सूरत दुष्कर्म मामला: बयान में विरोधाभास का दावा, नारायण साईं ने हाइकोर्ट में सजा को दी चुनौती
Amir Ahmad
18 March 2026 12:36 PM IST

सूरत दुष्कर्म मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे नारायण साईं ने गुजरात हाइकोर्ट में अपनी दोषसिद्धि को चुनौती देते हुए कहा है कि पीड़िता के बयान में कई विरोधाभास बदलाव और सुधार हैं, जिन पर ट्रायल कोर्ट ने ध्यान नहीं दिया।
यह दलील मंगलवार को जस्टिस इलेश जे. वोरा और जस्टिस आर. टी. वच्छानी की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान दी गई।
साईं के वकील ने अदालत में कहा कि पीड़िता को कई मौके मिले, जब वह घटना की शिकायत कर सकती थी लेकिन उसने ऐसा नहीं किया।
वकील के अनुसार,
“यदि किसी महिला के साथ ऐसा अत्याचार होता है, तो क्या वह उसी व्यक्ति के बुलाने पर फिर उसके आश्रम जाएगी?”
उन्होंने यह भी कहा कि पीड़िता स्वतंत्र रूप से बाहर जाती थी और उसे पुलिस या परिवार को बताने का अवसर था।
बचाव पक्ष ने पीड़िता की गवाही की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा कि उसके अलग-अलग बयानों FIR धारा 164 के बयान और अदालत में दिए गए बयान में असंगतियां हैं।
वकील ने कहा,
“निचली अदालत ने इन विरोधाभासों को नजरअंदाज कर पीड़िता की बात को ही अंतिम सत्य मान लिया, जिससे आरोपी के साथ अन्याय हुआ।”
वकील ने यह भी तर्क दिया कि अभियोजन पक्ष ने कई अहम गवाहों को पेश नहीं किया जबकि उनके बयान दर्ज किए गए। साथ ही जांच प्रक्रिया में भी खामियां होने का आरोप लगाया गया।
मामले के अनुसार पीड़िता ने आरोप लगाया था कि वर्ष 2001 में एक कार्यक्रम के बाद उसे विभिन्न स्थानों पर भेजा गया, जहां साईं ने उसके साथ यौन शोषण किया।
उसने यह भी कहा कि वह 2004 में आश्रम छोड़ने के बाद भी डर के कारण शिकायत नहीं कर पाई और बाद में हिम्मत जुटाकर मामला दर्ज कराया।
बचाव पक्ष ने इन आरोपों पर सवाल उठाते हुए कहा कि पीड़िता कथित घटनाओं के बाद भी लंबे समय तक आरोपी के संपर्क में रही और कार्यक्रमों में भाग लेती रही, जो सामान्य व्यवहार के विपरीत है।
सुनवाई के दौरान साईं की ओर से यह भी कहा गया कि उनकी अपील पर लंबे समय से सुनवाई नहीं हुई, जबकि अदालत ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि देरी केवल लंबित मामलों के कारण नहीं है।
हाइकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले की अगली सुनवाई 23 मार्च के लिए तय की है।
गौरतलब है कि सूरत सत्र अदालत ने 30 अप्रैल, 2019 को नारायण साईं को दुष्कर्म सहित कई गंभीर धाराओं में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। वह दिसंबर 2013 से जेल में बंद हैं।

