खाड़ी देशों के छात्रों को सुप्रीम कोर्ट से राहत, CBSE को जल्द विशेष परीक्षा कराने का निर्देश

Amir Ahmad

13 Aug 2026 12:28 PM IST

  • खाड़ी देशों के छात्रों को सुप्रीम कोर्ट से राहत, CBSE को जल्द विशेष परीक्षा कराने का निर्देश

    सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम एशिया में युद्ध की स्थिति के कारण बोर्ड परीक्षा से वंचित रह गए खाड़ी देशों के 12वीं कक्षा के छात्रों को बड़ी राहत देते हुए CBSE की विशेष मूल्यांकन व्यवस्था में दखल देने से इनकार किया। हालांकि, कोर्ट ने CBSE की उस आश्वस्ति को दर्ज किया है कि प्रभावित छात्रों के लिए जल्द से जल्द दोबारा परीक्षा कराने के कदम उठाए जाएंगे।

    जस्टिस एम.एम. सुंदरैश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने छात्रों की उस मांग को स्वीकार नहीं किया, जिसमें उन्हें कंपार्टमेंट परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों के साथ ही परीक्षा देने की अनुमति देने का आग्रह किया गया। कोर्ट ने कहा कि अगली परीक्षा के माध्यम से प्रभावित छात्रों को जल्द से जल्द प्रतिस्पर्धा का अवसर दिया जाना चाहिए, ताकि वे उच्च शिक्षा में प्रवेश के लिए भी प्रतिस्पर्धा कर सकें।

    मामला सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, कतर, ओमान और बहरीन स्थित CBSE से संबद्ध स्कूलों के छात्रों से जुड़ा था। पश्चिम एशिया में युद्ध जैसी परिस्थितियों और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण कई विषयों की बोर्ड परीक्षाएं रद्द करनी पड़ी थीं।

    इसके बाद CBSE ने 27 मार्च 2026 को विशेष मूल्यांकन योजना जारी की थी। इसके तहत रद्द किए गए विषयों के लिए छात्रों के तिमाही, अर्धवार्षिक और प्री-बोर्ड जैसे स्कूल स्तर पर आयोजित परीक्षाओं के प्रदर्शन के आधार पर अंक निर्धारित किए गए।

    छात्रों का कहना था कि इस व्यवस्था के कारण कई छात्रों को उन अंकों से काफी कम अंक मिले, जो वे नियमित बोर्ड परीक्षा में हासिल कर सकते थे। याचिका में यह भी बताया गया कि इसका असर उच्च शिक्षा में प्रवेश पर पड़ रहा है। विशेष रूप से विदेशों में भारतीय छात्रों के लिए उपलब्ध प्रवेश योजनाओं में 75 प्रतिशत अंक की न्यूनतम पात्रता के कारण कई छात्र प्रभावित हुए।

    याचिकाकर्ताओं के अनुसार कुछ छात्र JEE MAIN में सफल होने के बावजूद विशेष मूल्यांकन के तहत मिले अंकों के कारण प्रवेश के लिए पात्र नहीं रह गए। कुछ अन्य छात्रों को अनुत्तीर्ण या कंपार्टमेंट श्रेणी में रखा गया, जबकि उनका पिछला शैक्षणिक प्रदर्शन अच्छा रहा था।

    सुनवाई के दौरान CBSE ने कहा कि पूरे मामले में उसका मुख्य उद्देश्य छात्रों का हित और उनका शैक्षणिक भविष्य सुरक्षित करना था। बोर्ड ने दलील दी कि युद्ध की परिस्थितियों में परीक्षा आयोजित करना संभव नहीं था और विशेष मूल्यांकन व्यवस्था छात्रों को परिणाम उपलब्ध कराने का एक सद्भावनापूर्ण प्रयास था।

    CBSE ने कोर्ट को बताया कि विशेष व्यवस्था से असंतुष्ट छात्रों के लिए आगे एक और परीक्षा कराने की नीति पहले से ही मौजूद है। प्रभावित देशों में परिस्थितियां अनुकूल होने और परीक्षा आयोजित करना व्यावहारिक रूप से संभव होने पर यह परीक्षा कराई जा सकती है।

    सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने यह भी बताया कि CBSE प्रवेश प्रक्रिया को प्रभावित होने से बचाने के लिए अस्थायी या उपलब्ध परिणामों के आधार पर प्रवेश की सुविधा, पुनर्मूल्यांकन और सत्यापन की प्रक्रिया में तेजी तथा परिस्थितियां अनुकूल होने पर विशेष परीक्षा आयोजित करने के लिए तैयार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये कदम केवल याचिका दायर करने वाले छात्रों तक सीमित नहीं होंगे, बल्कि ऐसे सभी 23,052 प्रभावित छात्रों को ध्यान में रखकर उठाए जाएंगे।

    छात्रों ने आग्रह किया था कि उन्हें कंपार्टमेंट परीक्षा देने वाले छात्रों के साथ परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाए। हालांकि, पीठ ने सॉलिसिटर जनरल की यह दलील स्वीकार की कि सभी प्रभावित छात्रों को उसी समय परीक्षा में शामिल करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं होगा।

    कोर्ट ने 28 जुलाई की पिछली सुनवाई के दौरान रखे गए इस सुझाव को भी दर्ज किया कि अगली परीक्षा आयोजित करने में लगने वाले समय को 82 दिन से घटाकर 70 दिन किया जा सकता है। हालांकि, इस संबंध में व्यावहारिक संभावना का निर्णय CBSE पर छोड़ दिया गया।

    30 जुलाई को पारित आदेश, जिसे 12 अगस्त को अपलोड किया गया, में पीठ ने कहा,

    “हम वर्तमान रिट याचिकाओं का निपटारा इस प्रकार करने के इच्छुक हैं कि याचिकाकर्ता जल्द-से-जल्द अगली परीक्षा में प्रतिस्पर्धा करने की स्थिति में हों और अगले वर्ष उच्च शिक्षा के लिए भी प्रतिस्पर्धा कर सकें।”

    इस तरह सुप्रीम कोर्ट ने CBSE की मौजूदा मूल्यांकन व्यवस्था को रद्द करने या प्रभावित छात्रों को कंपार्टमेंट परीक्षा के साथ परीक्षा देने की अनुमति देने से इनकार किया। साथ ही छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए जल्द विशेष परीक्षा कराने और उच्च शिक्षा में उनके अवसर सुरक्षित करने की दिशा में CBSE की जिम्मेदारी स्पष्ट की।

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