केवल इस आधार पर जज को पक्षपाती नहीं माना जा सकता कि वादी का रिश्तेदार पुलिसकर्मी या न्यायालय कर्मी है: सुप्रीम कोर्ट

Amir Ahmad

7 Jan 2026 3:15 PM IST

  • केवल इस आधार पर जज को पक्षपाती नहीं माना जा सकता कि वादी का रिश्तेदार पुलिसकर्मी या न्यायालय कर्मी है: सुप्रीम कोर्ट

    सुप्रीम कोर्ट ने स्थानांतरण याचिकाओं से जुड़े एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि मात्र इस कारण से किसी जज पर पक्षपात का आरोप नहीं लगाया जा सकता कि मुकदमे के किसी पक्षकार का रिश्तेदार पुलिस विभाग या न्यायालय में कार्यरत है।

    न्यायालय ने तेलंगाना हाइकोर्ट द्वारा पारित उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसके तहत एक आपराधिक मामले को संगारेड्डी से हैदराबाद स्थानांतरित किया गया था।

    जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने पत्नी की अपील स्वीकार करते हुए कहा कि बिना ठोस और प्रासंगिक आधार के केवल आशंकाओं के आधार पर मामले का स्थानांतरण नहीं किया जा सकता।

    यह मामला उस आपराधिक शिकायत से जुड़ा था, जो पत्नी द्वारा दायर की गई। पति के आग्रह पर तेलंगाना हाइकोर्ट ने एकतरफा आदेश पारित करते हुए मामला संगारेड्डी स्थित अतिरिक्त न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत से हैदराबाद के नामपल्ली स्थित महानगर मजिस्ट्रेट की अदालत में स्थानांतरित कर दिया था।

    सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर आपत्ति जताई कि स्थानांतरण का आदेश पत्नी को सुने बिना पारित किया गया, जबकि वह याचिका में प्रतिवादी है।

    पीठ ने यह भी ध्यान में रखा कि पत्नी दो बच्चों की मां है और उसके लिए अपने गृह नगर से दूर जाकर कार्यवाही चलाना व्यावहारिक रूप से कठिन है।

    स्थानांतरण की मांग इस आधार पर की गई थी कि पत्नी के रिश्तेदार स्थानीय पुलिस और न्यायालय के कर्मचारियों को प्रभावित कर सकते हैं।

    पति की ओर से यह तर्क दिया गया कि पत्नी का एक रिश्तेदार स्थानीय थाने में प्रधान आरक्षी है और दूसरा जिला कोर्ट की स्थापना में कार्यरत है, जिससे पक्षपात की आशंका है।

    सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि केवल ऐसे तथ्यों के आधार पर जज के पक्षपाती होने की धारणा नहीं बनाई जा सकती।

    न्यायालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि निर्णय जज द्वारा किया जा रहा है तो किसी पक्षकार के रिश्तेदार के पुलिस या न्यायालय में कार्यरत होने मात्र से दूसरे पक्ष के खिलाफ पक्षपात मान लेना उचित नहीं है।

    न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि जिन रिश्तेदारों के आधार पर पक्षपात का आरोप लगाया गया, उनमें से एक का तबादला पहले ही संबंधित न्यायालय से हो चुका था। ऐसे में स्थानांतरण के लिए उठाए गए आधार महत्वहीन हैं।

    इन सभी कारणों से सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना हाइकोर्ट के आदेश को निरस्त करते हुए निर्देश दिया कि आपराधिक मामला पुनः संगारेड्डी स्थित अतिरिक्त न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत को वापस सौंपा जाए।

    साथ ही यह भी कहा गया कि यदि स्थानांतरित अदालत ने किसी कारणवश, जैसे अनुपस्थिति के आधार पर, मामले को समाप्त कर दिया हो, तो उसे बहाल कर अनिवार्य रूप से पुनः संगारेड्डी की अदालत में भेजा जाए।

    पति की सुरक्षा संबंधी आशंका पर न्यायालय ने कहा कि वह व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट मांग सकता है, वकील के माध्यम से या वीडियो माध्यम से पेश हो सकता है। आवश्यकता पड़ने पर वह पुलिस सुरक्षा के लिए भी आवेदन कर सकता है, जिस पर मजिस्ट्रेट सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगा।

    सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके ये अवलोकन केवल मामले के स्थानांतरण तक सीमित हैं और साक्ष्यों के आधार पर अंतिम निर्णय को प्रभावित नहीं करेंगे।

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