उन्हें चुनाव लड़ने दें: नंदीग्राम से कांग्रेस प्रत्याशी की अंतरिम जमानत के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई स्थगित
Amir Ahmad
5 Oct 2026 2:37 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को कलकत्ता हाईकोर्ट से मिली अंतरिम जमानत के खिलाफ पश्चिम बंगाल सरकार की याचिका पर सुनवाई 7 अक्टूबर तक स्थगित दी।
जस्टिस जॉयमाल्या बागची के मामले से अलग होने के बाद चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने यह आदेश दिया।
जस्टिस बागची ने हितों के टकराव का हवाला देते हुए सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। उन्होंने बताया कि वकालत के दौरान वह प्रधान से जुड़े मूल मामले में कुछ पक्षकारों की ओर से पेश हो चुके हैं।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुनवाई के दौरान कहा कि उनके सामने कुछ ऐसे तथ्य आए हैं, जिन पर सुप्रीम कोर्ट का ध्यान जाना जरूरी है। उन्होंने बताया कि प्रधान के खिलाफ गैर-जमानती वारंट वर्ष 2007 में ही जारी किए गए, लेकिन उनकी तामील नहीं हुई। सॉलिसिटर जनरल ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने प्रधान को संरक्षण दिया और इन वारंटों की जानकारी तब सामने आई, जब उन्होंने चुनाव लड़ने के लिए नामांकन दाखिल किया।
इस पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि यदि पुलिस अधिकारियों ने वारंट की तामील नहीं की तो उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि व्यवस्था में जवाबदेही तय होनी चाहिए और सवाल उठाया कि जब कोई व्यक्ति चुनाव लड़ना चाहता है, तभी अचानक उसके खिलाफ कार्रवाई क्यों शुरू होती है।
सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि कोर्ट उचित समझे तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है, लेकिन राज्य सरकार की अंतरिम जमानत को चुनौती देने वाली याचिका पर भी सुनवाई की जानी चाहिए।
प्रधान की ओर से सीनियर एडवोकेट डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि राज्य सरकार चुनाव से ठीक पहले उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई चाहती है। उन्होंने कहा कि संबंधित मामला वर्ष 2007 का है और हाईकोर्ट ने प्रधान को केवल 21 दिनों की अंतरिम जमानत दी है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने सॉलिसिटर जनरल से कहा,
“उन्हें चुनाव लड़ने दें और चुनाव शांतिपूर्वक पूरा करने दें।”
सॉलिसिटर जनरल ने मामले को मंगलवार को ही सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आग्रह किया, लेकिन पीठ ने इसे 7 अक्टूबर के लिए सूचीबद्ध कर दिया।
चीफ जस्टिस ने यह भी टिप्पणी की कि यह पुराना मामला है और इसमें हजारों लोग शामिल थे। नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव 6 अक्टूबर को होना है।
इससे पहले 29 सितंबर को कलकत्ता हाईकोर्ट ने कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत दी। जस्टिस तीर्थंकर घोष ने प्रधान की उस याचिका पर यह राहत दी थी, जिसमें उन्होंने 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव में चुनाव लड़ने और प्रचार करने के लिए अंतरिम जमानत की मांग की। हाईकोर्ट ने उन्हें 21 अक्टूबर तक हिरासत से बाहर रहने की अनुमति दी थी।
प्रधान को 2007 के नंदीग्राम आंदोलन से जुड़े आपराधिक मामलों में नामांकन पत्र दाखिल करने के बाद गिरफ्तार किया गया। हाईकोर्ट ने गौर किया कि नामांकन दाखिल करते समय वह हिरासत में नहीं थे और राज्य सरकार ऐसा कोई ठोस रिकॉर्ड पेश नहीं कर सकी, जिससे यह पता चले कि वर्ष 2007 के बाद किसी अपराध के सिलसिले में प्रधान वांछित थे।
हाईकोर्ट ने यह भी ध्यान दिया कि राज्य सरकार जिन मामलों पर भरोसा कर रही थी, उनकी जांच CBI कर चुकी थी और करीब 19 साल पुराने मामलों में पुलिस के पास गैर-जमानती वारंट की तामील करने के लिए पर्याप्त समय था।
राज्य सरकार ने अंतरिम जमानत का विरोध करते हुए कहा कि मामलों में हत्या सहित गंभीर आरोप शामिल हैं और प्रधान के खिलाफ जबरन कार्रवाई की प्रक्रिया जारी की जा चुकी है। राज्य ने यह आशंका भी जताई थी कि जमानत पर बाहर आने के बाद वह गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं।
वहीं, प्रधान की ओर से दलील दी गई कि उनकी गिरफ्तारी उनके चुनाव लड़ने की घोषणा के बाद हुई और राज्य सरकार ने ऐसा कोई ठोस रिकॉर्ड पेश नहीं किया, जिससे कथित अपराधों में उनकी भूमिका सामने आती हो। इन परिस्थितियों में कलकत्ता हाईकोर्ट ने माना कि प्रधान को चुनाव लड़ने का अवसर दिया जाना चाहिए और उन्हें 21 अक्टूबर तक अंतरिम जमानत दी थी।
अब सुप्रीम कोर्ट 7 अक्टूबर को पश्चिम बंगाल सरकार की चुनौती पर आगे सुनवाई करेगा।

