कनॉट प्लेस में 'तिरंगा प्रदर्शन' से कारोबार का नुकसान हुआ तो मुआवजा दिला सकता है सुप्रीम कोर्ट, NDMC के आदेश पर कही बड़ी बात
Amir Ahmad
16 Oct 2026 12:49 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यदि नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) का आदेश असंगत प्रतिबंध लगाने वाला पाया जाता है और इसके कारण कारोबारियों को गैरकानूनी नुकसान होता है तो अदालत मुआवजा देने के लिए अपने अधिकारों का इस्तेमाल करेगी।
यह मामला दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में प्रस्तावित तिरंगा प्रदर्शन के चलते व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित होने की आशंका से जुड़ा है।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने शुक्रवार को मामले की जल्द सुनवाई की मांग पर मौखिक सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की।
अदालत ने मामले को दशहरा अवकाश के बाद 26 या 27 अक्टूबर को सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई।
दिल्ली किराना समिति और दिल्ली आयरन एंड हार्डवेयर मर्चेंट एसोसिएशन की ओर से पेश वकील जय अनंत देहाद्रई ने अदालत को बताया कि कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से सेंट्रल पार्क में तिरंगा प्रदर्शन का आह्वान किया गया।
उन्होंने आशंका जताई कि इससे कारोबार प्रभावित होगा और प्रतिदिन करीब 200 करोड़ रुपये के व्यापार का नुकसान हो सकता है। वकील ने यह भी बताया कि NDMC ने पिछली रात एक नोटिस जारी कर संबंधित स्थान को बंद करने की जानकारी दी थी।
पीठ ने शुरुआत में कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट में इसी से जुड़ा एक मामला पहले से सुनवाई के लिए लंबित है। इस पर याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि उनकी याचिका का मुद्दा अलग है।
जस्टिस बागची ने इस दलील पर कहा कि सभी मामले आपस में जुड़े हुए। उन्होंने टिप्पणी की कि कोई प्रदर्शन करना चाहता है, कोई मूंगफली बेचना चाहता है और प्रशासन को कानून-व्यवस्था भी बनाए रखनी है। इसलिए इन सभी पहलुओं को एक-दूसरे से अलग करके नहीं देखा जा सकता।
वकील ने आगे दलील दी कि त्योहारों का मौसम आने वाला है और इस दौरान कारोबार में बाधा आने से दुकानदारों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
इस पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि अदालत दशहरा अवकाश के बाद ही मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर सकती है। उन्होंने छोटे दुकानदारों की आजीविका पर पड़ने वाले प्रभाव को भी रेखांकित किया।
चीफ जस्टिस ने कहा,
“हम उम्मीद करते हैं कि सभी लोग समझदारी से काम लेंगे। हम जानते हैं कि छोटे दुकानदार इन दिनों अपनी आजीविका कमाते हैं। हम समझते हैं कि इससे पूरे परिवारों को कितनी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।”
जब वकील ने मामले को जल्द सूचीबद्ध करने पर जोर दिया, तो जस्टिस बागची ने कहा कि यदि अदालत यह पाती है कि कारोबारियों को गैरकानूनी नुकसान हुआ है, तो वह संवैधानिक अपकृत्य के सिद्धांत के तहत मुआवजा देने के लिए अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर सकती है।
जस्टिस बागची ने कहा,
“यदि कारोबार का नुकसान होता है और हम पाते हैं कि आपके पक्षकारों के साथ यह गैरकानूनी रूप से हुआ है, तो हम संवैधानिक अपकृत्य के अपने अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करेंगे। जब ऐसी स्थिति आएगी, तब उस पर विचार करेंगे।”
NDMC के आदेश से पूरे मध्य दिल्ली के कारोबार पर असर पड़ने की आशंका जताए जाने पर जस्टिस बागची ने दोहराया कि यदि आदेश असंगत प्रतिबंध लगाने वाला पाया गया, तो अदालत मुआवजे के लिए उपलब्ध कानूनी अधिकारों के तहत कार्रवाई करेगी।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने मामले को दशहरा अवकाश के बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्णय लिया। कारोबारियों की याचिका में सेंट्रल पार्क में प्रस्तावित प्रदर्शन और प्रशासनिक प्रतिबंधों के कारण व्यापार तथा दुकानदारों की आजीविका पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को उठाया गया।

