दिव्यांगों के लिए ऊपरी सीमा तय नहीं कर सकता राज्य: सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला, 90% दिव्यांग वकील की नियुक्ति का आदेश

Amir Ahmad

18 March 2026 12:28 PM IST

  • दिव्यांगों के लिए ऊपरी सीमा तय नहीं कर सकता राज्य: सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला, 90% दिव्यांग वकील की नियुक्ति का आदेश

    सुप्रीम कोर्ट ने दिव्यांगजनों के अधिकारों पर महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 केवल न्यूनतम पात्रता (फ्लोर) तय करता है लेकिन राज्य को यह अधिकार नहीं देता कि वह अधिक दिव्यांगता वाले व्यक्तियों को बाहर करने के लिए कोई ऊपरी सीमा (सीलिंग) तय करे।

    जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने हिमाचल प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि 90% दिव्यांग वकील को सहायक जिला अटॉर्नी (ADA) के पद पर नियुक्त किया जाए।

    मामला उस भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा था, जिसमें दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए पात्रता 40% से 60% तक सीमित कर दी गई। याचिकाकर्ता जो 90% दिव्यांग हैं, ने परीक्षा पास कर टॉप किया लेकिन केवल अधिक दिव्यांगता के आधार पर उनकी नियुक्ति रोक दी गई।

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कानून में केवल 40% दिव्यांगता की न्यूनतम सीमा तय है, जिससे व्यक्ति बेंचमार्क दिव्यांग माना जाता है। इससे अधिक दिव्यांगता के आधार पर किसी को बाहर करना कानून के उद्देश्य के विपरीत है।

    अदालत ने स्पष्ट किया कि पात्रता का निर्धारण केवल दिव्यांगता के प्रतिशत से नहीं, बल्कि व्यक्ति की कार्यक्षमता (फंक्शनल क्षमता) और उचित समायोजन (रीज़नेबल एकॉमोडेशन) के आधार पर होना चाहिए।

    कोर्ट ने कहा,

    “60% की अधिकतम सीमा तय कर राज्य ने कानून की परिभाषा को ही बदल दिया, जो कि पूरी तरह मनमाना है।”

    अदालत ने यह भी माना कि एडीए का कार्य मुख्यतः कानूनी सलाह और न्यायालय में पेशी से जुड़ा है, जिसमें बौद्धिक क्षमता अधिक महत्वपूर्ण है। याचिकाकर्ता कई वर्षों से सफलतापूर्वक वकालत कर रहे हैं, जिससे उनकी योग्यता स्पष्ट होती है।

    सुप्रीम कोर्ट ने राज्य की कार्रवाई को संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन बताया और कहा कि यह समान अवसर के सिद्धांत के खिलाफ है।

    अदालत ने राज्य को दो सप्ताह के भीतर नियुक्ति पत्र जारी करने का निर्देश दिया और कहा कि नियुक्ति 19 सितंबर, 2019 से प्रभावी मानी जाएगी।

    साथ ही याचिकाकर्ता को न्याय में हुई देरी को देखते हुए राज्य पर 5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया जो चार सप्ताह के भीतर अदा करना होगा।

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