मोटर दुर्घटना मुआवजा मामले में बीमा कंपनी की लापरवाही पर राजस्थान हाईकोर्ट सख्त, चीफ रीजनल मैनेजर से मांगा स्पष्टीकरण

  • मोटर दुर्घटना मुआवजा मामले में बीमा कंपनी की लापरवाही पर राजस्थान हाईकोर्ट सख्त, चीफ रीजनल मैनेजर से मांगा स्पष्टीकरण

    राजस्थान हाईकोर्ट ने मोटर दुर्घटना मुआवजे के एक मामले में बीमा कंपनी की ओर से प्रभावी तरीके से पैरवी नहीं किए जाने पर यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी के राजस्थान स्थित चीफ रीजनल मैनेजर से स्पष्टीकरण मांगा।

    कोर्ट ने उनसे यह बताने को कहा है कि राज्यभर में मोटर दुर्घटना मुआवजे के मामलों की निगरानी किस प्रक्रिया के तहत की जाती है और इन मामलों में बीमा कंपनी का बचाव करने के लिए वकीलों की नियुक्ति तथा उन्हें केस सौंपने की क्या व्यवस्था है।

    जस्टिस अशोक कुमार जैन की पीठ ने कहा कि चुनौती दिए गए आदेश से संकेत मिलता है कि ट्रिब्यूनल के समक्ष मामले का बचाव करने में बीमा कंपनी की ओर से लापरवाही बरती गई। यह मामला यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी की उस अपील से जुड़ा है, जिसमें कंपनी ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) द्वारा दिए गए पांच लाख रुपये के मुआवजा आदेश को चुनौती दी। बीमा कंपनी ने दलील दी कि ट्रिब्यूनल ने पुलिस रिपोर्ट या प्राथमिकी (FIR) के बिना ही मृतक की मृत्यु मान ली।

    कोर्ट ने टिप्पणी की कि बीमा कंपनी भारत सरकार के स्वामित्व वाली एक राष्ट्रीयकृत संस्था है। ऐसे में राजस्थान के चीफ रीजनल मैनेजर को तलब करना उचित है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि राज्य में मोटर दुर्घटना मुआवजे (MAC) से जुड़े मामलों की निगरानी के लिए कौन-सी प्रक्रिया अपनाई जाती है और बीमा कंपनी के खिलाफ दायर मामलों में बचाव के लिए वकीलों की नियुक्ति तथा उन्हें मामले सौंपने की व्यवस्था क्या है।

    हाईकोर्ट ने संबंधित चीफ रीजनल मैनेजर को निर्देश दिया कि वे आवश्यक जानकारी हलफनामे के माध्यम से प्रस्तुत करें और अगली सुनवाई पर अदालत में उपस्थित हों।

    इस बीच, कोर्ट ने 11 जून, 2026 को पारित मुआवजा आदेश पर अगली सुनवाई तक रोक लगाई।

    मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर, 2026 को होगी।

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