हत्या मामले में दोषपूर्ण जांच पर सुप्रीम कोर्ट की असम पुलिस को फटकार, 16 आरोपियों की गलत दोषसिद्धि पर जताई चिंता
Amir Ahmad
29 April 2026 5:52 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के मामले में त्रुटिपूर्ण जांच के कारण 16 लोगों के विरुद्ध गलत अभियोजन चलने पर असम पुलिस को कड़ी फटकार लगाई।
अदालत ने कहा कि पुलिस की पूर्वनियोजित और दोषपूर्ण जांच ने आपराधिक न्याय प्रक्रिया को गंभीर क्षति पहुंचाई और निर्दोष लोगों को सजा का सामना करना पड़ा।
जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा,
“अक्षम जांच या पूर्वनियोजित जांच दोनों ही आपराधिक अभियोजन के लिए घातक हैं, लेकिन यदि पूरी तरह निर्दोष व्यक्तियों को फंसाया जाए तो उसके परिणाम और भी विनाशकारी होते हैं।”
मामला असम के गोलपाड़ा जिले में 8 जुलाई 2008 को हुई हत्या से जुड़ा है, जिसमें अब्दुल वहाब की कथित रूप से घात लगाकर हत्या कर दी गई थी।
अभियोजन के अनुसार, सड़क पर स्टील वायर बांधकर मोटरसाइकिल सवारों को गिराया गया, मिर्च पाउडर फेंका गया और धारदार हथियारों से हमला किया गया, जिससे वहाब की मौके पर ही मृत्यु हो गई।
सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि पुलिस घटना स्थल पर उसी रात पहुंच गई, लेकिन उसने तत्काल FIR दर्ज नहीं की। FIR दो दिन बाद ऐसे व्यक्ति के बयान पर दर्ज की गई जो प्रत्यक्षदर्शी नहीं था। जिस व्यक्ति से उसे घटना की जानकारी मिली थी, उसे मुकदमे में गवाह के रूप में पेश ही नहीं किया गया।
अदालत ने कहा कि जब शिकायतकर्ता प्रत्यक्षदर्शी नहीं हो, तब सूचना देने वाले व्यक्ति का परीक्षण न होना अभियोजन के लिए घातक है।
खंडपीठ ने टिप्पणी की,
“यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारी ने दंड प्रक्रिया संहिता के अनुसार जांच प्रारंभ करने की उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया। चाहे यह अज्ञानता हो, अक्षमता हो या दुर्भावना परिणाम यह हुआ कि अपराध अनसुलझा रह गया और 16 लोगों पर मुकदमा चला।”
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि कथित प्रत्यक्षदर्शियों की उपस्थिति भी संदिग्ध प्रतीत होती है, क्योंकि यदि वे वास्तव में मौके पर मौजूद होते तो हमलावरों के नाम तत्काल सामने आ जाते, जबकि सभी आरोपी उसी गांव के थे।
अदालत ने माना कि अभियोजन का पूरा मामला भरोसेमंद नहीं है और दोषसिद्धि बनाए रखने योग्य नहीं है।
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने सभी अपीलें स्वीकार करते हुए आरोपियों को बरी कर दिया।
साथ ही अदालत ने असम सरकार और गृह विभाग को सलाह दी कि वे अपराध जांच से जुड़े पुलिस अधिकारियों को बेहतर प्रशिक्षण दें और विधिक प्रक्रिया के पालन के लिए उन्हें समुचित रूप से सक्षम बनाएं।

