मणिपुर हिंसा मामला: पूर्व मुख्यमंत्री बीरेन सिंह से जुड़े पूरे ऑडियो की फॉरेंसिक जांच के आदेश
Amir Ahmad
7 Jan 2026 3:47 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर में वर्ष 2023 की जातीय हिंसा से जुड़े अहम मामले में पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह से कथित रूप से संबंधित 48 मिनट के पूरे ऑडियो रिकॉर्ड और उनकी स्वीकृत वॉइस सैंपल की फॉरेंसिक जांच कराने का आदेश दिया।
न्यायालय ने निर्देश दिया कि यह सामग्री गुजरात के गांधीनगर स्थित राष्ट्रीय फॉरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय को भेजी जाए।
जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने न्यायालय की निगरानी में जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।
न्यायालय ने विश्वविद्यालय को जांच प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने और अपनी रिपोर्ट बंद लिफाफे में न्यायालय को सौंपने का निर्देश दिया।
खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि संबंधित 48 मिनट की पूरी बातचीत, पूर्व मुख्यमंत्री की स्वीकृत आवाज के रिकॉर्ड तथा याचिकाकर्ता के वकील द्वारा उपलब्ध कराए गए सभी ऑडियो रिकॉर्ड को एक साथ राष्ट्रीय फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी भेजा जाए, ताकि वैज्ञानिक तरीके से जांच की जा सके।
गौरतलब है कि नवंबर 2025 में राष्ट्रीय फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि उसे जो ऑडियो क्लिप भेजी गई थीं, उनमें छेड़छाड़ के संकेत पाए गए और वे आवाज की वैज्ञानिक तुलना के लिए उपयुक्त नहीं थीं।
उस समय यूनिवर्सिटी ने यह भी कहा था कि वक्ताओं की समानता या असमानता पर कोई राय नहीं दी जा सकती।
याचिकाकर्ता ने इस निष्कर्ष पर आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया था कि मणिपुर पुलिस ने फॉरेंसिक जांच के लिए पूरे 48 मिनट के रिकॉर्ड के बजाय केवल छोटे और संपादित अंश ही भेजे थे।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता कूकी संगठन मानवाधिकार न्यास की ओर से सीनियर एडवोकेट प्रशांत भूषण ने न्यायालय को बताया कि यह मामला कई बार सूचीबद्ध हो चुका है और प्रत्येक अवसर पर राज्य की ओर से वकील उपस्थित रहे हैं।
उन्होंने कहा कि याचिका में पूरी 48 मिनट की बातचीत का लिखित विवरण शामिल है और ऑडियो रिकॉर्ड भी उपलब्ध कराया गया, इसलिए अधिकारी इस पूरे रिकॉर्ड से अवगत थे।
वहीं, राज्य की ओर से पेश एडिशनल एडवोकेट जरनल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि राज्य सरकार को पूरा ऑडियो रिकॉर्ड पिछली सुनवाई के बाद ही प्राप्त हुआ और इससे पहले याचिकाकर्ता द्वारा यह सामग्री उपलब्ध नहीं कराई गई थी।
इस पर प्रशांत भूषण ने तर्क दिया कि राज्य सरकार चाहे तो यह रिकॉर्ड उनसे मांग सकती थी, क्योंकि वह लगातार न्यायालय में पेश हो रही थी।
खंडपीठ ने जब पूछा कि रिकॉर्ड पहले क्यों नहीं सौंपा गया, तो भूषण ने कहा कि इसके लिए कोई औपचारिक सूचना नहीं दी गई थी।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि पूरे 48 मिनट के ऑडियो रिकॉर्ड और संबंधित वॉइस सैंपल को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जाए, ताकि मामले की निष्पक्ष और वैज्ञानिक जांच सुनिश्चित हो सके।

