्यक्ति का पासपोर्ट नवीनीकरण रोकना या अन्य नागरिक सुविधाओं से वंचित करना कानूनी रूप से उचित नहीं माना जा सकता।

    सुप्रीम कोर्ट के अनुसार मतदाता सूची से नाम हटने का सीधा असर केवल मतदान के अधिकार पर पड़ता है, नागरिकता से जुड़े अन्य अधिकारों पर नहीं।

    राजगोपाल ने सवाल उठाया कि यदि एक चर्चित पत्रकार को इस तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, तो लाखों सामान्य और वंचित नागरिकों की स्थिति कितनी कठिन हो सकती है।

    वहीं ऐसी भी खबरें हैं कि पश्चिम बंगाल सरकार मतदाता सूची से बाहर हुए लोगों को राशन जैसी कल्याणकारी योजनाओं से वंचित करने की संभावना पर विचार कर रही है।

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