370 रुपये बिरयानी विवाद: स्टैंड-अप कॉमेडी और सोशल मीडिया के लिए नियामक ढांचा बनाने की मांग, सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका
Amir Ahmad
1 July 2026 5:07 PM IST

सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर स्टैंड-अप कॉमेडी, पॉडकास्ट, लाइव स्ट्रीमिंग मंचों और सोशल मीडिया पर उपयोगकर्ताओं द्वारा साझा की जाने वाली सामग्री के लिए व्यापक नियामक ढांचा तैयार करने की मांग की गई।
याचिका में हाल के '370 रुपये बिरयानी' विवाद का हवाला देते हुए कहा गया कि डिजिटल मंचों पर सामग्री के तेजी से प्रसार को देखते हुए संवैधानिक सुरक्षा उपायों की आवश्यकता है।
संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत एडवोकेट विशाल तिवारी द्वारा दायर याचिका में कहा गया कि 370 रुपये बिरयानी विवाद में किसी हास्य कलाकार या सामग्री निर्माता के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की मांग नहीं की गई। बल्कि यह मामला दर्शाता है कि किस प्रकार सोशल मीडिया के एल्गोरिदम विवादित टिप्पणियों को लाखों लोगों तक पहुंचाकर महिलाओं की गरिमा, सहमति और सामाजिक सोच को प्रभावित कर सकते हैं।
याचिका के अनुसार यह विवाद एक स्टैंड-अप कॉमेडी कार्यक्रम के दौरान सामने आया था, जहां दर्शकों में मौजूद एक व्यक्ति ने बताया कि उसने एक महिला पर 370 रुपये की बिरयानी खर्च की, इसलिए उसे शारीरिक संबंध बनाने का अधिकार मिलना चाहिए।
याचिका में कहा गया कि मुद्दा हास्य, व्यंग्य या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित करने का नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करने का है कि सोशल मीडिया पर ऐसी सामग्री के व्यापक प्रसार के लिए संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप संस्थागत सुरक्षा व्यवस्था हो।
याचिका में रणवीर इलाहाबादिया से जुड़े विवाद, 'इंडियाज गॉट लेटेंट' प्रकरण और अखिल भारतीय जज बैडमिंटन प्रतियोगिता से जुड़ी भ्रामक तस्वीरों के प्रसार का भी उल्लेख किया गया।
इसमें कहा गया कि मौजूदा कानूनी व्यवस्था केवल घटना के बाद सक्रिय होती है, जबकि तब तक भ्रामक या आपत्तिजनक सामग्री लाखों लोगों तक पहुंच चुकी होती है।
याचिका में कहा गया,
"मौजूदा कानूनी व्यवस्था प्रतिक्रिया आधारित है। जब तक तथ्य सामने आते हैं और आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी होता है, तब तक गलत जानकारी लाखों लोगों तक पहुंचकर स्थायी नुकसान पहुंचा चुकी होती है।"
याचिकाकर्ता ने कहा कि 370 रुपये बिरयानी' विवाद इस बात का उदाहरण है कि किस तरह डिजिटल मंचों के एल्गोरिदम किसी स्थानीय टिप्पणी को राष्ट्रीय बहस का विषय बना सकते हैं।
याचिका में यह भी कहा गया कि भारत जैसे देश में, जहां बड़ी संख्या में बच्चे और किशोर सोशल मीडिया का उपयोग करते हैं, एल्गोरिदम आधारित मंचों का समाज और सार्वजनिक विमर्श पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
याचिका में केंद्र सरकार से स्टैंड-अप कॉमेडी, पॉडकास्ट, सोशल मीडिया मंचों और उपयोगकर्ता-निर्मित डिजिटल सामग्री के लिए संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के अनुरूप व्यापक कानूनी ढांचा तैयार करने का निर्देश देने की मांग की गई।
इसके अलावा अखिल भारतीय जज बैडमिंटन प्रतियोगिता से जुड़ी भ्रामक सामग्री की जांच के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने, 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों पर सोशल मीडिया के प्रभाव का अध्ययन करने, आयु सत्यापन व्यवस्था और बाल सुरक्षा उपायों की समीक्षा के लिए स्वतंत्र न्यायिक आयोग बनाने तथा डिजिटल मंचों के सामाजिक प्रभाव का अध्ययन करने के लिए उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति गठित करने की भी मांग की गई।

