राजस्थान हाईकोर्ट सख्त: एडवोकेट क्लर्क का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य, इंटर्न के लिए भी ड्रेस कोड
Amir Ahmad
24 Aug 2026 11:39 AM IST

राजस्थान हाईकोर्ट ने एडवोकेट क्लर्कों के प्रवेश, रजिस्ट्रेशन और आचरण को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए विस्तृत निर्देश जारी किए।
जस्टिस रवि चिरानिया की पीठ ने स्पष्ट किया कि बिना रजिस्ट्रेशन के किसी भी व्यक्ति को एडवोकेट क्लर्क के रूप में कोर्ट परिसर में काम करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। साथ ही लॉ इंटर्न और कोर्ट की कार्यवाही देखने आने वाले छात्रों के लिए भी ड्रेस कोड और पहचान संबंधी नियम तय किए गए।
मामला कोर्ट के संज्ञान में आई उन घटनाओं के बाद आया, जिनमें कुछ एडवोकेट क्लर्क निर्धारित स्थान के बजाय अन्य जगह बैठे पाए गए। एक व्यक्ति कोर्ट रूम में ईयरफोन लगाकर मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहा था जबकि एक अन्य व्यक्ति मुड़ी हुई आस्तीन के साथ अत्यधिक अनौपचारिक और संस्थान की गरिमा के प्रतिकूल ढंग से बैठा मिला। कोर्ट ने कहा कि कोर्ट के समय में इस तरह का आचरण स्वीकार नहीं किया जा सकता।
सुनवाई के दौरान दोनों बार एसोसिएशनों के अध्यक्षों और एडवोकेट क्लर्क एसोसिएशन, जोधपुर के पदाधिकारियों की ओर से सुझाव भी रखे गए। कोर्ट को बताया गया कि वर्तमान में 330 से अधिक लोग एडवोकेट क्लर्क के रूप में कार्य कर रहे हैं, लेकिन राजस्थान हाईकोर्ट नियम, 1952 के तहत केवल 163 लोग ही पंजीकृत हैं। अंतिम बार पंजीकरण की प्रक्रिया वर्ष 2019 में हुई।
कोर्ट ने कहा कि एडवोकेट क्लर्क कानूनी व्यवस्था के संचालन का महत्वपूर्ण और अभिन्न हिस्सा हैं लेकिन कोर्ट परिसर तक उनकी पहुंच और प्रशासन के साथ उनके व्यवहार को उचित नियमों के तहत नियंत्रित किया जाना आवश्यक है।
कोर्ट ने अपने निर्देशों में कहा कि एडवोकेट क्लर्क के रूप में काम कर रहे सभी व्यक्तियों को 10 दिन के भीतर पंजीकरण के लिए आवेदन करना होगा। ऐसा नहीं करने पर उन्हें कोर्ट परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। आवेदन एडवोकेट क्लर्क एसोसिएशन के अध्यक्ष द्वारा प्रति-हस्ताक्षरित किए जाएंगे और रजिस्ट्रार (न्यायिक) को भेजे जाएंगे।
रजिस्ट्रार (प्रशासन) को रजिस्ट्रार (न्यायिक) के समन्वय से 45 दिनों के भीतर पंजीकरण प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया गया। इस दौरान आवेदकों को 45 दिनों के लिए अस्थायी पहचान पत्र जारी किए जाएंगे। प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र व्यक्तियों को स्थायी पहचान पत्र दिए जाएंगे।
कोर्ट ने सभी आवेदकों का स्वतंत्र पुलिस सत्यापन अनिवार्य किया। आवेदकों को अपने खिलाफ दर्ज किसी भी आपराधिक मामले, गिरफ्तारी या दोषसिद्धि की जानकारी देनी होगी, चाहे मामला पुराना हो या वर्तमान में लंबित हो। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल इस आधार पर आवेदन को स्वतः खारिज नहीं किया जाएगा और प्रत्येक मामले पर अलग-अलग विचार किया जाएगा।
जो व्यक्ति एक वर्ष से कम समय से एडवोकेट क्लर्क के रूप में काम कर रहे हैं और इसलिए रजिस्ट्रेशन के लिए पात्र नहीं हैं, वे केवल किसी विधिवत पंजीकृत एडवोकेट क्लर्क और संबंधित एडवोकेट के प्रत्यक्ष नियंत्रण में ही काम कर सकेंगे। इसके लिए संबंधित एडवोकेट को शपथपत्र देना होगा।
कोर्ट ने एडवोकेट क्लर्कों के लिए निर्धारित वर्दी का सख्ती से पालन करने और मोबाइल फोन के इस्तेमाल को निर्धारित नियमों तक सीमित रखने के निर्देश भी दिए। कोर्ट रूम में ईयरफोन का इस्तेमाल और संस्थान की गरिमा के प्रतिकूल तरीके से बैठने जैसे व्यवहार को अनुचित माना गया।
लॉ इंटर्न और स्टूडेंट्स के लिए भी स्पष्ट नियम बनाए गए। पुरुष इंटर्न को टाई के साथ औपचारिक पोशाक पहननी होगी, जबकि महिला इंटर्न औपचारिक भारतीय परिधान अथवा शर्ट-पैंट के साथ टाई पहन सकेंगी।
कॉलेज का पहचान पत्र रखना अनिवार्य होगा। संबंधित एडवोकेट और चैंबरों को इंटर्न को कोर्ट के आचरण संबंधी नियमों की जानकारी देने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई।
हाईकोर्ट ने चेतावनी दी कि बिना रजिस्ट्रेशन या वैध अस्थायी पहचान पत्र के एडवोकेट क्लर्क के रूप में काम करने वाला कोई व्यक्ति पाए जाने पर उसे हिरासत में लिया जा सकता है और उसके खिलाफ उचित कार्रवाई, FIR दर्ज करने सहित, की जा सकती है।
मामले की अगली सुनवाई अनुपालन के लिए 28 अक्टूबर, 2026 को होगी।


