वकीलों को केवल वर्चुअल सुनवाई के लिए मजबूर नहीं कर सकते: सुप्रीम कोर्ट

Amir Ahmad

27 May 2026 3:38 PM IST

  • वकीलों को केवल वर्चुअल सुनवाई के लिए मजबूर नहीं कर सकते: सुप्रीम कोर्ट

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह वकीलों को केवल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई में शामिल होने के लिए बाध्य नहीं कर सकता।

    अदालत ने कहा कि वह केवल बार के सदस्यों से अपील कर सकती है कि पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण पैदा हुए ईंधन संकट को देखते हुए अधिक से अधिक वर्चुअल माध्यम अपनाएं।

    चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

    याचिका में मांग की गई थी कि ईंधन संकट को देखते हुए तीन महीने तक विविध मामलों की सुनवाई वर्चुअल माध्यम से कराई जाए।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता की पहल की सराहना की, लेकिन कहा कि बिना वकीलों की व्यावहारिक कठिनाइयों को समझे ऐसा कोई न्यायिक आदेश देना उचित नहीं होगा।

    अदालत ने अपने आदेश में कहा,

    “हम याचिकाकर्ता की पहल की सराहना करते हैं। लेकिन यह उचित नहीं होगा कि सदस्यों की कठिनाइयों को जाने बिना उन्हें ऑनलाइन उपस्थित होने का न्यायिक आदेश दिया जाए। इसलिए हम कोई निर्देश जारी नहीं कर रहे हैं। हालांकि प्रशासनिक स्तर पर बार के सदस्यों से वर्चुअल माध्यम से सुनवाई में शामिल होने की गंभीर अपील करते हैं।”

    चीफ जस्टिस ने स्पष्ट कहा कि अदालत वर्चुअल सुनवाई के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं देने को तैयार है लेकिन इसे अनिवार्य नहीं बना सकती।

    उन्होंने कहा,

    “यह अदालत का आदेश नहीं है। हमने केवल प्रशासनिक परिपत्र जारी कर बार के सदस्यों से घर से वर्चुअल माध्यम से जुड़ने का अनुरोध किया है। लेकिन हम ऐसा प्रतिबंध लागू नहीं कर सकते।”

    याचिकाकर्ता की ओर से यह भी दलील दी गई कि अदालतों तक आने-जाने में वकीलों के अलावा कैदियों को लाने-ले जाने में भी भारी मात्रा में ईंधन खर्च होता है।

    बताया गया कि प्रतिदिन 250 से अधिक बसें कैदियों को अदालतों तक पहुंचाने में लगती हैं। ऐसे में कैदियों की पेशी भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कराई जानी चाहिए।

    इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट पहले से ही कैदियों की पेशी वर्चुअल माध्यम से कराता है।

    उन्होंने कहा कि यदि किसी हाइकोर्ट में ऐसी व्यवस्था नहीं है तो सुप्रीम कोर्ट प्रशासनिक स्तर पर इस मुद्दे की समीक्षा कर सकता है।

    चीफ जस्टिस ने यह भी बताया कि उन्होंने सभी हाइकोर्टों के चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर वर्चुअल सुनवाई की सुविधा का अधिक उपयोग करने को कहा है।

    इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिका का निस्तारण किया।

    गौरतलब है कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने ईंधन बचत उपायों के तहत कुछ श्रेणी के मामलों में वर्चुअल सुनवाई को बढ़ावा देने के लिए प्रशासनिक कदम उठाए थे।

    हालांकि बाद में बार की आपत्तियों के बाद अदालत ने स्पष्ट किया था कि जिन वकीलों के लिए वर्चुअल माध्यम से पेश होना संभव नहीं है, वे शारीरिक रूप से अदालत में उपस्थित हो सकते हैं।

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