NDPS Act : तलाशी के लिए पुलिस अधिकारी का विकल्प देना गैरकानूनी- सुप्रीम कोर्ट ने बरी का फैसला बरकरार रखा

Amir Ahmad

17 March 2026 12:42 PM IST

  • NDPS Act : तलाशी के लिए पुलिस अधिकारी का विकल्प देना गैरकानूनी- सुप्रीम कोर्ट ने बरी का फैसला बरकरार रखा

    सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि किसी आरोपी को तलाशी के लिए पुलिस अधिकारी के सामने पेश होने का विकल्प देना NDPS कानून की धारा 50 का उल्लंघन है। अदालत ने इस आधार पर आरोपी की बरी को बरकरार रखा।

    जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की खंडपीठ ने हिमाचल प्रदेश सरकार की अपील खारिज करते हुए हाइकोर्ट का फैसला सही ठहराया।

    मामला उस आरोपी से जुड़ा था जिसके पास से कथित रूप से चरस बरामद की गई। पुलिस ने उसे यह विकल्प दिया कि वह अपनी तलाशी मजिस्ट्रेट, राजपत्रित अधिकारी या पुलिस अधिकारी के सामने करवा सकता है।

    सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि NDPS कानून की धारा 50 के तहत आरोपी को केवल दो ही विकल्प दिए जा सकते हैं। मजिस्ट्रेट या राजपत्रित अधिकारी के सामने तलाशी। पुलिस अधिकारी के सामने तलाशी का तीसरा विकल्प देना कानून के खिलाफ है।

    अदालत ने कहा,

    “आरोपी को उसके कानूनी अधिकार के बारे में सही तरीके से बताना आवश्यक है। पुलिस अधिकारी के सामने तलाशी का विकल्प देना कानून की गलत जानकारी देना है, जिससे पूरी कार्यवाही प्रभावित हो जाती है।”

    मामले में ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए 10 साल की सजा और एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया। हालांकि, हाइकोर्ट ने यह कहते हुए सजा रद्द की कि धारा 50 के अनिवार्य प्रावधानों का पालन नहीं किया गया।

    सुप्रीम कोर्ट ने भी इस निष्कर्ष से सहमति जताई और कहा कि इस तरह की प्रक्रिया से आरोपी की सहमति कानूनी रूप से वैध नहीं मानी जा सकती और पूरी तलाशी प्रक्रिया ही दोषपूर्ण हो जाती है।

    अदालत ने अपने फैसले में यह भी दोहराया कि तलाशी के दौरान आरोपी को उसके अधिकारों की स्पष्ट और सही जानकारी देना अनिवार्य है अन्यथा पूरा मामला प्रभावित हो सकता है।

    इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने राज्य की अपील खारिज की और आरोपी की बरी कायम रखी।

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